उत्तराखंड की सियासत में भूचाल, मंत्री और पति के बीच आमने-सामने की जंग
पहाड़ की वादियों से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इन दिनों एक हाई-प्रोफाइल पारिवारिक और राजनीतिक विवाद चर्चा के केंद्र में है। उत्तराखंड सरकार की महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या और उनके पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी के बीच उपजा गतिरोध अब कानूनी लड़ाई के साथ-साथ सार्वजनिक बयानों के दौर में बदल चुका है। एक तरफ जहां पति ने वीडियो जारी कर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप मढ़े हैं, वहीं दूसरी तरफ अस्पताल के बेड से मंत्री ने पलटवार करते हुए इन सभी दावों को बेबुनियाद करार दिया है।
यह पूरा घटनाक्रम तब शुरू हुआ जब दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे के खिलाफ कानूनी कदम उठाए गए। मंत्री रेखा आर्या की ओर से अपने पति के खिलाफ धोखाधड़ी, उत्पीड़न और धमकियां देने जैसी गंभीर शिकायतें दर्ज कराई गईं। इसके जवाब में उनके पति ने सोशल मीडिया पर आकर महिला एवं बाल विकास विभाग के पिछले दस वर्षों के कामकाज पर सवाल खड़े कर दिए। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम ने न सिर्फ प्रशासनिक हलकों में बल्कि आम जनता के बीच भी गहरी सुगबुगाहट पैदा कर दी है।
स्थिति की नजाकत को भांपते हुए प्रशासनिक स्तर पर भी तुरंत सुगबुगाहट तेज हुई। पुलिस विभाग ने मामले की निष्पक्ष और गहराई से पड़ताल करने के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। इस पूरे प्रकरण में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं, जिससे सियासी तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है।
अस्पताल के बेड से मंत्री रेखा आर्या का पलटवार, खाई गोलू देवता की कसम
अस्पताल में उपचाराधीन कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने मीडिया और जनता के सामने स्पष्ट किया कि उनके खिलाफ रची जा रही साजिशों से वे डरने वाली नहीं हैं। उन्होंने पति द्वारा लगाए गए 210 करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। मंत्री का कहना है कि उनके ऊपर अपनी कानूनी शिकायत और तहरीर वापस लेने के लिए भारी दबाव बनाया जा रहा है, लेकिन वह किसी भी कीमत पर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
विवादों के केंद्र में आए उस ऑडियो को लेकर भी मंत्री ने अपनी स्थिति साफ की, जिसे उनके पति ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की मदद से तैयार किया गया फर्जी ऑडियो बताया था। इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए रेखा आर्या ने अपने इष्ट देव गोलू बाबा की कसम खाई और जोर देकर कहा कि वह ऑडियो पूरी तरह असली है और उसमें किसी भी तरह की तकनीकी मिलावट नहीं की गई है।
"हम अपने इष्ट देव गोलू बाबा की कसम खाकर कहते हैं कि हमारे द्वारा लाया गया सच और ऑडियो पूरी तरह से सत्य है। इसे किसी भी एआई तकनीक से नहीं बनाया गया है और न ही इसमें कोई फरेब है। हम हर तरह की निष्पक्ष जांच का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।"— रेखा आर्या, कैबिनेट मंत्री, उत्तराखंड सरकार
पति गिरधारी लाल साहू के गंभीर आरोप और मुख्यमंत्री से उच्चस्तरीय जांच की मांग
दूसरी ओर, मंत्री के पति गिरधारी लाल साहू ने अपने वीडियो संदेशों के जरिए राज्य सरकार और शासन व्यवस्था पर सनसनीखेज सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि मंत्री ने अपने विभाग में पिछले एक दशक के दौरान पद का दुरुपयोग करते हुए अकूत संपत्ति जुटाई है। उन्होंने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से इस पूरे मामले की गहन विजिलेंस जांच कराने की मांग की है।
पति का यह भी आरोप है कि उनके पास इस कथित भ्रष्टाचार से जुड़े कई अहम दस्तावेज और सबूत मौजूद हैं, जिन्हें वे आने वाले दिनों में सार्वजनिक करेंगे। इस तीखे पारिवारिक और राजनीतिक संघर्ष के कारण राज्य के राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है। विपक्षी दलों ने भी इस हाई-प्रोफाइल मामले को लेकर सरकार पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं, जिससे यह मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है।
इस बीच, गिरधारी लाल साहू की पृष्ठभूमि को लेकर भी कई तरह की खबरें सामने आ रही हैं, जिससे यह मामला और भी ज्यादा उलझ गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अतीत में भी कुछ अन्य मामलों में उनका नाम सुर्खियों में रहा है, हालांकि इस मौजूदा पारिवारिक विवाद से जुड़े कानूनी पहलुओं की जांच अभी शुरुआती चरण में ही है।
एसपी देहात के नेतृत्व में 10 सदस्यीय एसआईटी टीम कर रही है मामले की पड़ताल
मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तराखंड पुलिस प्रशासन ने तुरंत एक्शन लिया है। मंत्री द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों और दोनों पक्षों के बयानों की सत्यता की थाह लेने के लिए एक उच्चस्तरीय जांच टीम का गठन किया गया है। एसपी देहात जया बलूनी की अध्यक्षता में बनाई गई इस 10 सदस्यीय विशेष जांच टीम में अनुभवी पुलिस अधिकारियों को शामिल किया गया है, जो इस पूरे प्रकरण के हर एक पहलू को खंगाल रही है।
जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि पारिवारिक विवाद की असल जड़ें कहां तक फैली हैं और क्या वाकई में लगाए गए वित्तीय आरोप सही हैं या इसके पीछे कोई गहरी राजनीतिक और व्यक्तिगत साजिश काम कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सभी साक्ष्यों, ऑडियो क्लिप्स और दस्तावेजों का फॉरेंसिक विश्लेषण कराया जा रहा है, जिसके बाद ही कोई ठोस निष्कर्ष निकाला जा सकेगा।
फिलहाल इस हाई-प्रोफाइल मामले में पुलिस की ओर से किसी की गिरफ्तारी नहीं की गई है, लेकिन जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े कई और चौंकाने वाले खुलासे होने की पूरी संभावना जताई जा रही है, जिस पर प्रदेशभर की निगाहें टिकी हुई हैं।












