होम/खेल विशेष/जगतार सिंह जोहल को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत, 8 साल बाद 7 मामलों में मिली जमानत
खेल विशेषपढ़ने में समय: 4 मिनट

जगतार सिंह जोहल को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत, 8 साल बाद 7 मामलों में मिली जमानत

दिल्ली हाईकोर्ट ने यूके के नागरिक जगतार सिंह जोहल को नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी यानी एनआईए से जुड़े सात मामलों में जमानत दे दी है। अदालत ने माना कि जोहल पिछले आठ साल से जेल में बंद हैं और मुकदमे के जल्द खत्म होने की कोई उम्मीद नहीं है।
The Freelance ब्यूरो
TheFreelance ब्यूरो
18 सितंबर 2026 • अपडेटेड
🌐Read in English →
शेयर करें:
जगतार सिंह जोहल को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत, 8 साल बाद 7 मामलों में मिली जमानत
📷 जगतार सिंह जोहल को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत, 8 साल बाद 7 मामलों में मिली जमानत — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • यूके के नागरिक जगतार सिंह जोहल को 8 साल की लंबी कैद के बाद दिल्ली हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है।
  • जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर दुग्गल की बेंच ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलटते हुए यह आदेश दिया।
  • अदालत ने जोहल की जमानत के लिए 5 लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की दो जमानतों की शर्त रखी है।
  • जमानत की शर्तों के तहत जोहल को अपना पासपोर्ट सरेंडर करना होगा और सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर कड़ी पाबंदी रहेगी।

दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, आठ साल बाद जेल से बाहर आने का रास्ता साफ

देश की राजधानी दिल्ली से एक बड़ी कानूनी खबर सामने आ रही है। दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक अहम फैसले में यूके के नागरिक जगतार सिंह जोहल को बड़ी राहत दी है। अदालत ने नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) द्वारा दर्ज किए गए सात अलग-अलग मामलों में जोहल को जमानत दे दी है। अदालत ने अपने आदेश में इस बात का खास जिक्र किया कि आरोपी पिछले आठ साल से ज्यादा समय से हिरासत में बंद है और मौजूदा हालात को देखते हुए इन मामलों की सुनवाई के जल्दी पूरी होने की कोई संभावना नजर नहीं आती है।

यह फैसला जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर दुग्गल की डिवीजन बेंच ने सुनाया है। अदालत ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को खारिज कर दिया जिसमें जोहल की जमानत याचिका को ठुकरा दिया गया था। हाईकोर्ट ने साफ किया कि लंबी कैद और ट्रायल में देरी को आधार बनाते हुए आरोपी को कुछ सख्त शर्तों के साथ रिहा किया जाना चाहिए। अदालत का यह आदेश कानूनी गलियारों में खासी चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि यह मामला पिछले कई सालों से लगातार सुर्खियों में रहा है।

विज्ञापन • ADVERTISEMENT

कड़ी शर्तों के साथ मिली जमानत, पासपोर्ट करना होगा सरेंडर

जगतार सिंह जोहल के लिए यह राहत भले ही बड़ी हो, लेकिन अदालत ने उनकी रिहाई के लिए बेहद कड़ी शर्तें तय की हैं। आदेश के मुताबिक, जोहल को पांच-पाँच लाख रुपये के दो स्थानीय मुचलके और उतनी ही राशि की दो जमानतें कोर्ट में पेश करनी होंगी। इसके अलावा उन्हें अपना पासपोर्ट तुरंत संबंधित अधिकारी के पास सरेंडर करना होगा। अगर उनके पास पासपोर्ट नहीं है, तो उन्हें इस बात का एक शपथ पत्र (एफिडेविट) देना होगा कि उनके पास कोई पासपोर्ट नहीं है।

अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि सुनवाई के दौरान जोहल केवल एक ही मोबाइल फोन या लैंडलाइन नंबर का इस्तेमाल करेंगे और वह फोन हमेशा चालू रहना चाहिए। इसके साथ ही उन्हें अपना सही आवासीय पता, फोन नंबर और ईमेल आईडी जांच अधिकारी और ट्रायल कोर्ट को सौंपना होगा। वे बिना सात दिन की अग्रिम लिखित सूचना दिए अपना पता या संपर्क विवरण नहीं बदल सकेंगे। अदालत ने उन्हें हर सुनवाई पर कोर्ट में पेश होने का निर्देश भी दिया है, जब तक कि उन्हें व्यक्तिगत पेशी से छूट न मिली हो।

सोशल मीडिया और गवाहों को प्रभावित करने पर सख्त पाबंदी

जांच और सुनवाई की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए रखने के लिए हाईकोर्ट ने जोहल की हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए हैं। वे किसी भी तरह से अभियोजन पक्ष के गवाहों, संरक्षित गवाहों या शिकायतकर्ताओं से संपर्क करने, उन्हें प्रभावित करने या धमकाने की कोशिश नहीं करेंगे। इसके अलावा, मामले से जुड़े किसी भी सबूत या इलेक्ट्रॉनिक डेटा के साथ छेड़छाड़ करने पर भी पूरी तरह रोक लगाई गई है।

जोहल किसी भी ऐसे व्हाट्सएप ग्रुप या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से नहीं जुड़ सकते हैं जहाँ 'राष्ट्रविरोधी सामग्री' अपलोड या साझा की जाती हो। अदालत ने उन्हें इस संबंध में ट्रायल कोर्ट में एक लिखित हलफनामा भी देने को कहा है।

"लंबे समय तक बिना ट्रायल के हिरासत में रखना न्याय के सिद्धांत के खिलाफ है, हालांकि आरोपी को अदालत द्वारा तय की गई सभी सख्त शर्तों का पूरी तरह पालन करना होगा।" — दिल्ली हाईकोर्ट बेंच

सार्वजनिक बयानों और मीडिया कवरेज पर भी लगाई गई रोक

अदालत के आदेश में साफ कहा गया है कि जगतार सिंह जोहल पेंडिंग मुकदमों, सबूतों या गवाहों के बारे में प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक या सोशल मीडिया पर कोई भी सार्वजनिक बयान नहीं देंगे। वे ऐसी किसी भी गतिविधि में शामिल नहीं होंगे जिससे देश की सार्वजनिक व्यवस्था या मुकदमे की अखंडता पर कोई आंच आए। जांच में पूरा सहयोग करना और हर तारीख पर कोर्ट में हाजिर होना उनकी जमानत की मुख्य शर्तों में शामिल रहेगा।

द फ्रीलांस पत्रकारिता नीति (Editorial Commitment):हम निष्पक्ष, सटीक और तथ्यात्मक पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह समाचार रिपोर्ट विभिन्न प्रमाणित समाचार एजेंसियों, आधिकारिक बयानों और स्थानीय संवाददाताओं से प्राप्त इनपुट के आधार पर तैयार की गई है।
विज्ञापन एवं अनुशंसित सामग्री • RECOMMENDED