नई दिल्ली से ग्राउंड रिपोर्ट — भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व विस्फोटक सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग का नाम आते ही जेहन में गेंदबाजों की जमकर पिटाई करने का दृश्य उभर आता है। क्रिकेट के मैदान पर अपनी आक्रामक बल्लेबाजी शैली के लिए मशहूर सहवाग ने अपने समय में दुनिया के बड़े से बड़े गेंदबाजों के पसीने छुड़ा दिए थे। उनका जन्म दिल्ली के एक साधारण परिवार में हुआ था और बचपन से ही उन्हें क्रिकेट खेलने का बहुत शौक था। सहवाग ने अपनी अनूठी बल्लेबाजी शैली से टेस्ट क्रिकेट को देखने का नजरिया पूरी तरह से बदल दिया था।
शुरुआती दौर में उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा लेकिन उनकी प्रतिभा ने चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींच ही लिया। उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत वनडे मैच से की थी और फिर धीरे-धीरे टेस्ट टीम में अपनी पक्की जगह बना ली। सहवाग की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वे क्रीज पर उतरते ही पहली गेंद से ही गेंदबाजों पर हावी होने की कोशिश करते थे। लाल गेंद का खेल हो या सफेद गेंद का, सहवाग का खेलने का तरीका हमेशा एक जैसा आक्रामक ही रहता था।
मुल्तान का सुल्तान बनने की ऐतिहासिक पारी
साल 2004 में पाकिस्तान के खिलाफ मुल्तान के मैदान पर खेला गया मुकाबला भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे सुनहरे पन्नों में दर्ज है। इसी मैच में वीरेंद्र सहवाग ने टेस्ट क्रिकेट में भारत की तरफ से पहला तिहरा शतक लगाकर इतिहास रच दिया था। उन्होंने पाकिस्तानी गेंदबाजों की जमकर खबर ली और मैदान के चारों तरफ रन बटोरे। इस ऐतिहासिक पारी के बाद से ही क्रिकेट जगत उन्हें प्यार से मुल्तान का सुल्तान कहने लगा। उस मैच में उनके द्वारा खेली गई 309 रनों की पारी आज भी क्रिकेट प्रेमियों को बहुत अच्छी तरह से याद है।
सहवाग ने सिर्फ मुल्तान में ही नहीं बल्कि दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसी मुश्किल पिचों पर भी अपनी धाक जमाई। वे दुनिया के उन चुनिंदा बल्लेबाजों में शामिल हैं जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट में दो बार तिहरा शतक जड़ने का कारनामा किया है। उनका यह रिकॉर्ड साबित करता है कि वे सिर्फ तूफानी बल्लेबाज ही नहीं बल्कि बड़ी पारियां खेलने की गजब की क्षमता रखते थे। उनके इस शानदार प्रदर्शन की बदौलत भारतीय टीम ने कई विदेश दौरों पर ऐतिहासिक जीत हासिल की और दुनिया भर में अपनी धाक जमाई।
टेस्ट क्रिकेट में दोहरे और तिहरे शतकों का अनोखा रिकॉर्ड
वीरेंद्र सहवाग के नाम टेस्ट क्रिकेट में सबसे तेज गति से रन बनाने के कई अनूठे रिकॉर्ड दर्ज हैं। जब भी वे मैदान पर उतरते थे तो विरोधी टीम के कप्तान हमेशा रक्षात्मक रणनीति अपनाने पर मजबूर हो जाते थे। उनका स्ट्राइक रेट टेस्ट मैचों में भी वनडे जैसा ही रहता था जो कि पारंपरिक फॉर्मेट में बहुत बड़ी बात मानी जाती है। सहवाग ने साबित किया कि बिना किसी तकनीकी झंझट के भी सीधे और करारे शॉट्स खेलकर लंबी पारियां खेली जा सकती हैं।
मैदान के बाहर भी सहवाग अपने मजाकिया और बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते हैं। क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास लेने के बाद भी वे सोशल मीडिया और कमेंट्री के जरिए खेल से जुड़े रहे हैं। उनकी हाजिरजवाबी और तीखी टिप्पणियां फैंस के बीच हमेशा चर्चा का विषय बनी रहती हैं। आज की युवा पीढ़ी के कई सलामी बल्लेबाज सहवाग को अपना आदर्श मानते हैं और उनकी तरह खुलकर खेलने की कोशिश करते हैं।
भारतीय क्रिकेट में सहवाग का अमिट योगदान
वीरेंद्र सहवाग ने अपने लंबे और शानदार करियर में देश को कई मौकों पर गौरवान्वित होने का मौका दिया। साल 2007 का टी20 विश्व कप हो या साल 2011 का वनडे विश्व कप, दोनों ही बड़े टूर्नामेंटों में सहवाग की भूमिका बहुत अहम रही थी। उन्होंने पारी की शुरुआत में तेज गति से रन बनाकर मध्यक्रम के बल्लेबाजों के लिए काम आसान कर दिया था। उनके खेल में जो निडरता दिखाई देती थी, वही भारतीय टीम की नई पहचान बन गई थी।
आज जब भी आधुनिक युग के तेजतर्रार बल्लेबाजों की बात होती है तो वीरेंद्र सहवाग का नाम सबसे ऊपर लिया जाता है। उन्होंने भारतीय क्रिकेट संस्कृति को बदलने में बहुत बड़ा योगदान दिया है जो आने वाले कई दशकों तक याद रखा जाएगा। उनकी सादगी और मैदान पर दिखाई देने वाली आक्रामकता का यह मेल उन्हें दुनिया भर के खेल प्रेमियों का चहेता बनाता है। द फ्रीलान्स की इस खास रिपोर्ट में हमने उनके इसी प्रेरणादायक सफर के मुख्य पहलुओं को आपके सामने रखा है।





