अमेरिकी शेयर बाजार इन दिनों ऐतिहासिक तेजी के दौर से गुजर रहा है। दुनिया भर के निवेशकों की निगाहें इस समय अमेरिकी बाजारों की चाल पर टिकी हुई हैं। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, डाओ जोन्स, नैस्डैक और एसएंडपी 500 सूचकांक लगातार मजबूत बढ़त के साथ कारोबार कर रहे हैं। अमेरिकी बाजार में यह तेजी मुद्रास्फीति के आंकड़ों और कंपनियों के तिमाही नतीजों से पहले आई है। निवेशक भविष्य के आर्थिक संकेतों को समझने के लिए पूरी तरह तैयार बैठे हैं।
बीते सत्र में ग्लोबल मार्केट से मिलेजुले आंकड़े सामने आए हैं। नैस्डैक ने इंट्राडे कारोबार के दौरान नया रिकॉर्ड बनाते हुए नया मुकाम छुआ है। नैस्डैक में आई इस जबरदस्त तेजी ने वैश्विक स्तर पर निवेशकों का उत्साह बढ़ा दिया है। डाओ जोन्स और एसएंडपी 500 भी लगातार मजबूत स्थिति में बंद हुए हैं। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखने को मिली है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए राहत की बात मानी जा रही है। सोना और चांदी जैसी कीमती धातुओं में भी लगातार मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया गया है।
गिफ्ट निफ्टी से मिल रहे हैं मिलाजुला संकेत
एक तरफ जहां अमेरिकी बाजार रिकॉर्ड ऊंचाई पर ट्रेड कर रहे हैं, वहीं भारतीय शेयर बाजार के लिए शुरुआती संकेत थोड़े अलग हैं। गिफ्ट निफ्टी से मिल रहे संकेतों के मुताबिक भारतीय बाजार की शुरुआत कमजोर या सपाट हो सकती है। एशियाई बाजारों से भी कमजोरी के कुछ संकेत मिल रहे हैं, जिसके कारण घरेलू निवेशकों में सतर्कता का माहौल है। बाजार के जानकारों का मानना है कि वैश्विक बाजारों की तेजी का सीधा फायदा तुरंत घरेलू बाजार को मिले यह जरूरी नहीं है।
भारतीय बाजार के जानकारों का कहना है कि निवेशकों को हर वैश्विक हलचल पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। अमेरिकी बाजार में आने वाले सीपीआई यानी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आंकड़े तय करेंगे कि आने वाले दिनों में ब्याज दरों को लेकर अमेरिकी केंद्रीय बैंक क्या रुख अपनाएगा। अगर आंकड़े अनुमान के मुताबिक रहते हैं, तो वैश्विक बाजारों में यह तेजी आगे भी जारी रह सकती है। इसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार के बड़े शेयरों पर भी देखने को मिल सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की भूमिका
इस पूरी स्थिति में कच्चे तेल की कीमतें बहुत बड़ा रोल निभा रही हैं। कच्चा तेल सुस्त चाल के साथ कारोबार कर रहा है और यह एक निश्चित दायरे के नीचे बना हुआ है। भारत जैसे देश के लिए कच्चे तेल की कम कीमतें हमेशा फायदेमंद साबित होती हैं क्योंकि इससे आयात का बिल कम होता है। इसके साथ ही विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों पर भी सबकी नजर बनी हुई है। वे वैश्विक बाजार के रिकॉर्ड हाई और स्थानीय बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच अपनी रणनीति तय कर रहे हैं।
घरेलू स्तर पर निवेशक इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि अमेरिकी बाजार की इस रिकॉर्ड रैली का भारतीय शेयरों पर कितना असर होगा। बाजार विशेषज्ञों की सलाह है कि निवेशकों को बिना किसी जल्दबाजी के मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर फोकस करना चाहिए। छोटी अवधि के उतार-चढ़ाव से बचने के लिए लंबी अवधि की योजना बनाना ही इस समय सबसे समझदारी भरा कदम माना जा रहा है।
कंपनियों के तिमाही नतीजे तय करेंगे बाजार की अगली दिशा
आने वाले दिनों में बाजार की चाल मुख्य रूप से कॉरपोरेट कंपनियों के नतीजों पर निर्भर करेगी। अमेरिका में आने वाले तिमाही आंकड़े और महंगाई के आंकड़े वैश्विक बाजार की दिशा तय करेंगे। भारत में भी निवेशक इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि ग्लोबल संकेतों का असर स्थानीय बाजार की ओपनिंग पर किस तरह से पड़ता है। द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि बाजार के हर छोटे-बड़े अपडेट पर नजर रखना इस समय निवेशकों के लिए सबसे जरूरी काम है।












