नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश भर में इन दिनों नवरात्रि का पवित्र त्योहार बहुत धूमधाम से मनाया जा रहा है। पर्व के दूसरे दिन मां दुर्गा के दूसरे रूप यानी मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का विशेष विधान होता है। मीडिया रिपोर्ट्स और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से भक्तों के जीवन के सभी संकट दूर हो जाते हैं। मां ब्रह्मचारिणी का यह स्वरूप ज्ञान, तपस्या और वैराग्य का प्रतीक माना जाता है।
धार्मिक कथाओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी ने देवर्षि नारद के कहने पर भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए अत्यंत कठिन तपस्या की थी। इस कठिन साधना के कारण ही उनका नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा था, जिसका अर्थ है ब्रह्म का आचरण करने वाली। उन्होंने हजारों वर्षों तक केवल फल और फूलों पर रहकर तप किया और बाद में कठोर पत्तों को भी त्याग दिया, जिससे उनका नाम अपर्णा भी पड़ गया।
मां ब्रह्मचारिणी के स्वरूप और पूजा की विधि
मां ब्रह्मचारिणी के दाहिने हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमंडल सुशोभित रहता है। उनका यह शांत और तेजवान स्वरूप भक्तों को सदा आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। नवरात्रि के दूसरे दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ वस्त्र पहनें। इसके बाद माता की प्रतिमा या तस्वीर को चौकी पर स्थापित करें और उन्हें रोली, अक्षत, पीले या सफेद फूल अर्पित करें।
पूजा के दौरान माता को पंचामृत का भोग लगाया जाता है और उनके मंत्रों का जाप किया जाता है। कई भक्त इस दिन पूरा दिन व्रत रखते हैं और शाम को आरती के बाद फलाहार करते हैं। जानकारों का कहना है कि सच्चे मन से की गई पूजा से घर में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
व्रत कथा पढ़ने और सुनने का धार्मिक महत्व
नवरात्रि के दूसरे दिन व्रत कथा का पाठ करना बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि जो भी भक्त सच्ची श्रद्धा के साथ मां ब्रह्मचारिणी की कथा सुनता है, उसके जीवन में धैर्य और संयम की शक्ति बढ़ती है। कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी वह व्यक्ति विचलित नहीं होता और सफलता हासिल करता है।
मंदिरों और घरों में सुबह से ही माता के जयकारे गूंजने लगते हैं। बाजारों में भी पूजा सामग्री खरीदने के लिए लोगों की भीड़ देखने को मिल रही है। सुरक्षा और शांति बनाए रखने के लिए स्थानीय प्रशासन और मंदिर समितियों द्वारा विशेष इंतजाम किए गए हैं ताकि श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के दर्शन कर सकें।
माता को लगाएं ये खास भोग और करें इन मंत्रों का जाप
मां ब्रह्मचारिणी को शक्कर, मिश्री और पंचामृत का भोग बहुत प्रिय है। पूजा के अंत में आरती करने के बाद प्रसाद को परिवार के सभी सदस्यों में बांटा जाता है। इस दिन 'ॐ देवी ब्रह्मचारिणी्यै नमः' मंत्र का जाप करना सबसे उत्तम फलदायी माना जाता है।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल के अनुसार, इस बार मंदिरों में भक्तों की भारी संख्या उमड़ रही है। लोग अपनी और अपने परिवार की खुशहाली के लिए मां के चरणों में प्रार्थना कर रहे हैं। अनुशासन और उल्लास के साथ यह पावन पर्व पूरे देश में श्रद्धा का माहौल बना रहा है।








