बेंगलुरु और दिल्ली के सियासी गलियारों में इन दिनों कर्नाटक की राजनीति को लेकर हलचल तेज हो गई है। राज्य के उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और उनकी राजनीतिक स्थिति को लेकर लगातार नए दावे सामने आ रहे हैं। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, राज्य के भीतर अंदरूनी कलह और विरोधी दलों के हमलों ने माहौल को पूरी तरह गरमा दिया है। एक तरफ जहां सरकार अपनी योजनाओं को अमलीजामा पहनाने में जुटी है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष लगातार सरकार गिरने के दावे कर रहा है।
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश नेताओं, खासकर बीवाई विजयेंद्र की ओर से दिए गए बयानों ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। विपक्षी नेताओं का दावा है कि कर्नाटक में मौजूदा सरकार का कार्यकाल ज्यादा लंबा नहीं चलेगा और पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। इन बयानों के बाद से ही कांग्रेस खेमे में भी बेचैनी बढ़ गई है और पार्टी के वरिष्ठ नेता लगातार डैमेज कंट्रोल में जुटे हुए हैं। हालांकि, कांग्रेस पार्टी इन सभी दावों को कोरी अफवाह और विपक्षी दलों की ख्याली पुलाव बता रही है।
बेंगलुरु में विकास कार्यों की रफ्तार और उद्घाटन
एक तरफ जहां सियासी बयानों का दौर चल रहा है, वहीं दूसरी तरफ डीके शिवकुमार प्रशासनिक मोर्चे पर लगातार सक्रिय नजर आ रहे हैं। हाल ही में उन्होंने बेंगलुरु शहर में यातायात की समस्या को कम करने के लिए एक बड़े प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया है। शिवकुमार ने राजधानी में लगभग 10.7 किलोमीटर लंबी सिग्नल-फ्री सड़क का लोकार्पण किया है, जिससे आम जनता को ट्रैफिक जाम से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। इस तरह के उद्घाटन कार्यक्रमों के जरिए सरकार यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि उसका पूरा ध्यान सिर्फ और सिर्फ विकास कार्यों पर है।
प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की बुनियादी ढांचा परियोजनाएं शहर की तस्वीर बदलने का काम करती हैं। बेंगलुरु जैसे महानगर में ट्रैफिक की समस्या हमेशा से एक बड़ा मुद्दा रही है और सरकार इस मोर्चे पर खुद को साबित करना चाहती है। डीके शिवकुमार खुद इन परियोजनाओं की मॉनिटरिंग कर रहे हैं ताकि समय पर काम पूरा हो सके। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि एक तरफ राजनीतिक संकट के बादल हैं, तो दूसरी तरफ डीके शिवकुमार विकास कार्यों के जरिए अपनी मजबूत पकड़ दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।
विपक्ष के दावों पर कांग्रेस का पलटवार
विपक्षी दल बीजेपी के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने साफ कर दिया है कि सरकार पूरी तरह सुरक्षित है। नेताओं का कहना है कि बीजेपी के पास कोई मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वे इस तरह की बयानबाजी कर जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस नेताओं का यह भी दावा है कि पार्टी विधायक पूरी तरह एकजुट हैं और सरकार अपना पांच साल का कार्यकाल बिना किसी रुकावट के पूरा करेगी।
लेकिन जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों के बीच इन चर्चाओं को लेकर तरह-तरह की बातें हो रही हैं। आम जनता का मानना है कि नेताओं की आपसी खींचतान से अंततः विकास कार्यों पर असर पड़ता है। लोग चाहते हैं कि राजनेता बयानबाजी की बजाय महंगाई, पानी और सड़क जैसी बुनियादी समस्याओं पर ज्यादा ध्यान दें। बेंगलुरु के स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन आम नागरिकों की परेशानियां जस की तस बनी रहती हैं।
द फ्रीलान्स की अंतिम ग्राउंड पड़ताल
द फ्रीलान्स की टीम ने जब बेंगलुरु और आसपास के इलाकों में पड़ताल की, तो यह बात सामने आई कि फिलहाल सरकार को कोई तात्कालिक खतरा नहीं है। विधानसभा में संख्या बल पूरी तरह ruling party के पक्ष में नजर आता है। हालांकि, अंदरूनी राजनीतिक समीकरण समय-समय पर बदलते रहते हैं, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि डीके शिवकुमार इन राजनीतिक चुनौतियों का सामना कैसे करते हैं और अपनी स्थिति को कितना मजबूत रखते हैं।






