नई दिल्ली: द फ्रीलान्स की विशेष ग्राउंड रिपोर्ट। देश आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 157वीं जयंती मना रहा है। सुबह से ही राजधानी दिल्ली के राजघाट पर राजनीतिक दिग्गजों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजघाट पहुंचकर बापू को नमन किया और श्रद्धांजलि अर्पित की। इस बीच, देश भर में इस राष्ट्रीय पर्व को लेकर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं और विभिन्न सामाजिक व शैक्षणिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।
राजघाट पर श्रद्धांजलि और राजनीतिक सरगर्मी
गांधी जयंती के पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महात्मा गांधी की समाधि स्थल राजघाट पर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। देश के कोने-कोने से विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने बापू के आदर्शों को याद किया। राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी चर्चा रही कि कौन सा नेता राजघाट पहुंचा और किसने इस राष्ट्रीय कार्यक्रम से दूरी बनाई। बापू के सत्य और अहिंसा के संदेश को आज के दौर में प्रासंगिक बताते हुए नेताओं ने देशवासियों को शुभकामनाएं दीं।
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शेयर बाजार, बैंक और सराफा बाजार में अवकाश
गांधी जयंती के राष्ट्रीय अवकाश के कारण आज आम जनजीवन के साथ-साथ वित्तीय बाजार भी पूरी तरह थम से गए हैं। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर आज कोई ट्रेडिंग नहीं हो रही है। इसके साथ ही, कमोडिटी बाजार और सराफा बाजार में भी सोने-चांदी की ट्रेडिंग आज के लिए पूरी तरह बंद है। निवेशकों और कारोबारियों को अब शेयर बाजार के खुलने के लिए तीन दिन का इंतजार करना होगा, क्योंकि इसके बाद शनिवार और रविवार का साप्ताहिक अवकाश है। देश भर के सरकारी और निजी बैंक भी आज बंद हैं, हालांकि डिजिटल बैंकिंग सेवाएं सामान्य रूप से चालू हैं।
युवा पीढ़ी और बापू के चार मूल सिद्धांत
द फ्रीलान्स की पड़ताल में यह भी सामने आया कि डिजिटल युग में आज के अभिभावक और शिक्षक बच्चों को बापू के जीवन दर्शन से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास कर रहे हैं। सोशल मीडिया और विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर महात्मा गांधी के चार प्रमुख सिद्धांतों—सत्य, अहिंसा, सादगी और स्वच्छता—को बच्चों की दिनचर्या में शामिल करने पर जोर दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिस्पर्धा के इस दौर में बापू के ये सिद्धांत बच्चों को मानसिक रूप से मजबूत बनाने और जीवन के हर मोड़ पर सही निर्णय लेने में मदद करेंगे।
अनमोल विचार और डिजिटल शुभकामनाएं
आज सुबह से ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर 'गांधी जयंती 2026 विशेज' ट्रेंड कर रहा है। लोग एक-दूसरे को महात्मा गांधी के अनमोल विचारों वाले संदेश भेज रहे हैं। 'खुद वो बदलाव बनिए जो आप दुनिया में देखना चाहते हैं' जैसे बापू के विचार आज भी लोगों के स्टेटस और संदेशों की शोभा बढ़ा रहे हैं। स्कूलों और कॉलेजों में ऑनलाइन व ऑफलाइन निबंध प्रतियोगिताओं और भाषण कार्यक्रमों के जरिए युवाओं को स्वतंत्रता संग्राम में गांधी जी के योगदान से अवगत कराया जा रहा है।
भविष्य का असर और निष्कर्ष
महात्मा गांधी की 157वीं जयंती महज एक छुट्टी या औपचारिकता बनकर नहीं रह गई है, बल्कि यह आत्मविश्लेषण का अवसर बन गई है। एक ओर जहां वित्तीय बाजारों की बंदी ने कारोबारियों को বিশ্রाम का मौका दिया है, वहीं दूसरी ओर वैचारिक स्तर पर बापू के सिद्धांतों की प्रासंगिकता पर बहस तेज हो गई है। द फ्रीलान्स की इस ग्राउंड रिपोर्ट से यह स्पष्ट है कि आधुनिक भारत आज भी चुनौतियों से निपटने के लिए गांधीवादी दर्शन की ओर उम्मीद भरी नजरों से देखता है।








