नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — पश्चिम एशिया में सुलग रही जंग के बीच एक बड़ी और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। ईरान के साथ चल रहे सैन्य तनाव और संघर्ष में अमेरिका को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। शुरुआती रक्षा रिपोर्टों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया स्रोतों के अनुसार, इस जंग में अमेरिका के कुल 81 विमान और आधुनिक ड्रोन या तो पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं या फिर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। अमेरिकी सेना के लिए यह एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि इतने बड़े पैमाने पर साजो-सामान का नुकसान होना किसी भी महाशक्ति के लिए आसान नहीं होता है।
इस पूरे घटनाक्रम पर जब हमारी टीम ने रक्षा मामलों के जानकारों से बात की, तो उन्होंने इसे आधुनिक युद्धक तकनीक और ड्रोन हमलों का नतीजा बताया। ईरान ने पिछले कुछ महीनों में अपनी सैन्य क्षमता और मिसाइल डिफेंस सिस्टम को काफी मजबूत किया है। अमेरिकी और पश्चिमी देशों के सैन्य ठिकाने जब भी ईरान के रडार या जद में आए, तब वहां भारी तबाही देखने को मिली। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन इस नुकसान के आंकड़ों पर खुलकर कुछ बोलने से बच रहा है, लेकिन रक्षा गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि इस जंग ने अमेरिका की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है।
युद्ध के मैदान में अमेरिकी साजो-सामान की भारी बर्बादी
जंग के मैदान से मिल रही गुप्त और खुली रिपोर्टों से पता चलता है कि नष्ट हुए 81 उपकरणों में कई महंगे टोही ड्रोन, लड़ाकू विमान और साजो-सामान ढोने वाले एयरक्राफ्ट शामिल हैं। ईरान समर्थित मिलिशिया समूहों और ईरानी सेना ने जिस तरह से सटीक हमलों को अंजाम दिया है, उसने अमेरिकी एयर डिफेंस को चकमा दे दिया। अमेरिका के पास दुनिया की सबसे आधुनिक तकनीक होने के बावजूद, कम लागत वाले ईरानी ड्रोनों ने उनके महंगे हथियारों और विमानों को धूल चटा दी है। इससे अमेरिकी रक्षा बजट और वहां की सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठने लगे हैं।
युद्ध के इन हालातों का असर अब वैश्विक राजनीति और तेल बाजारों पर भी साफ दिखने लगा है। अमेरिका पर घरेलू दबाव भी लगातार बढ़ रहा है क्योंकि जनता जानना चाहती है कि आखिर बिना किसी ठोस नतीजे के उनके सैनिकों और सैन्य उपकरणों को क्यों दांव पर लगाया जा रहा है। ट्रंप प्रशासन और अमेरिकी सेना के शीर्ष अधिकारियों के लिए यह स्थिति बेहद असहज होती जा रही है। जानकारों का मानना है कि अगर यह संघर्ष जल्द नहीं थमता है, तो अमेरिकी सेना को और भी बड़े नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
मध्य पूर्व में बदलता सैन्य संतुलन और ईरान की रणनीति
मध्य पूर्व में पिछले कुछ हफ्तों से हालात तेजी से बदले हैं। ईरान ने पारंपरिक युद्ध लड़ने के बजाय असममित युद्ध यानी गुरिल्ला और ड्रोन युद्ध की रणनीति अपनाई है। इस रणनीति ने अमेरिकी सेना के होश उड़ा दिए हैं। ईरान के पास स्वदेशी तकनीक से बने कामइकारी ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों का बड़ा जखीरा है, जिसने अमेरिकी सैन्य अड्डों को लगातार निशाना बनाया है। पेंटागन के रणनीतिकार अब इस बात पर माथापच्ची कर रहे हैं कि इतने मजबूत डिफेंस सिस्टम के बावजूद ईरानी हमलों को रोकने में नाकामी क्यों हाथ लग रही है।
आम नागरिकों और स्थानीय विश्लेषकों का मानना है कि इस जंग का कोई सैनिक समाधान नहीं निकल सकता है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही इस रस्साकशी में केवल तबाही हो रही है। आने वाले दिनों में अगर युद्ध विराम की कोई ठोस पहल नहीं होती है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका और गहरा असर पड़ेगा। 'द फ्रीलान्स' इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है और आगे भी आपको पल-पल की सटीक ग्राउंड रिपोर्ट देता रहेगा।








