नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय क्रिकेट टीम के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाजों में शुमार चेतेश्वर पुजारा एक बार फिर से इंटरनेट पर चर्चा का केंद्र बन गए हैं। पिछले कुछ घंटों में गूगल ट्रेंड्स पर अचानक उनके नाम को लेकर खोज में तेजी आई है। यह अचानक आया उछाल इस बात का सबूत है कि देश के खेल प्रेमी आज भी टेस्ट क्रिकेट में पुजारा जैसी मजबूत तकनीक और संयम की कमी को साफ महसूस कर रहे हैं। हालांकि टीम प्रबंधन युवाओं को मौका देने की नीति पर काम कर रहा है, लेकिन पुजारा का बल्ला अब भी घरेलू मैदानों पर लगातार रन उगल रहा है।
भारतीय टीम से बाहर होने के बाद भी पुजारा ने हार नहीं मानी है और वे लगातार रणजी ट्रॉफी तथा अन्य घरेलू मुकाबलों में सौराष्ट्र की टीम के लिए खेल रहे हैं। उन्होंने अपनी बल्लेबाजी की धार को कमजोर नहीं होने दिया है और लगातार मैदान पर टिककर खेलने की अपनी पुरानी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं। चयनकर्ताओं ने भले ही अभी उनकी तरफ देखना बंद कर दिया हो, लेकिन विदेशी दौरों पर जब भी भारतीय बल्लेबाजों का रक्षात्मक कौशल कमजोर पड़ता है, तब-तब पुजारा के नाम की चर्चा जोरों पर शुरू हो जाती है।
घरेलू क्रिकेट में रनों का पहाड़
चेतेश्वर पुजारा ने रणजी ट्रॉफी के मुकाबलों में एक बार फिर साबित कर दिया है कि उनमें अभी भी उच्च स्तर की क्रिकेट बाकी है। उन्होंने मुश्किल पिचों पर टिककर खेलना और नई गेंद का डटकर मुकाबला करना जारी रखा है। जब युवा खिलाड़ी तेज गेंदबाजों के आगे जल्दी आउट हो जाते हैं, तब पुजारा का घरेलू मैचों में यह प्रदर्शन उनकी फिटनेस और मानसिक मजबूती की कहानी कहता है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि केवल उम्र या चयन नीति के आधार पर इतने अनुभवी खिलाड़ी को पूरी तरह नजरअंदाज करना सही फैसला नहीं है।
पुजारा ने भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट में कई ऐतिहासिक मैच बचाए हैं और ऑस्ट्रेलिया की धरती पर जाकर सीरीज जिताने में अहम भूमिका निभाई है। उनके इसी जुझारू रवैये के कारण आज भी करोड़ों फैंस उन्हें मैदान पर भारतीय जर्सी में देखना चाहते हैं। सोशल मीडिया से लेकर खेल के मैदानों के बाहर चाय की दुकानों तक बस यही बहस छिड़ी रहती है कि क्या चयनकर्ता एक बार फिर इस अनुभवी खिलाड़ी को मौका देंगे या उनका अंतरराष्ट्रीय सफर अब थम चुका है।
चयनकर्ताओं की युवा नीति और भविष्य की राह
बीसीसीआई इस समय पूरी तरह से टीम का कायाकल्प करने में जुटी है और युवा खिलाड़ियों को तराशने पर पूरा जोर दे रही है। यही मुख्य कारण है कि चेतेश्वर पुजारा और अजिंक्य रहाणे जैसे वरिष्ठ खिलाड़ियों को टेस्ट टीम से बाहर का रास्ता देखना पड़ा है। चयन समिति का मानना है कि भविष्य की मजबूत टेस्ट टीम तैयार करने के लिए अब नई पीढ़ी को लंबे मौके देना बेहद जरूरी हो गया है। इसके बावजूद खेल के जानकारों का एक वर्ग यह मानता है कि संक्रमण के दौर से गुजर रही टीम को अनुभव की सख्त जरूरत होती है।
मैदान पर पसीना बहा रहे पुजारा ने अभी तक अपने संन्यास को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। इससे साफ जाहिर होता है कि वे अंदर से अब भी वापसी की उम्मीद संजोए बैठे हैं और अपने बल्ले से चयनकर्ताओं को करारा जवाब देना चाहते हैं। उनका यह जज्बा न केवल युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करता है बल्कि यह भी बताता है कि असली खिलाड़ी कभी भी हालात के आगे घुटने नहीं टेकता है।
फैंस और विशेषज्ञों की मिली-जुली राय
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पिछले कुछ घंटों में पुजारा के समर्थन में हजारों संदेश पोस्ट किए गए हैं। खेल प्रेमियों का साफ कहना है कि इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसी मुश्किल परिस्थितियों में खेलने के लिए पुजारा जैसा तकनीक का पक्का बल्लेबाज आज भी टीम की सबसे बड़ी जरूरत बन सकता है। दूसरी तरफ कुछ विश्लेषकों का यह भी तर्क है कि अब आगे बढ़ने का समय आ गया है और टीम को पीछे देखने के बजाय आगे देखना चाहिए। चाहे जो भी हो, चेतेश्वर पुजारा का नाम आज भी भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक मजबूत दीवार के रूप में हमेशा अमर रहेगा।






