नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश के अन्नदाता यानी किसानों से जुड़े मुद्दे एक बार फिर देश की सुर्खियों में छाए हुए हैं। पंजाब और हरियाणा की सीमा पर किसानों ने एक बार फिर अपनी मांगों को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है। किसान नेताओं ने सरकार को चेतावनी दी है कि यह प्रदर्शन तो अभी महज एक शुरुआत है। अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है। सीमा पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है और पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि किसी भी तरह की अनहोनी से निपटा जा सके। दूसरी तरफ, देश के कृषि वैज्ञानिक लगातार किसानों की आय बढ़ाने के लिए नए उपाय सुझा रहे हैं।
जमीनी स्तर पर मिल रही रिपोर्ट बताती हैं कि एक तरफ जहां सीमाओं पर राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों को लेकर तनाव बना हुआ है, वहीं गांवों में खेती को बेहतर बनाने के प्रयास भी जारी हैं। हाल ही में कृषि अनुसंधान परिषद से जुड़े वैज्ञानिकों ने गांवों का दौरा किया है। इन दौरों का मकसद किसानों को यह समझाना है कि वे अपनी जमीन पर संतुलित खाद का इस्तेमाल करें। वैज्ञानिकों का साफ कहना है कि खेत में जरूरत से ज्यादा खाद डालने से फसल अच्छी होने के बजाय खराब हो जाती है। इससे जमीन की उपजाऊ शक्ति भी धीरे-धीरे कम होने लगती है जो भविष्य के लिए बहुत खतरनाक साबित हो सकता है।
मिट्टी की जांच और आधुनिक खेती के नए नुस्खे
खेती की लागत को कम करने और मुनाफा बढ़ाने के लिए अब गांवों में मटी परीक्षण किट बांटी जा रही हैं। वैज्ञानिकों ने हाल ही में कई गांवों में जाकर किसानों को इन किटों के इस्तेमाल का तरीका सिखाया है। इस किट की मदद से किसान खुद यह जान सकते हैं कि उनकी जमीन में किस तत्व की कमी है। जब किसानों को यह पता चल जाता है कि उनकी मिट्टी को किस खाद की जरूरत है, तो वे फालतू की खाद पर पैसा खर्च करने से बच जाते हैं। इससे खेती का खर्च कम होता है और पैदावार भी बहुत अच्छी होती है। सरकार और कृषि संस्थान मिलकर इन कार्यक्रमों को तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं ताकि हर किसान तक यह तकनीक पहुंच सके।
लेकिन इन सकारात्मक बदलावों के बीच किसानों की आर्थिक सुरक्षा और अपराध से जुड़ी घटनाएं भी चिंता का विषय बनी हुई हैं। हाल ही में एक ऐसी घटना सामने आई जिसने सबको हैरान कर दिया। एक ग्रामीण इलाके में बैंक से पैसे निकालकर आ रहे एक सीधे-साधे किसान का पीछा करके शातिर चोरों ने दो लाख रुपये उड़ा लिए। दिनदहाड़े हुई इस चोरी की घटना ने यह दिखा दिया है कि गांवों और कस्बों में काम करने वाले किसानों को कितनी सुरक्षा संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। बैंक से लेकर घर तक का सफर कई बार किसानों के लिए जोखिम भरा साबित होता है, जिससे पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठते हैं।
व्यापार समझौतों और सरकारी नीतियों पर किसानों की नजर
सीमाओं पर चल रहे मौजूदा विरोध प्रदर्शनों के पीछे कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कारण भी बताए जा रहे हैं। किसान संगठनों का कहना है कि सरकार की कुछ व्यापारिक नीतियों और अंतरराष्ट्रीय समझौतों से देश के आम किसानों को नुकसान हो सकता है। इसी बात से नाराज होकर युवा और बुजुर्ग किसान एक बार फिर सड़कों पर उतर आए हैं। नेताओं का साफ कहना है कि जब तक उनकी सभी जायज मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक यह संघर्ष रुकने वाला नहीं है। प्रशासन स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए है और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने की पूरी तैयारी कर रहा है।
मैदान में उतरी हमारी टीम ने पाया कि किसान एक तरफ अपनी हक की लड़ाई के लिए सरकार से दो-दो हाथ करने को तैयार हैं, तो दूसरी तरफ वे अपनी फसल को बेहतर बनाने के लिए विज्ञान का सहारा भी ले रहे हैं। यह एक अजीब स्थिति है जहां संघर्ष और विकास दोनों साथ-साथ चल रहे हैं। एक तरफ जहां आंदोलन की आग सुलग रही है, वहीं दूसरी तरफ खेतों में नई तकनीक अपनाने की होड़ भी लगी है। आने वाले कुछ दिन देश की कृषि और राजनीतिक दोनों दृष्टियों से बहुत महत्वपूर्ण रहने वाले हैं, जिनपर हर किसी की नजर टिकी हुई है।
द फ्रीलान्स की अंतिम ग्राउंड पड़ताल और आगे की राह
हमारी इस विस्तृत पड़ताल से यह साफ हो जाता है कि देश का किसान वर्ग इस समय दो अलग-अलग मोर्चों पर संघर्ष कर रहा है। एक मोर्चा सड़कों पर हक और नीतियों की लड़ाई का है, तो दूसरा मोर्चा अपने खेतों में पैदावार बढ़ाने और खुद को आर्थिक रूप से मजबूत करने का है। जब तक सरकार और किसान संगठनों के बीच बातचीत का कोई ठोस रास्ता नहीं निकलता, तब तक सीमाओं पर तनाव बना रहने की पूरी आशंका है। 'द फ्रीलान्स' इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा और आगे भी जमीन से जुड़ी हर सच्ची खबर आप तक पहुंचाता रहेगा।





