मुंबई/ग्राउंड ब्यूरो — हिंदी सिनेमा की मशहूर अभिनेत्री विद्या बालन इन दिनों सोशल मीडिया और इंटरनेट पर जबरदस्त चर्चा में हैं। दक्षिण भारत में अचानक उन्हें लेकर इंटरनेट सर्च में बड़ा उछाल देखा गया है। फिल्म प्रेमी उनके पुराने इंटरव्यू, करियर के शुरुआती दिनों के संघर्ष और आने वाली फिल्मों के बारे में जानना चाहते हैं। विद्या बालन हमेशा से अपनी बेबाक राय और मजबूत किरदारों के लिए पहचानी जाती हैं। उन्होंने हाल ही में फिल्म उद्योग के तौर-तरीकों और महिला कलाकारों की भूमिका पर अपनी बात रखी है। उनकी यह बातें अब तेजी से वायरल हो रही हैं।
विद्या बालन ने अपने करियर में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। एक समय था जब उन्हें दक्षिण भारतीय फिल्मों से बार-बार बाहर कर दिया गया था। उन्हें मनहूस तक कह दिया गया था। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपनी मेहनत से अपनी अलग पहचान बनाई। हाल के दिनों में दर्शकों का ध्यान एक बार फिर उनके इसी संघर्ष पर गया है। लोग यह जानना चाहते हैं कि कैसे एक अभिनेत्री ने बिना किसी बड़े सहारे के खुद को शीर्ष पर स्थापित किया। उनकी फिल्मों की पसंद हमेशा से लीक से हटकर रही है।
शुरुआती दिनों में झेली थीं कई बड़ी असफलताएं
विद्या बालन ने अपने सफर की शुरुआत टीवी धारावाहिक 'हम पांच' से की थी। उसके बाद उन्होंने फिल्मों की तरफ रुख किया। मलयालम और तमिल सिनेमा में उन्हें शुरुआत में कई प्रोजेक्ट्स से बिना बताए निकाल दिया गया था। लगातार कई फिल्मों के बंद होने पर लोगों ने उन पर सवाल उठाए थे। विद्या ने खुद कई बार बताया है कि उस दौर ने उन्हें मानसिक रूप से काफी तोड़ा था। लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय अपने अभिनय को तराशने पर जोर दिया। इसके बाद साल 2005 में फिल्म 'परिणीता' से उन्होंने हिंदी सिनेमा में कदम रखा। इस फिल्म ने उनके काम को पूरे देश में पहचान दिलाई।
परिणीता के बाद विद्या ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने 'लगे रहो मुन्ना भाई', 'भूल भुलैया', 'पा', 'इश्किया', 'द डर्टी पिक्चर' और 'कहानी' जैसी यादगार फिल्में दीं। इन फिल्मों ने हिंदी सिनेमा में महिला केंद्रित फिल्मों की परिभाषा ही बदल दी। उन्होंने साबित किया कि किसी फिल्म को चलाने के लिए केवल बड़े पुरुष स्टार की जरूरत नहीं होती। कहानी और दमदार अभिनय के दम पर भी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड बना सकती हैं। दक्षिण के दर्शक भी उनके इस सफर की खूब तारीफ कर रहे हैं।
दक्षिण भारतीय सिनेमा और एनटीआर बायोपिक की यादें
दक्षिण भारत में विद्या बालन के प्रति दर्शकों का खास लगाव रहा है। उन्होंने तेलुगु सिनेमा के दिग्गज नेता और अभिनेता एनटीआर की बायोपिक में उनकी पत्नी बासवताराकम का किरदार निभाया था। इस फिल्म में उनके संजीदा अभिनय की तेलुगु दर्शकों ने दिल खोलकर सराहना की थी। विद्या ने दक्षिण की फिल्मों को लेकर हमेशा सम्मान जताया है। उनका मानना है कि वहां की कहानियों में जमीन से जुड़ाव होता है। हालिया चर्चाओं में भी प्रशंसक उनके तेलुगु और तमिल सिनेमा में काम करने के अनुभवों को साझा कर रहे हैं।
विद्या बालन ने हमेशा अपनी जड़ों को याद रखा है। वह तमिल परिवार से आती हैं और उन्हें दक्षिण भारतीय संस्कृति की गहरी समझ है। जब भी वह दक्षिण के कलाकारों या फिल्मों पर बात करती हैं, तो दर्शकों को उनका अपनापन महसूस होता है। यही कारण है कि आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के लोग भी उन्हें बेहद पसंद करते हैं। कई युवा अभिनेत्रियां उन्हें अपनी प्रेरणा मानती हैं। उनके साधारण रहन-सहन और साड़ियों के प्रति प्रेम की भी हमेशा चर्चा होती है।
बॉडी शेमिंग और बाहरी दबाव पर दिया करारा जवाब
फिल्म उद्योग में अभिनेत्रियों के वजन और लुक्स को लेकर अक्सर तरह-तरह की बातें बनाई जाती हैं। विद्या बालन ने इस दकियानूसी सोच का हमेशा डटकर मुकाबला किया है। उन्होंने कई मौकों पर कहा है कि अभिनय का ताल्लुक शरीर के आकार से नहीं बल्कि प्रतिभा से होता है। एक समय वह भी खुद को लेकर परेशान रहती थीं। लेकिन समय के साथ उन्होंने खुद को पूरी तरह स्वीकारा। उनके इस आत्मविश्वास ने लाखों महिलाओं को प्रेरित किया है।
आज विद्या जिस मुकाम पर हैं, वहां वह अपनी शर्तों पर काम करती हैं। वह किसी चलन या ट्रेंड के पीछे नहीं भागतीं। वह वही किरदार चुनती हैं जो उनके दिल को छूते हैं। हाल ही में हॉरर-कॉमेडी फ्रैंचाइजी में उनकी वापसी की भी खूब चर्चा रही है। उनके मंजुलिका वाले किरदार को आज भी दर्शक सिनेमा के सबसे बेहतरीन किरदारों में गिनते हैं। दर्शक अब उनकी अगली फिल्मों और नए किरदारों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।











