नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय शेयर बाजार में अचानक मचे भूचाल ने निवेशकों की नींद उड़ा दी है। हफ्ते के शुरुआती कारोबार के दौरान ही बाजार में ऐसी तेज बिकवाली देखने को मिली कि सेंसेक्स एक झटके में 1000 से 1200 अंकों तक नीचे लुढ़क गया। इस भारी गिरावट के चलते बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड कंपनियों के शेयरों में चौतरफा बिकवाली का माहौल बन गया। देखते ही देखते निवेशकों की गाढ़ी कमाई के अरबों रुपये पानी में मिल गए। मेटल और हेल्थकेयर जैसे सेक्टरों में सबसे ज्यादा भगदड़ देखने को मिली, जिससे छोटे निवेशकों में भारी डर का माहौल है।
बाजार के जानकारों का कहना है कि इस अचानक आई गिरावट की कई बड़ी वजहें हैं। अमेरिकी बाजारों से मिल रहे कमजोर संकेतों और विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार पैसा निकालने के कारण बाजार का ढांचा पहले से ही कमजोर था। इसके साथ ही, भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई के हालिया सख्त रुख और फैसलों ने आग में घी का काम किया। बैंक और वित्तीय संस्थाओं के शेयरों में बिकवाली इतनी तेज थी कि सूचकांक को संभाल पाना नामुमकिन साबित हुआ। निफ्टी भी गोता लगाते हुए अपने साल के सबसे निचले स्तर के करीब जा पहुंचा।
टाटा ग्रुप के चुनिंदा शेयरों में रही तेजी
इस मचे हाहाकार के बीच भी कुछ ऐसी कंपनियां रहीं जिनके शेयरों ने निवेशकों को थोड़ी राहत दी। टाटा ग्रुप के एक प्रमुख शेयर में करीब 12 प्रतिशत तक की छप्परफाड़ तेजी दर्ज की गई। जब पूरा बाजार लाल निशान पर गोता लगा रहा था, तब कुछ चुनिंदा शेयरों में आई इस तेजी ने बाजार के विश्लेषकों को भी हैरान कर दिया। हालांकि, ये उछाल बेहद सीमित था और पूरे बाजार के मूड को बदलने में नाकामयाब रहा। ज्यादातर निवेशकों को इस बात का गम है कि उनके पोर्टफोलियो के अच्छे-भले शेयर भी इस आंधी में बुरी तरह पिट गए।
बाजार में आई इस तबाही के बाद अब छोटे और खुदरा निवेशकों के मन में बड़ा सवाल यह है कि उनका पैसा कितना सुरक्षित है। जानकारों की मानें तो जब बाजार में इस तरह का पैनिक बिकवाली का दौर आता है, तो निवेशकों को बिना सोचे-समझे अपने शेयर औने-पौने दामों में नहीं बेचने चाहिए। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह समय घबराने का नहीं, बल्कि मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों के शेयरों पर नजर रखने का होता है। हालांकि, तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले कुछ और दिनों तक बाजार में उतार-चढ़ाव का यह दौर बना रह सकता है।
आरबीआई के फैसलों और वैश्विक संकेतों का असर
अर्थव्यवस्था के जानकारों का मानना है कि महंगाई को काबू में रखने के लिए केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों को लेकर लिए जा रहे कड़े फैसले बाजारों पर भारी पड़ रहे हैं। वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने भी विदेशी निवेशकों का भरोसा डिगा दिया है। जब दुनिया भर के बाजारों में सुस्ती छाई हो, तो भारतीय बाजार भी उससे अछूते नहीं रह सकते। यही वजह है कि घरेलू बाजार में आए इस भूचाल ने निवेशकों की चिंताएं कई गुना बढ़ा दी हैं।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि दलाल स्ट्रीट पर सक्रिय ब्रोकरेज हाउस और ट्रेडर्स आने वाले दिनों में और सतर्कता बरत रहे हैं। मार्जिन ट्रेडिंग करने वाले कई छोटे निवेशकों को इस भारी गिरावट के कारण अपने सौदे घाटे में काटने पड़े हैं। बाजार नियामक संस्थाएं और विशेषज्ञ लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और केवल प्रमाणित वित्तीय सलाहकारों की राय सुनकर ही अपने निवेश के फैसले लें।
आगे कैसी रहेगी बाजार की चाल और रणनीति
आने वाले सत्रों में बाजार की दिशा पूरी तरह से वैश्विक आर्थिक आंकड़ों और विदेशी संस्थागत निवेशकों के रुख पर टिकी होगी। अगर वैश्विक बाजार संभलते हैं और घरेलू मोर्चे पर महंगाई के आंकड़े राहत देते हैं, तो बाजार में रिकवरी की उम्मीद बंध सकती है। फिलहाल बाजार में डर का माहौल है और वोलैटिलिटी इंडेक्स उच्च स्तर पर बना हुआ है। ऐसे में निवेशकों को बेहद फूंक-फूंक कर कदम रखने की जरूरत है ताकि किसी भी बड़े नुकसान से बचा जा सके।






