कीव और वाशिंगटन से मिल रही ताजा अंतरराष्ट्रीय खबरों के अनुसार, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े बयानों के बाद अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। पश्चिमी देशों से लगातार मिल रहे दबाव और युद्ध की थकान के बीच अब जेलेंस्की ने देश में साठ दिनों के भीतर नए राष्ट्रपति चुनाव कराने की बात कही है। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने अपनी तरफ से एक कड़ी शर्त भी रख दी है जिससे अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल तेज हो गई है। जेलेंस्की का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब अमेरिका और रूस के बीच शांति वार्ताओं को लेकर गुप्त और खुले स्तर पर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूक्रेनी राष्ट्रपति ने साफ किया है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा की ठोस गारंटी मिलती है और देश में युद्ध की स्थिति थोड़ी सामान्य होती है, तो वे चुनाव कराने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। हालांकि, जानकारों का मानना है कि युद्ध के माहौल में साठ दिनों के भीतर चुनाव करवाना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। देश का एक बड़ा हिस्सा अभी भी रूसी नियंत्रण में है और लाखों नागरिक देश छोड़कर विदेशों में शरण लिए हुए हैं। ऐसे में मतदाता सूची तैयार करना और सुरक्षित मतदान कराना जेलेंस्की सरकार के लिए एक बेहद कठिन काम साबित होगा।
रूस की रिफाइनरियों पर हमले रोकने की बड़ी शर्त
इस बीच, जेलेंस्की ने रूस के साथ संभावित संघर्ष विराम को लेकर एक और बड़ा दांव चला है। यूक्रेन की तरफ से यह संकेत दिए गए हैं कि यदि रूसी सेना यूक्रेन के ऊर्जा संयंत्रों और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमले बंद करती है, तो यूक्रेनी सेना भी रूस की तेल रिफाइनरियों पर हमले रोकने पर विचार कर सकती है। पिछले कुछ महीनों में यूक्रेनी ड्रोनों ने रूसी तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाकर रूस की अर्थव्यवस्था को तगड़ा झटका दिया है। जेलेंस्की अब इसी ताकत को मोलभाव के एक बड़े हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि रूस को युद्ध रोकने के लिए मजबूर किया जा सके।
दूसरी ओर, अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार यह दावा कर रहे हैं कि वे सत्ता संभालते ही इस भीषण युद्ध को बहुत कम समय में खत्म करवा देंगे। ट्रंप की इस आक्रामक कूटनीति और संभावित सैन्य सहायता में कटौती की धमकी के बाद ही कीव प्रशासन पर शांति समझौते की मेज पर आने का दबाव काफी बढ़ गया है। यूरोपीय देशों के नेता भी अब अमेरिका के इस रुख को भांपते हुए अपने अगले कदम तय कर रहे हैं। यूक्रेन की जनता इस लंबी और खूनी जंग से अब पूरी तरह थक चुकी है और हर कोई जल्द से जल्द शांति की बहाली चाहता है।
पुतिन का नया काउंटर ऑफर और ग्रीनलैंड विवाद
युद्ध के इन मोर्चों के अलावा, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के पटल पर एक और दिलचस्प नया विवाद जुड़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के ग्रीनलैंड को लेकर दिए गए बयानों और वहां तेल-गैस की बड़ी खोज के दावों ने भी यूरोपीय देशों का ध्यान खींचा है। इस बीच, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की तरफ से आए एक नए काउंटर ऑफर ने जेलेंस्की और पश्चिमी देशों को सकते में डाल दिया है। पुतिन की इस मसखरी भरे और कड़े काउंटर ऑफर को सुनकर पश्चिमी रणनीतिकार भी हैरान हैं कि आखिर रूस की असली मंशा क्या है।
जमीनी हकीकत यह है कि मोर्चे पर तैनात सैनिक कड़ाके की ठंड और लगातार हो रही बमबारी के बीच अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। कूटनीतिक बैठकों और बयानों के इस दौर के बीच आम यूक्रेनी नागरिकों का जीवन पूरी तरह तबाह हो चुका है। विश्लेषकों का मानना है कि भले ही जेलेंस्की ने साठ दिनों में चुनाव और सीजफायर की शर्तें रख दी हों, लेकिन जमीन पर शांति इतनी आसानी से आने वाली नहीं है। रूस और यूक्रेन दोनों पक्ष अभी भी अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े हुए हैं और अमेरिकी दखल के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में यह जंग किस नई दिशा की ओर बढ़ती है।



