नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — क्रिकेट के गलियारों में इस समय टीम इंडिया के चयन और फैसलों को लेकर बड़ी बहस छिड़ गई है। वेस्टइंडीज के खिलाफ खेले गए मुकाबले में भारतीय टीम को हार का सामना करना पड़ा था। इस हार के तुरंत बाद अनुभवी स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने टीम मैनेजमेंट और कोच गौतम गंभीर की रणनीति पर खुलकर नाराजगी जताई है। अश्विन का मानना है कि मैदान पर लिए गए फैसले कई बार समझ से परे होते हैं और इससे टीम का संतुलन बिगड़ जाता है। उन्होंने विशेष तौर पर मैच के दौरान रणनीतिक भूलों का खुलकर जिक्र किया है।
इस पूरे विवाद की जड़ टीम की प्लेइंग इलेवन में किए गए बदलाव हैं। सीरीज के अहम मुकाबले में जब टीम को मैदान पर उतारा गया, तो उसमें कई अनुभवी खिलाड़ियों को जगह नहीं मिली। इस पर केवल अश्विन ही नहीं, बल्कि देश के पूर्व महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने भी अपनी कड़ी भड़ास निकाली है। गावस्कर का कहना है कि जब टीम के पास मैच जिताऊ खिलाड़ी मौजूद हैं, तो उन्हें बाहर बैठाने का कोई तार्किक कारण समझ नहीं आता। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे अहम दौर में इस तरह के फैसले टीम का आत्मविश्वास कम कर सकते हैं।
कुलदीप यादव को बाहर रखने पर अश्विन हैरान
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मुद्दा चाइनामैन गेंदबाज कुलदीप यादव को अंतिम एकादश से बाहर रखना बना हुआ है। रविचंद्रन अश्विन ने इस बात पर कड़ी हैरानी जताई है कि इतने शानदार रिकॉर्ड वाले 31 वर्षीय खिलाड़ी को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। अश्विन ने साफ शब्दों में कहा है कि कुलदीप जैसे विकेट लेने वाले गेंदबाज को बेंच पर बैठाना बहुत बड़ी भूल है। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है और क्रिकेट प्रेमी इस पर अपनी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
मैदान पर लगातार हो रहे प्रयोगों और हार के बाद फैंस के बीच भी निराशा का माहौल है। जानकारों का कहना है कि जब तक टीम मैनेजमेंट खिलाड़ियों के चयन में पारदर्शिता और निरंतरता नहीं रखेगा, तब तक ऐसी हार से बचना मुश्किल होगा। सुनील गावस्कर ने भी पूर्व में कई बार इस बात पर जोर दिया है कि खिलाड़ियों की फॉर्म से ज्यादा उनकी उपयोगिता और अनुभव को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। कुलदीप यादव को लेकर उठे इन सवालों ने चयन समिति की कार्यप्रणाली को एक बार फिर से कटघरे में खड़ा कर दिया है।
मोहम्मद शमी की वापसी और टीम की आगे की रणनीति
इस बीच भारतीय गेंदबाजी क्रम को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं कि तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी की टीम में दोबारा वापसी किस प्रकार होगी। अश्विन और अन्य क्रिकेट पंडितों का मानना है कि टीम को अनुभव की सख्त जरूरत है। आने वाले बड़े दौरों को देखते हुए गेंदबाजी आक्रमण को मजबूत करना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। चयनकर्ताओं के लिए यह समय आत्ममंथन का है क्योंकि खिलाड़ियों के चयन को लेकर लगातार उठ रहे सवाल टीम के भीतर के माहौल पर भी असर डाल रहे हैं।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल के मुताबिक, आने वाले दिनों में बीसीसीआई और टीम मैनेजमेंट के बीच इस पर लंबी चर्चा हो सकती है। खिलाड़ियों के चयन के मानदंड और रणनीतिक फैसलों में सुधार की मांग अब खुलकर सामने आने लगी है। रविचंद्रन अश्विन और सुनील गावस्कर जैसे दिग्गजों का मुखर होना यह बताता है कि भारतीय क्रिकेट में अब फैसलों पर खुलकर सवाल पूछने का दौर शुरू हो चुका है, जिस पर बोर्ड को गंभीरता से ध्यान देना होगा।




