नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय शेयर बाजार के लिए आज का दिन बेहद डरावना साबित हुआ है। बाजार खुलते ही बिकवाली का ऐसा दौर चला कि देखते ही देखते सेंसेक्स 1200 अंकों से ज्यादा टूट गया। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का यह प्रमुख सूचकांक लुढ़ककर 71 हजार के आसपास पहुंच गया है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 370 से अधिक अंक फिसलकर 22,232 के स्तर पर बंद हुआ है। अचानक आई इस तबाही से निवेशकों की गाढ़ी कमाई पलभर में स्वाहा हो गई है। बाजार में मचे इस कोहराम से छोटे निवेशकों के चेहरों पर साफ चिंता देखी जा सकती है।
बाजार में आई इस अचानक भारी गिरावट के पीछे कई बड़े कारण खुलकर सामने आ रहे हैं। शुरुआती और अंदरूनी रिपोर्ट बताती हैं कि वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों ने भारतीय बाजार की चाल बिगाड़ दी है। इसके अलावा भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई के एक अहम फैसले और नीतिगत रुख ने भी बाजार का मूड बिगाड़ दिया। जानकारों का मानना है कि केंद्रीय बैंक के फैसलों से बाजार में नकदी और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। इस वजह से बड़े निवेशकों ने बिना सोचे-समझे बिकवाली शुरू कर दी, जिससे निचले स्तरों पर भी खरीदारी का कोई समर्थन नहीं मिल पाया।
मेटल और हेल्थकेयर शेयरों में भारी बिकवाली
आज के कारोबार के दौरान बाजार के लगभग सभी सेक्टर लाल निशान में बंद हुए हैं। खासकर मेटल और हेल्थकेयर शेयरों में जबरदस्त भगदड़ देखने को मिली। इन दोनों सेक्टर के बड़े शेयरों में ताबड़तोड़ बिकवाली हुई, जिससे सूचकांक को सबसे बड़ा झटका लगा। इसके अलावा बैंकिंग सेक्टर के शेयरों ने भी बाजार को संभालने की कोशिश की लेकिन बिकवाली का दबाव इतना ज्यादा था कि बैंक निफ्टी भी 540 अंक से ज्यादा टूटकर 54,515 के स्तर पर बंद हुआ। कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी जरूर आई थी, लेकिन घरेलू मोर्चे पर फैली अनिश्चितता ने उसका कोई भी फायदा बाजार को मिलने नहीं दिया।
द फ्रीलान्स की टीम ने जब बाजार के कुछ जानकारों और ब्रोकरेज फर्मों से बात की, तो उन्होंने साफ कहा कि यह करेक्शन निवेशकों के लिए एक बड़ा झटका है। उनका कहना है कि जब तक वैश्विक बाजार शांत नहीं होते और आरबीआई की नीतियों पर पूरी तरह स्थिति साफ नहीं होती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। पिछले कुछ हफ्तों से बाजार लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा था, लेकिन अचानक आई इस गिरावट ने साबित कर दिया कि भारतीय बाजार पर वैश्विक और घरेलू दोनों तरह के जोखिमों का साया अभी भी पूरी तरह से मंडरा रहा है।
निवेशकों के पोर्टफोलियो पर असर और आगे की चाल
इस भारी गिरावट का सीधा असर आम निवेशकों के पोर्टफोलियो पर पड़ा है। जिन लोगों ने मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में पैसा लगाया था, उन्हें आज सबसे बड़ा नुकसान झेलना पड़ा है। विशेषज्ञों की सलाह है कि इस तरह के पैनिक माहौल में निवेशकों को घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। अगर आपका पोर्टफोलियो मजबूत और अच्छी कंपनियों के शेयरों से लैस है, तो थोड़ी गिरावट से डरकर अपने शेयर औने-पौने दामों में न बेचें। हालांकि, जानकारों का यह भी कहना है कि फिलहाल नई खरीदारी करने से बचना समझदारी होगी और बाजार में स्थिरता आने का इंतजार करना चाहिए।
हमारे ग्राउंड रिपोर्टर ने दलाल स्ट्रीट के कई ट्रेडर से बात की, तो उनका यही कहना था कि बाजार में यह गिरावट एक तरह का करेक्शन भी है जो बहुत लंबे समय से अपेक्षित था। बाजार जब बहुत तेजी से ऊपर जाता है, तो इस तरह के बड़े झटके बीच-बीच में आते रहते हैं। अब सबकी नजरें आने वाले दिनों में आने वाले आर्थिक आंकड़ों और ग्लोबल संकेतों पर टिकी हुई हैं। देखना यह होगा कि क्या बाजार आने वाले सत्रों में संभल पाता है या बिकवाली का यह दौर निवेशकों को और ज्यादा डराने वाला है।
बाजार की इस आंधी से बचने के लिए क्या करें?
शेयर बाजार के इस मौजूदा हालात ने साफ कर दिया है कि पैसा बनाना जितना आसान दिखता है, जोखिम उठाना उससे कहीं ज्यादा कठिन होता है। बाजार के जानकारों का सुझाव है कि निवेशकों को हमेशा लंबी अवधि की रणनीति के साथ उतरना चाहिए। हर गिरावट में आंख मूंदकर पैसा लगाने के बजाय चुनिंदा और मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों पर ही दांव लगाना सुरक्षित रहता है। द फ्रीलान्स की यह विशेष पड़ताल जारी रहेगी और हम आपको बाजार के हर एक अपडेट से लगातार रूबरू कराते रहेंगे ताकि आपकी गाढ़ी कमाई सुरक्षित रह सके।





