नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश के कई राज्यों में सांप के काटने की घटनाओं को लेकर लोगों की चिंता फिर से बढ़ गई है। गूगल ट्रेंड्स पर पिछले कुछ घंटों में इस विषय पर सर्च में अचानक बड़ा उछाल देखा गया है। खासकर ग्रामीण इलाकों और खेतों में काम करने वाले किसानों के लिए यह मौसम बहुत जोखिम भरा होता है। बारिश के दिनों में जमीन के अंदर पानी भरने के कारण सांप अपने बिलों से बाहर निकल आते हैं। ऐसे में इंसानी बस्तियों के पास उनके आने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
हमारे देश में हर साल सांप के काटने से हजारों लोगों की जान जाती है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि लोग आज भी अस्पताल जाने के बजाय देसी झाड़-फूंक या घरेलू नुस्खों के चक्कर में पड़ जाते हैं। इस देरी के कारण मरीज की हालत और ज्यादा गंभीर हो जाती है। जब तक मरीज को डॉक्टर के पास ले जाया जाता है, तब तक जहर पूरे शरीर में फैल चुका होता है। डॉक्टरों का साफ कहना है कि किसी भी जहरीले सांप के काटने पर सिर्फ एंटी-वेम इंजेक्शन ही एकमात्र पक्का इलाज है।
सांप काटने पर तुरंत क्या करें और क्या नहीं?
अगर किसी व्यक्ति को सांप काट ले तो सबसे पहले घबराएं बिल्कुल नहीं। मरीज को शांत रखना बहुत जरूरी है क्योंकि डरने से दिल की धड़कन तेज होती है। दिल की धड़कन तेज होने पर खून के साथ जहर पूरे शरीर में बहुत तेजी से फैलता है। जिस जगह पर सांप ने काटा है, उस हिस्से को बिल्कुल हिलाएं नहीं। उस जगह पर कसकर कपड़ा न बांधें और न ही ब्लेड से चीरा लगाकर खून निकालने की कोशिश करें। ये सारे पुराने तरीके पूरी तरह गलत और खतरनाक साबित हो सकते हैं।
पीड़ित व्यक्ति को जितनी जल्दी हो सके किसी बड़े सरकारी या अच्छे अस्पताल में लेकर जाएं। जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में सांप के जहर को काटने वाली दवा मुफ्त में मिलती है। अस्पताल के रास्ते में मरीज को सोने न दें और उसे लगातार बात करते रहने के लिए कहें। समय पर अस्पताल पहुंचने से मरीज की जान बचने के चांस सौ प्रतिशत तक बढ़ जाते हैं। तांत्रिक या ओझा के पास जाने में एक मिनट भी बर्बाद करना मौत को दावत देने जैसा है।
खेतों और ग्रामीण इलाकों में कैसे बचें हादसों से?
खेतों में काम करते समय हमेशा पूरे पैरों के जूते और लंबी पतलून पहनकर जाएं। रात के समय अंधेरे में बाहर निकलते समय हमेशा तेज रोशनी वाली टॉर्च का इस्तेमाल करें। अपने घर के आसपास झाड़ियों को ज्यादा दिन तक न उगने दें और कचरा जमा न होने दें। चूहे और मेंढक सांपों का मुख्य भोजन होते हैं, इसलिए घर के आसपास चूहों के बिलों को बंद रखें। अगर घर में कभी सांप दिख जाए तो खुद उसे पकड़ने की कोशिश बिल्कुल न करें। तुरंत किसी पेशेवर सांप पकड़ने वाले यानी स्नेक कैचर को फोन करके मदद मांगें।
स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की तरफ से भी गांवों में लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। लोगों को समझाया जा रहा है कि कच्ची मिट्टी के घरों में सोते समय जमीन पर गद्दा लगाकर सोने से बचें। खाट या चारपाई का इस्तेमाल करना हमेशा ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। सरकार की तरफ से सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर पर्याप्त मात्रा में दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं। अगर हम थोड़ी सी सावधानी बरतें और सही समय पर सही कदम उठाएं, तो इस तरह की अनहोनी से आसानी से बचा जा सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी और आगे की तैयारी
देश के जाने-माने डॉक्टर और चिकित्सा वैज्ञानिक बार-बार यह अपील कर रहे हैं कि अंधविश्वास को पूरी तरह छोड़ें। मानसून के इन महीनों में अस्पतालों की आपातकालीन सेवाओं को पूरी तरह सतर्क रखा गया है। डॉक्टरों की यह टीम हर तरह के मामलों से निपटने के लिए चौबीस घंटे तैयार रहती है। आम जनता को भी यह समझना होगा कि पारंपरिक इलाज के भरोसे रहना अपनी जान जोखिम में डालना है। द फ्रीलान्स की ग्राउंड टीम लगातार ऐसे मामलों पर नजर बनाए हुए है और लोगों से अपील करती है कि सतर्क रहें, सुरक्षित रहें।







