नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — खेल के मैदान पर कब कौन सा नया इतिहास बन जाए, यह कोई नहीं जानता। अमरीकी ओपन टेनिस टूर्नामेंट में इस बार कुछ ऐसा ही अनोखा नजारा देखने को मिला है। यूक्रेन की स्टार टेनिस खिलाड़ी एलिना स्वितोलिना और उनके पति गॉल मोनफिल्स ने मिक्स्ड डबल्स के सेमीफाइनल में धमाकेदार एंट्री कर ली है। पति-पत्नी की इस जोड़ी ने अपने खेल से पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। कोर्ट पर उतरते ही दोनों ने गजब का तालमेल दिखाया और अपने सभी विरोधियों को पीछे छोड़ दिया। इस बड़ी जीत के बाद दोनों ने अपनी बेटी को एक बेहद भावुक संदेश भी समर्पित किया। खेलप्रेमियों के लिए यह पल किसी सपने से कम नहीं था क्योंकि कोर्ट पर इस जोड़े की ऊर्जा देखने लायक थी।
लेकिन इस चमक-धमक और जीत की खुशी के पीछे एक बहुत बड़ा और गहरा दर्द भी छिपा हुआ है। एलिना स्वितोलिना जिस देश से आती हैं, वहां इन दिनों हालात बेहद डरावने और खराब हैं। हाल ही में यूक्रेन की राजधानी कीव पर रूस की तरफ से बहुत भयानक हमले किए गए। इन बर्बर हमलों में कीव का वह मशहूर टेनिस क्लब भी पूरी तरह खाक हो गया, जहां कभी एलिना ने खेल की शुरुआत की थी। अपने बचपन की यादों और अपने घर को इस तरह मलबे में बदलते देखना किसी भी इंसान के लिए बहुत बड़ा आघात है। स्वितोलिना ने सोशल मीडिया पर अपने दिल का दर्द बयां करते हुए एक बहुत ही भावुक पोस्ट लिखा। उन्होंने बताया कि इस भयानक जंग में अब तक सैकड़ों यूक्रेनी खिलाड़ी अपनी जान गंवा चुके हैं।
युद्ध के साये में कोर्ट पर उतरने का कड़ा संघर्ष
एक पेशेवर खिलाड़ी के लिए युद्ध के माहौल के बीच मैदान पर उतरना आसान नहीं होता। जब देश के लोग हर दिन गोलियों और बमों की आवाज सुन रहे हों, तब कोर्ट पर पसीना बहाना बहुत मुश्किल काम है। एलिना स्वितोलिना ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उनका पूरा परिवार और उनके देशवासी इस समय बेहद कठिन दौर से गुजर रहे हैं। कीव में उनके टेनिस क्लब का तहस-नहस होना सिर्फ एक इमारत का टूटना नहीं है, बल्कि वह उनकी कई पीढ़ियों की यादों का अंत है। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपने देश की गरिमा को बनाए रखने के लिए टेनिस कोर्ट पर डटी रहीं। यूएस ओपन का यह सफर सिर्फ एक खेल प्रतियोगिता नहीं बल्कि उनकी जिजीविषा का सबसे बड़ा प्रमाण है।
स्वितोलिना के लिए यह साल खेल के लिहाज से उतार-चढ़ाव भरा और ऐतिहासिक दोनों रहा है। कुछ समय पहले ही उन्होंने इटैलियन ओपन का खिताब अपने नाम किया था। फाइनल मुकाबले में उन्होंने कोको गॉफ जैसी दिग्गज खिलाड़ी को हराकर सबको हैरान कर दिया था। आठ साल के लंबे इंतजार के बाद किसी बड़े टूर्नामेंट में यह उनकी सबसे बड़ी खिताबी जीत थी। हालांकि, विंबलडन जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में उन्हें अपनी ही देश की साथी खिलाड़ी यूलिया स्निगुर के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था। खेल में हार और जीत का यह सिलसिला चलता रहता है, लेकिन स्वितोलिना ने हर मुश्किल परिस्थिति में अपनी लड़ने की ताकत को कभी कम नहीं होने दिया।
पति गॉल मोनफिल्स का मिला मजबूत साथ
इस मुश्किल समय में एलिना स्वितोलिना को उनके पति और साथी खिलाड़ी गॉल मोनफिल्स का बहुत मजबूत साथ मिला है। टेनिस कोर्ट पर जब यह दोनों उतरते हैं, तो मैदान का माहौल पूरी तरह बदल जाता है। दोनों का आपसी तालमेल और एक-दूसरे के प्रति सम्मान खेल के दौरान साफ नजर आता है। मिक्स्ड डबल्स के सेमीफाइनल तक का यह सफर उनके इसी अटूट रिश्ते और खेल के प्रति समर्पण का नतीजा है। यूएस ओपन में पति-पत्नी की इस जोड़ी ने इतिहास रचते हुए उन तमाम आलोचकों को करारा जवाब दिया है जो मानते थे कि परिवार और खेल को साथ संभालना मुमकिन नहीं है।
मैदान से बाहर भले ही दुनिया में कितनी भी राजनीतिक उथल-पुथल चल रही हो, लेकिन कोर्ट के भीतर एलिना स्वितोलिना केवल एक योद्धा की तरह खेलती हैं। उनके आंसुओं में देश का दर्द है, तो उनकी मुस्कान में जीत की वह चमक है जो लाखों युवाओं को प्रेरित करती है। कीव के तबाह हुए क्लब से लेकर न्यूयॉर्क के बड़े टेनिस स्टेडियम तक की यह यात्रा आसान नहीं थी। 'द फ्रीलान्स' की इस खास ग्राउंड पड़ताल से यह साफ हो जाता है कि सच्चे खिलाड़ी कभी भी विपरीत परिस्थितियों के आगे घुटने नहीं टेकते। स्वितोलिना की यह कहानी आने वाले कई सालों तक खेल जगत में प्रेरणा के रूप में याद रखी जाएगी।




