नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — आज के डिजिटल दौर में जब हर चीज एक क्लिक पर मिलती है, तब इंटरनेट पर पुरानी मान्यताओं और ज्योतिष का क्रेज थमता नहीं दिख रहा है। गूगल ट्रेंड्स पर इन दिनों 'रासी पलम' यानी दैनिक और मासिक राशिफल से जुड़े शब्द बहुत तेजी से सर्च किए जा रहे हैं। दक्षिण भारतीय राज्यों में लोग मेष से लेकर मीन राशि तक के हाल जानने के लिए लगातार ऑनलाइन माध्यमों का रुख कर रहे हैं। इस ट्रेंड से साफ है कि तकनीकी बदलाव के बावजूद लोग अपने दिन की शुरुआत सितारों की चाल और भविष्यफल से जुड़ी जानकारियों के साथ करना पसंद करते हैं।
इस पूरे मामले की जमीनी पड़ताल करने पर यह सामने आया कि लोग सिर्फ रोजाना का राशिफल ही नहीं बल्कि ग्रहों के गोचर, मासिक भविष्यफल और शुभ दिनों की तारीखें भी बड़े पैमाने पर खोज रहे हैं। कई डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म और ज्योतिषीय वेबसाइट्स पर इस दौरान पाठकों की संख्या में भारी उछाल दर्ज किया गया है। लोग सोशल मीडिया और न्यूज ऐप्स के जरिए अपने भाग्य, करियर, सेहत और पारिवारिक जीवन से जुड़े शुभ-अशुभ संकेतों के बारे में जानना चाहते हैं। हालांकि, जानकारों का यह भी कहना है कि इंटरनेट पर उपलब्ध हर जानकारी और दावे की कोई वैज्ञानिक पुष्टि नहीं होती है, इसलिए पाठकों को सावधानी बरतनी चाहिए।
रोजाना के राशिफल और भविष्यवाणियों पर क्यों बढ़ता है लोगों का भरोसा
आम जनता के बीच यह उत्सुकता हमेशा से रही है कि आने वाला दिन उनके लिए कैसा रहेगा। नौकरी में तरक्की होगी या व्यापार में मुनाफा, यह जानने की चाहत हर वर्ग के व्यक्ति में दिखाई देती है। जब सुबह उठकर लोग सबसे पहले अपने फोन पर राशि से जुड़ा हाल देखते हैं, तो उन्हें एक प्रकार का मानसिक संबल मिलता है। कई लोग इसे केवल मनोरंजन और सकारात्मकता का जरिया मानते हैं, तो कुछ इसे अपने दिन की योजना बनाने का एक अहम हिस्सा बनाते हैं। यही वजह है कि जब भी कोई नया महीना शुरू होता है या विशेष ग्रह गोचर होता है, तो सर्च इंजन पर ऐसे विषयों की बाढ़ आ जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक जीवन की तनावपूर्ण दिनचर्या भी लोगों को इन माध्यमों की ओर खींचती है। जब नौकरी या कारोबार में अनिश्चितता का माहौल होता है, तब लोग किसी अदृश्य शक्ति या ज्योतिषीय संकेतों में उम्मीद की किरण तलाशते हैं। हालांकि, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भ्रामक और अति-सकारात्मक भविष्यवाणियों की भरमार भी रहती है, जिससे कई बार लोग भ्रमित भी हो जाते हैं। हाल के दिनों में कई ऑनलाइन स्टडीज और रिपोर्ट्स पर भी सवाल उठे हैं, जिन्हें बाद में वापस लेना पड़ा, जो यह सिखाता है कि डिजिटल सामग्री को आंख मूंदकर सच नहीं मानना चाहिए।
सोशल मीडिया और वीडियो प्लेटफॉर्म्स पर ज्योतिष का बढ़ता दायरा
आजकल केवल लिखित लेख ही नहीं, बल्कि वीडियो और शॉर्ट्स के जरिए भी राशिफल का यह कारोबार तेजी से फैल रहा है। विभिन्न ज्योतिष आचार्य और विशेषज्ञ यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लाइव आकर राशियों का हाल बताते हैं। इन वीडियो पर लाखों व्यूज आते हैं, जो यह साबित करते हैं कि डिजिटल पीढ़ी भी इन विषयों में गहरी रुचि रखती है। लोग अपने सवालों के जवाब कमेंट बॉक्स में पूछते हैं और तुरंत जवाब की उम्मीद करते हैं। यह इंटरनेट पर एक नया डिजिटल बाजार तैयार कर चुका है, जहां आस्था और तकनीक का मेल साफ देखा जा सकता है।
जमीनी स्तर पर काम करने वाले संवाददाताओं ने पाया कि इस बढ़ते ट्रेंड के पीछे एल्गोरिदम का भी बड़ा हाथ है। जब कोई यूजर एक बार किसी ज्योतिषीय वीडियो को देखता है, तो सर्च इंजन उसे बार-बार वैसे ही सुझाव देने लगता है। इससे एक वर्चुअल चक्र बन जाता है, जिसमें यूजर लगातार उसी तरह की खबरों और भविष्यवाणियों के बीच घिरा रहता है। विश्लेषकों का यह भी कहना है कि डिजिटल माध्यमों पर मिलने वाली इन जानकारियों को केवल एक गाइडलाइन की तरह देखना चाहिए, न कि किसी अंतिम सत्य के रूप में।
राशिफल देखने और ऑनलाइन सामग्री पढ़ने से पहले किन बातों का रखें ध्यान
इंटरनेट पर किसी भी प्रकार के राशिफल या ज्योतिषीय उपाय को अपनाने से पहले यह जरूरी है कि आप अपनी बुद्धि और विवेक का इस्तेमाल करें। कई बार लोग इंटरनेट पर दिए गए नुस्खों या भविष्यवाणियों को लेकर बड़े वित्तीय या व्यक्तिगत फैसले ले लेते हैं, जो बाद में नुकसानदायक साबित हो सकते हैं। पत्रकारों और तकनीकी विशेषज्ञों की सलाह यही कहती है कि डिजिटल दुनिया में मौजूद हर सूचना को परखने के बाद ही उस पर विश्वास करें।
द फ्रीलान्स की इस ग्राउंड पड़ताल का निष्कर्ष यह है कि 'रासी पलम' जैसे विषय केवल एक सांस्कृतिक और पारंपरिक आदत का हिस्सा हैं, जो अब डिजिटल रंग में रंग चुकी है। जब तक पाठक इसे सकारात्मक मनोरंजन और सतर्कता के साथ देखते हैं, तब तक यह महज एक सूचना है। लेकिन जब यह अंधविश्वास का रूप लेने लगे, तो यह चिंता का विषय बन जाता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि तकनीक और परंपरा का यह संगम समाज को किस दिशा में लेकर जाता है।



