नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय शेयर बाजार इन दिनों अमेरिकी बाजारों की चाल और घरेलू आंकड़ों के बीच झूला झूल रहा है। कभी सेंसेक्स में एक हजार अंकों से ज्यादा की तूफानी तेजी आती है, तो अगले ही दिन बाजार में बिकवाली का दबाव दिखने लगता है। अमेरिका के प्रमुख सूचकांक डउ जोन्स, नैस्डैक और एसएंडपी 500 की चाल का सीधा असर दलाल स्ट्रीट पर साफ तौर पर महसूस किया जा रहा है। निवेशक हर सुबह ट्रेडिंग शुरू होने से पहले अमेरिकी बाजार के बंद होने के आंकड़ों और गिफ्ट निफ्टी के संकेतों को बहुत ध्यान से देख रहे हैं।
बीते कुछ कारोबारी सत्रों की बात करें तो बाजार की शुरुआत कभी हरे निशान में होती है तो कभी लाल निशान पर खुलने के बाद बाजार संभलने की कोशिश करता है। आईटी शेयरों में अचानक आई तेजी ने निवेशकों को थोड़ा संबल जरूर दिया है, लेकिन वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण डर का माहौल भी बना हुआ है। अमेरिकी बाजार में आने वाले नए सीपीआई यानी महंगाई के आंकड़े और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर इस समय पूरी दुनिया के निवेशकों की नजर टिकी हुई है। भारत में भी निफ्टी के 22,450 के स्तर के आसपास रहने से बाजार में एक कशमकश की स्थिति बनी हुई है।
गिफ्ट निफ्टी और एशियाई बाजारों के संकेत
सुबह-सुबह कारोबार शुरू होने से पहले गिफ्ट निफ्टी यह तय कर देता है कि आज बाजार की शुरुआत किस दिशा में होने वाली है। एशियाई बाजारों से मिलने वाले मिले-जुले संकेतों के कारण भारतीय बाजार के ट्रेडर्स को समझ नहीं आ रहा है कि वे लॉन्ग पोजीशन बनाएं या शॉर्ट। कई बार बाजार में अचानक हाहाकार मच जाता है और देखते ही देखते निवेशकों की गाढ़ी कमाई कम हो जाती है। जानकारों का कहना है कि वैश्विक बाजारों में हो रहे उतार-चढ़ाव का असर सीधे तौर पर भारत के मझोले और छोटे शेयरों पर भी पड़ रहा है। ऐसे में निवेशकों को बिना सोचे-समझे किसी भी शेयर में पैसा लगाने से बचना चाहिए।
विश्लेषकों का मानना है कि जब तक अमेरिका में ब्याज दरों और महंगाई को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ नहीं होती, तब तक शेयर बाजार में इसी तरह का उतार-चढ़ाव जारी रहेगा। हालांकि, भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत बुनियादी कारणों की वजह से बड़ी गिरावट आने पर निवेशक निचले स्तरों पर खरीदारी भी कर रहे हैं। आईटी, बैंकिंग और ऑटो सेक्टर के शेयरों पर इस समय सबसे ज्यादा नजर रखी जा रही है, क्योंकि यही वो क्षेत्र हैं जो बाजार को या तो नहीं ऊंचाइयों पर ले जा सकते हैं या फिर नीचे खींच सकते हैं।
डउ जोन्स का भारतीय बाजार पर सीधा असर
अमेरिकी शेयर बाजार का दिग्गज सूचकांक डउ जोन्स जब भी रात में ऊपर या नीचे बंद होता है, उसका मनोवैज्ञानिक असर अगले दिन भारतीय बाजारों पर तुरंत दिखाई देता है। विदेशी संस्थागत निवेशक यानी एफआईआई जब अमेरिकी बाजार के मूड को देखकर भारतीय शेयरों में बिकवाली करते हैं, तो बाजार धड़ाम से नीचे आ जाता है। इसके विपरीत, वैश्विक स्तर पर सकारात्मक माहौल बनने पर सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार उछाल देखने को मिलता है। बाजार के इस खेल में छोटे और रिटेल निवेशकों को सबसे ज्यादा सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
मैदान पर काम करने वाले वित्तीय जानकारों का कहना है कि बाजार में इस समय किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें। तकनीकी चार्ट और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों में ही निवेश करना इस समय सबसे समझदारी भरा कदम है। जब तक डउ जोन्स और अमेरिकी महंगाई के आंकड़े पूरी तरह सामने नहीं आ जाते, तब तक बाजार में संभलकर ट्रेड करना ही एकमात्र विकल्प बचता है।
विशेषज्ञों की निवेशकों को खास सलाह
बाजार के मौजूदा हालात को देखते हुए सीनियर ब्रोकर और एक्सपर्ट्स लगातार यह कह रहे हैं कि किसी भी जल्दबाजी में आकर बड़ा दांव न लगाएं। सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी एसआईपी के जरिए धीरे-धीरे निवेश करना इस उथल-पुथल भरे दौर में सबसे सुरक्षित तरीका माना जा रहा है। जिन निवेशकों ने आईटी या चुनिंदा वित्तीय शेयरों में पैसा लगाया है, उन्हें अपने स्टॉप लॉस का कड़ाई से पालन करना चाहिए। द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि आने वाले कुछ दिन बाजार के लिहाज से बहुत संवेदनशील रहने वाले हैं।






