नई दिल्ली: 'द फ्रीलान्स' की ऑन-द-ग्राउंड विशेष रिपोर्ट। राजधानी दिल्ली में आयोजित एक उच्चस्तरीय कूटनीतिक चर्चा के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत और रूस के ऐतिहासिक संबंधों पर एक बार फिर मुहर लगाई है। विदेश मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं और पश्चिमी देश भारत पर रूस के साथ संबंधों को लेकर लगातार दबाव बना रहे हैं।
शीतल युद्ध से लेकर वर्तमान तक की कूटनीति
अपने संबोधन में विदेश मंत्री ने पिछले सात दशकों के इतिहास का जिक्र किया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि जब-जब भारत को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कूटनीतिक अलगाव का सामना करना पड़ा या जब पूरी दुनिया पाकिस्तान के पक्ष में लामबंद थी, तब केवल सोवियत संघ और बाद में रूस ने भारत के साथ अडिग रुख अपनाया। कश्मीर जैसे संवेदनशील मुद्दों पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से लेकर अन्य वैश्विक मंचों तक मास्को ने वीटो पावर का इस्तेमाल कर भारत के हितों की रक्षा की थी।
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70 साल में कश्मीर समेत 4 प्रमुख मसलों पर मिला साथ
विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि पिछले 70 वर्षों में कम से कम चार ऐसे बड़े भू-राजनीतिक मोड़ आए, जहां पाकिस्तान के पक्ष में पश्चिमी देशों और वैश्विक समुदाय का भारी दबाव था। ऐसे नाजुक वक्त में रूस ने हर बार भारत की संप्रभुता और अखंडता का समर्थन किया। इन मसलों में मुख्य रूप से कश्मीर मुद्दा, सैन्य संघर्ष और सामरिक सुरक्षा से जुड़े नीतिगत निर्णय शामिल रहे हैं।
आज भी प्रासंगिक हैं भारत-रूस के रणनीतिक रिश्ते
आज के दौर में जब यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच रूस अलग-थलग पड़ता दिख रहा है, भारत ने अपनी 'रणनीतिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy) का परिचय देते हुए रूस के साथ अपने पारंपरिक संबंधों को बनाए रखा है। विदेश मंत्री का यह बयान केवल इतिहास का स्मरण मात्र नहीं है, बल्कि यह वर्तमान वैश्विक ताकतों को एक स्पष्ट संदेश भी है कि भारत अपने पुराने और भरोसेमंद मित्रों को आसानी से नहीं भूलता।
भविष्य के भू-राजनीतिक समीकरणों पर असर
हमारी फील्ड रिपोर्टिंग और कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जयशंकर का यह बयान भारत की विदेश नीति की रीढ़ को मजबूत करता है। यह रेखांकित करता है कि संकट के समय में आजमाया हुआ रिश्ता सबसे अहम होता है। भविष्य में जब भी वैश्विक मंचों पर भारत की स्थिति पर सवाल उठाए जाएंगे, यह ऐतिहासिक सच भारत के कूटनीतिक पक्ष को और अधिक मजबूत बनाए रखेगा।








