नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले संभावित प्रदर्शन को लेकर राष्ट्रीय राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। जंतर-मंतर 2.0 के नाम से बुलाए गए इस आयोजन से पहले दिल्ली पुलिस ने एक बड़ा सुरक्षा प्लान तैयार किया है। शहर के अलग-अलग बॉर्डर और मुख्य रास्तों पर पुलिस बल को तैनात कर दिया गया है। आने-जाने वाले हर संदिग्ध वाहन की बारीकी से जांच की जा रही है ताकि कानून व्यवस्था से जुड़ा कोई भी जोखिम समय रहते टाला जा सके।
सुरक्षा एजेंसियों से मिले इनपुट के बाद पुलिस ने सार्वजनिक परिवहन को भी अपने रडार पर ले लिया है। शहर में प्रवेश करने वाली लंबी दूरी की बसों की सघन तलाशी ली जा रही है। यात्रियों के सामान की चेकिंग के साथ उनके पहचान पत्रों की भी जांच हो रही है। पुलिस यह सुनिश्चित करना चाहती है कि प्रदर्शन की आड़ में कोई बाहरी असामाजिक तत्व या हुड़दंगी राष्ट्रीय राजधानी में दाखिल न हो सके। इस पूरी कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य शहर में शांति और सुरक्षा का माहौल बनाए रखना है।
पीजी मालिकों और हॉस्टल संचालकों के लिए निर्देश
इस मेगा सुरक्षा योजना के तहत दिल्ली पुलिस ने स्थानीय पीजी यानी पेइंग गेस्ट आवासों और हॉस्टलों के मालिकों के साथ भी बैठकें शुरू कर दी हैं। पुलिस ने सभी पीजी और लॉज संचालकों से अपील की है कि वे अपने यहां रहने वाले नए किरायेदारों का पूरा ब्योरा पुलिस थाने में दर्ज कराएं। विशेषकर हाल ही में आए बाहरी छात्रों और युवाओं की गतिविधियों पर नजर रखने को कहा गया है। पुलिस का मानना है कि प्रदर्शन के दौरान किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने के लिए जमीनी स्तर पर सूचना तंत्र का मजबूत होना बहुत जरूरी है।
दूसरी तरफ राजनीतिक गलियारों और विभिन्न संगठनों में भी इस प्रदर्शन को लेकर हलचल तेज हो गई है। हाल ही में विभिन्न नेताओं के बयानों और तीखे तेवरों ने सियासी पारा बढ़ा दिया है। एक तरफ जहां प्रशासनिक स्तर पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक दलों की गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। राहुल गांधी के मामलों और विपक्ष के विभिन्न मार्चों के कारण देश की राजनीति में लगातार गर्माहट बनी हुई है, जिसका असर दिल्ली की कानून व्यवस्था पर भी साफ दिखाई दे रहा है।
बिहार से लेकर लखनऊ तक राजनीतिक सरगर्मी
राजधानी दिल्ली के अलावा देश के अन्य हिस्सों में भी विरोध प्रदर्शनों का दौर जारी है। सीवान में इंडिया गठबंधन द्वारा 'ज्ञानेश भगाओ, लोकतंत्र बचाओ' मार्च निकालकर पुतला दहन किया गया। इसके अलावा उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी शिक्षामंत्री के आवास का घेराव करने वाले प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस ने मुकदमे दर्ज किए हैं। इन सभी घटनाओं से साफ है कि देश भर में राजनीतिक दलों और आंदोलनों की सुई पूरी तरह सक्रिय मोड में आ चुकी है, जिससे स्थानीय प्रशासन की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं।
दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि जंतर-मंतर पर जुटने वाली संभावित भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त फोर्स तैनात कर दी गई है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए रैपिड एक्शन फोर्स को भी तैयार रखा गया है। पुलिस ने साफ कर दिया है कि यदि किसी भी व्यक्ति ने शांति भंग करने की कोशिश की या कानून अपने हाथ में लिया, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन आम नागरिकों से भी अपील कर रहा है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और पुलिस प्रशासन का सहयोग करें।
सुरक्षा और शांति बनाए रखने की चुनौती
राजधानी में इस तरह के बड़े आयोजनों के दौरान आम जनता को भी यातायात से जुड़ी पाबंदियों का सामना करना पड़ सकता है। कई मार्गों पर रूट डायवर्जन किया जा सकता है ताकि वीआईपी इलाकों और प्रदर्शन स्थल के आसपास ट्रैफिक जाम न लगे। पुलिस ट्रैफिक विंग ने लोगों को सलाह दी है कि वे घर से निकलने से पहले वैकल्पिक रास्तों की जानकारी जरूर रख लें। 'द फ्रीलान्स' की ग्राउंड टीम लगातार इस पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है और आने वाले घंटों में भी पल-पल की अपडेट आप तक पहुंचाती रहेगी।





