हैदराबाद/ग्राउंड ब्यूरो — तेलंगाना के किसानों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य में इस सीजन की धान यानी वरी की सरकारी खरीद की प्रक्रिया आगामी एक अक्टूबर से आधिकारिक रूप से शुरू हो जाएगी। राज्य सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए कमर कस ली है कि किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए मंडियों में किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सभी खरीद केंद्रों पर नमी मापने वाले यंत्र, तौल कांटे और बारदाना समय से पहले ही पहुंचाए जा रहे हैं ताकि खरीद का काम बिना किसी रुकावट के सुचारू रूप से चल सके।
पिछले कुछ हफ्तों से राज्य के अलग-अलग जिलों में किसान इस बात को लेकर चिंतित थे कि उनकी फसल की खरीद कब और कैसे होगी। मौसम के बदलते मिजाज और समय पर खरीद केंद्र न खुलने से किसानों की चिंताएं लगातार बढ़ रही थीं। लेकिन अब सरकार के इस स्पष्ट ऐलान के बाद किसानों ने राहत की सांस ली है। अधिकारियों ने यह भी निर्देश दिए हैं कि बिचौलियों की मनमानी को रोकने के लिए हर केंद्र पर कड़ी नजर रखी जाए ताकि किसानों को उनकी मेहनत का पूरा और सही दाम मिल सके। न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी पर ही सीधे किसानों के बैंक खातों में पैसे भेजे जाएंगे।
करीमनगर में हाइब्रिड धान और अनुबंध खेती का बढ़ता दायरा
एक तरफ जहां सरकारी खरीद की तारीख तय हो चुकी है, वहीं दूसरी तरफ खेती के तरीकों में भी बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। तेलंगाना के करीमनगर जिले में इन दिनों हाइब्रिड धान की खेती को लेकर किसानों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। यहां के किसान अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर अनुबंध खेती यानी कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग की ओर रुख कर रहे हैं। बड़ी कंपनियां और बीज उत्पादक संगठन सीधे किसानों के साथ अनुबंध कर रहे हैं ताकि उन्हें बेहतर किस्म के हाइब्रिड बीज और तकनीकी सहायता मिल सके। इससे न केवल धान की पैदावार बढ़ रही है बल्कि किसानों की आमदनी में भी साफ इजाफा हो रहा है।
अनुबंध खेती के इस मॉडल में किसानों को बुवाई से लेकर कटाई तक हर चरण पर विशेषज्ञों की सलाह मिलती है। कौन सी खाद डालनी है और कीटनाशकों का इस्तेमाल कब करना है, इसकी पूरी जानकारी कंपनियों के नुमाइंदे किसानों को देते हैं। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि धान की फसल में कीट और बीमारियों से लड़ने की क्षमता विकसित करने के लिए इस तरह की आधुनिक तकनीक बेहद जरूरी है। अंतरराष्ट्रीय शोध रिपोर्ट्स भी इस बात की पुष्टि करती हैं कि यदि सही किस्म के हाइब्रिड बीजों का चुनाव किया जाए तो जलवायु परिवर्तन के बीच भी फसल को बचाया जा सकता है।
बीमारी और कीट प्रतिरोधक क्षमता पर वैज्ञानिकों का जोर
धान की खेती के सामने आज के समय में सबसे बड़ी चुनौती कीटों और फफूंद जनित बीमारियों का हमला है। हाल ही में कृषि विज्ञान से जुड़ी कई प्रमुख शोध पत्रिकाओं में यह बात सामने आई है कि पारंपरिक धान की फसलें मौसम में जरा सा भी बदलाव होने पर बीमारियों की चपेट में आ जाती हैं। इससे निपटने के लिए अब प्रयोगशालाओं में ऐसी किस्में तैयार की जा रही हैं जो प्राकृतिक रूप से बीमारियों और कीटों का डटकर मुकाबला कर सकें। करीमनगर और आसपास के इलाकों में किसान अब इन्हीं उन्नत किस्मों के बीजों को अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं ताकि उनकी पूरी मेहनत बर्बाद न हो।
जमीनी स्तर पर काम करने वाले हमारे संवाददाताओं ने पाया कि किसान अब केवल पारंपरिक धान पर ही निर्भर नहीं रहना चाहते। वे बाजार की मांग और कंपनियों की जरूरतों के हिसाब से फसल उगा रहे हैं। एक तरफ जहां सरकार धान खरीद के जरिए किसानों को वित्तीय सुरक्षा दे रही है, वहीं दूसरी तरफ वैज्ञानिक अनुसंधान किसानों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ये नए प्रयोग तेलंगाना के कृषि बाजार को किस दिशा में लेकर जाते हैं और किसानों के जीवन में कितना आर्थिक बदलाव ला पाते हैं।








