लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति के गलियारों में इस वक्त एक नया भूचाल आया हुआ है। 'द फ्रीलान्स' की ऑन-द-ग्राउंड तहकीकात और ग्राउंड जीरो से मिल रही जानकारियों के मुताबिक, आगामी राज्यसभा चुनावों के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने 8 उम्मीदवारों की सूची जारी कर बड़े-बड़े सियासी दिग्गजों और जानकारों के होश उड़ा दिए हैं। इस बार की सूची में पार्टी ने तमाम कयासों को पूरी तरह झुठलाते हुए ऐसे चौंकाने वाले फैसले लिए हैं, जिसने दिल्ली से लेकर लखनऊ तक राजनीतिक हलचल तेज कर दी है।
केंद्रीय मंत्रियों का पत्ता साफ: हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा बाहर
इस पूरी सूची का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि मोदी सरकार के कद्दावर मंत्री और मौजूदा राज्यसभा सांसद हरदीप सिंह पुरी को इस बार सूची में जगह नहीं मिली है। उनके अलावा बीएल वर्मा का टिकट भी काट दिया गया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा थी कि हाई-प्रोफाइल चेहरों को एक बार फिर से उच्च सदन भेजा जाएगा, लेकिन पार्टी आलाकमान ने संगठन और जमीन की नब्ज टटोलते हुए बिल्कुल उलट फैसला किया है। इस कदम ने साफ कर दिया है कि भाजपा अब पूरी तरह से आगामी विधानसभा और चुनावी गणित को ध्यान में रखते हुए अपने मोहरे सजा रही है।
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जातिगत तिकड़म: 3 ब्राह्मण, 3 ओबीसी और 2 एससी चेहरों पर दांव
पार्टी द्वारा उतारे गए 8 उम्मीदवारों के नामों के विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि भाजपा ने पूरी तरह से 'सोशल इंजीनियरिंग' पर फोकस किया है। ग्राउंड रिपोर्ट बताती है कि पार्टी ने अपनी सूची में संतुलन साधने के लिए:
- 3 ब्राह्मण चेहरों को मैदान में उतारा है, जिससे सवर्ण मतदाताओं में कड़ा संदेश जाए।
- 3 ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) उम्मीदवारों को टिकट देकर पिछड़ों के बीच अपनी पकड़ को और मजबूत किया है।
- 2 एससी (अनुसूचित जाति) वर्ग के उम्मीदवारों को मौका दिया गया है, जिसमें बाराबंकी की पूर्व सांसद प्रियंका रावत का नाम भी शामिल है।
यह रणनीति साफ दर्शाती है कि पार्टी किसी एक वर्ग पर निर्भर रहने के बजाय बहु-जातीय गठबंधन को और अधिक मजबूत करने की जुगत में है।
धर्मपाल सिंह को बड़ा मौका और संगठन की पकड़
इस फेरबदल के बीच एक और नाम जिसने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा है, वह है धर्मपाल सिंह का। पार्टी ने उन्हें इस महत्वपूर्ण रेース में शामिल कर यह संकेत दे दिया है कि संगठन के प्रति निष्ठा और जमीनी कार्यशैली को ही सबसे बड़ा पैमाना माना जाएगा। धुरंधर नेताओं के टिकट कटने के बावजूद धर्मपाल सिंह जैसे जमीन से जुड़े चेहरों को मौका मिलना इस बात की तस्दीक करता है कि पार्टी हाईकमान अब पूरी तरह से जमीनी कार्यकर्ताओं और सांगठनिक संतुलन को प्राथमिकता दे रहा है।
भविष्य का राजनीतिक असर और विपक्ष की प्रतिक्रिया
सत्तारूढ़ दल के इस दांव से समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों की रणनीतियों पर भी असर पड़ना तय है। जहाँ एक तरफ विपक्ष जातिगत जनगणना और प्रतिनिधित्व के मुद्दों पर भाजपा को घेरने की कोशिश कर रहा है, वहीं भाजपा ने अपने इन 8 उम्मीदवारों के जरिए तमाम जातियों को साधकर विपक्ष के मुख्य चुनावी मुद्दों की काट पहले ही तैयार कर ली है।
आगामी 12 सीटों पर होने वाले चुनावों और 16 अक्टूबर को निर्धारित वोटिंग प्रक्रिया से पहले भाजपा की यह सूचियां इस बात का सुबूत हैं कि राजनीति के इस खेल में कब, कौन सा पत्ता फेंका जाए, इसका अंदाजा लगाना बड़े-बड़े सियासी पंडितों के लिए भी नामुमकिन साबित हो रहा है। 'द फ्रीलान्स' इस पूरी राजनीतिक हलचल पर लगातार अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा।







