बेंगलुरु/ग्राउंड ब्यूरो — कन्नड़ फिल्म जगत के सबसे लोकप्रिय और चहेते अभिनेता पुनीत राजकुमार को आज भी लोग उतने ही प्यार से याद करते हैं जितना उनके जीवित रहते करते थे। पुनीत राजकुमार का अचानक दुनिया से चले जाना पूरे देश और खासकर कर्नाटक के लिए एक बहुत बड़ा सदमा था। लोग उन्हें प्यार से 'अप्पु' कहकर बुलाते थे और उनका सरल स्वभाव हर किसी का दिल जीत लेता था। सोशल मीडिया पर आज भी उनके पुराने वीडियो, भाषण और फिल्मों के क्लिप तेजी से वायरल होते रहते हैं। लोग उनकी प्रेरणादायक बातों को शेयर करते हैं और उन्हें अपनी जिंदगी का अहम हिस्सा मानते हैं।
उनकी आखिरी मुख्य फिल्म 'जेम्स' ने बॉक्स ऑफिस पर कई रिकॉर्ड तोड़े थे और दर्शकों ने सिनेमाघरों में पहुंचकर उन्हें अपनी अनोखी श्रद्धांजलि दी थी। लेकिन हाल ही में इस फिल्म की स्क्रीनिंग को लेकर राज्य में एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कर्नाटक के वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया ने एक बड़ा बयान देते हुए आरोप लगाया है कि कुछ शासक दल के नेता सिनेमाघरों पर दबाव बना रहे हैं। उनके मुताबिक, पुनीत राजकुमार की फिल्म 'जेम्स' की जगह 'द कश्मीर फाइल्स' फिल्म दिखाने के लिए थिएटर मालिकों को कहा जा रहा है। इस बयान के सामने आने के बाद राज्य की राजनीति में बहस तेज हो गई है और सिनेमाप्रेमियों के बीच भी इस बात को लेकर काफी नाराजगी देखने को मिल रही है।
सिनेमाघरों में अप्पु की फिल्म और राजनीतिक बयानबाजी
एक तरफ जहां पुनीत राजकुमार के फैंस अपनी भावनाओं को सिनेमा से जोड़कर देखते हैं, वहीं दूसरी तरफ इस तरह की राजनीतिक खींचतान से आम जनता और प्रशंसक काफी आहत हैं। फैंस का साफ कहना है कि पुनीत किसी एक पार्टी या राजनीति से ऊपर उठकर कर्नाटक की आन, बान और शान हैं। उनकी फिल्मों को लेकर इस तरह की राजनीति करना उनके चाहने वालों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने जैसा है। थिएटर मालिकों और वितरकों के सामने भी इस स्थिति के कारण अजीब असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। वे समझ नहीं पा रहे हैं कि एक तरफ जनता की भारी मांग को कैसे पूरा करें और दूसरी तरफ राजनीतिक दबाव से कैसे निपटें।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पुनीत राजकुमार के चाहने वाले लगातार अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं और शांति की अपील कर रहे हैं। फैंस का मानना है कि अप्पु की यादें और उनकी फिल्में किसी भी विवाद का हिस्सा नहीं बननी चाहिए। कलाकारों और फिल्मों को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए क्योंकि वे समाज को जोड़ने का काम करते हैं, तोड़ने का नहीं। कर्नाटक के अलग-अलग हिस्सों में आज भी पुनीत राजकुमार के नाम पर कई सामाजिक कार्य किए जाते हैं, जिन्हें उनके फैंस आगे बढ़ा रहे हैं। नेत्रदान महाअभियान से लेकर गरीबों की मदद करने तक, उनका हर काम आज भी लोगों को प्रेरित कर रहा है।
कला और कलाकारों का सम्मान सर्वोपरि
पुनीत राजकुमार के निधन के बाद से ही कन्नड़ फिल्म उद्योग में एक खालीपन सा आ गया है जिसे भरना नामुमकिन है। उनके जैसे जमीन से जुड़े अभिनेता बहुत कम देखने को मिलते हैं जो अपनी सफलता का श्रेय हमेशा अपने फैंस को देते थे। 'राजकु', 'अ' और 'जेम्स' जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने लोगों के दिलों पर राज किया है। उनके मोटिवेशनल भाषण आज भी युवाओं को कड़ी मेहनत करने और नेकी के रास्ते पर चलने की सीख देते हैं। यही वजह है कि जब भी उनकी फिल्मों या उनकी विरासत से जुड़ी कोई बात सामने आती है, तो पूरा राज्य एकजुट होकर उनके समर्थन में खड़ा हो जाता है।
द फ्रीलान्स की जमीनी पड़ताल बताती है कि आम लोगों के मन में पुनीत राजकुमार के प्रति जो सम्मान है, उसे कोई भी राजनीतिक बयानबाजी कम नहीं कर सकती है। लोग आज भी सिनेमाघरों के बाहर उनकी तस्वीरें लगाते हैं और उनकी फिल्मों की रिलीज के दिन किसी बड़े त्योहार की तरह जश्न मनाते हैं। प्रशासन और राजनेताओं को भी इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि जनता की भावनाओं से जुड़े मुद्दों पर संवेदनशीलता दिखाई जाए। अप्पु का प्यार करोड़ों दिलों में बसता है और वह हमेशा अमर रहेगा।
भविष्य की राह और फैंस का अटूट प्रेम
आने वाले दिनों में भी पुनीत राजकुमार के फैंस उनकी यादों को संजोए रखने के लिए कई बड़े कार्यक्रमों की योजना बना रहे हैं। उनकी पुण्यतिथि और जन्मदिन पर कर्नाटक में रक्तदान शिविर और गरीबों को भोजन बांटने जैसे बड़े सामाजिक आयोजन किए जाते हैं। फिल्म उद्योग और सरकार दोनों को मिलकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कला और संस्कृति के मंच पर किसी भी तरह की अनावश्यक राजनीति न हो। द फ्रीलान्स इस पूरे मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा और हर ताजा अपडेट आप तक सबसे पहले पहुंचाता रहेगा।












