नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय क्रिकेट के इतिहास में जब भी सबसे खतरनाक और तेज गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाने वाले बल्लेबाजों का नाम लिया जाता है, तब वीरेंद्र सहवाग का नाम सबसे ऊपर आता है। दिल्ली के नजफगढ़ से आने वाले इस खिलाड़ी ने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से खेल का पूरा अंदाज ही बदल दिया था। सहवाग को क्रीज पर खड़े होकर गेंदबाज की रफ्तार की कोई परवाह नहीं होती थी और वह पहली गेंद से ही बड़े शॉट खेलने के लिए जाने जाते थे। उनके इस बेखौफ अंदाज ने उन्हें दुनिया भर में एक अलग पहचान दिलाई और भारत को कई ऐतिहासिक मैच जिताए।
क्रिकेट के जानकारों और आंकड़ों के अनुसार, सहवाग का बल्ला हमेशा गेंदबाजों के लिए मुसीबत बना रहता था। टेस्ट क्रिकेट में उनका प्रदर्शन ऐसा था कि विरोधी कप्तान हमेशा हैरान परेशान रहते थे कि उन्हें कैसे रोका जाए। सहवाग ने भारत के लिए कई यादगार पारियां खेली हैं जो आज भी खेल प्रेमियों के जेहन में ताजा हैं। उनकी इस खेल शैली के पीछे उनकी कड़ी मेहनत और गेंद को सही समय पर परखने की गजब की क्षमता थी। यही वजह है कि आज भी युवा खिलाड़ी उनके खेलने के तरीके को अपनाना चाहते हैं और उनसे सीख लेते हैं।
टेस्ट क्रिकेट में दो तिहरे शतक जड़ने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज
वीरेंद्र सहवाग के नाम टेस्ट क्रिकेट में कई ऐसे बड़े रिकॉर्ड दर्ज हैं जिन्हें तोड़ना आज के दौर के बल्लेबाजों के लिए भी बहुत कठिन है। वे टेस्ट क्रिकेट में भारत की तरफ से पहला तिहरा शतक लगाने वाले बल्लेबाज बने थे। उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ मुल्तान में खेले गए मैच में तिहरा शतक जड़कर इतिहास रच दिया था जिसके बाद उन्हें 'मुल्तान का सुल्तान' कहा जाने लगा। इसके बाद उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ चेन्नई में एक और तूफानी पारी खेलते हुए अपना दूसरा तिहरा शतक पूरा किया। टेस्ट क्रिकेट में दो तिहरे शतक बनाने का यह कारनामा बहुत ही कम बल्लेबाजों ने किया है।
उनकी यह पारियां सिर्फ रनों का अंबार नहीं थीं बल्कि खेल के प्रति उनके निडर रवैया को भी दर्शाती थीं। सहवाग जब बल्लेबाजी करने उतरते थे तो वे कभी भी अपने निजी स्कोर के बारे में नहीं सोचते थे। उनका एकमात्र लक्ष्य टीम को अच्छी शुरुआत देना और स्कोरबोर्ड को तेजी से आगे बढ़ाना होता था। छक्के के साथ अपना शतक या दोहरा शतक पूरा करने की उनकी आदत ने उन्हें दर्शकों के बीच और भी ज्यादा लोकप्रिय बना दिया था। मैदान पर उनका यह दबदबा भारतीय टीम के लिए एक बहुत बड़ी ताकत साबित हुआ था।
वनडे क्रिकेट में दोहरा शतक और कप्तानी का शानदार सफर
सिर्फ लाल गेंद के क्रिकेट में ही नहीं बल्कि सफेद गेंद के खेल यानी वनडे इंटरनेशनल में भी वीरेंद्र सहवाग का बल्ला जमकर बोला था। उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ इंदौर के मैदान पर वनडे क्रिकेट का ऐतिहासिक दोहरा शतक लगाया था। उस समय वनडे में दोहरा शतक बनाना बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जाती थी और सहवाग ने अपनी इस पारी से फिर साबित कर दिया कि वे आधुनिक युग के सबसे महान बल्लेबाजों में से एक हैं। उनकी यह पारी भारतीय क्रिकेट के पन्नों में हमेशा के लिए अमर हो गई है।
मैदान पर अपने खेल के अलावा सहवाग ने कई मौकों पर भारतीय टीम की कप्तानी की जिम्मेदारी भी संभाली। उन्होंने अपनी शांत और समझदारी भरी सूझबूझ से टीम को कई मुश्किल परिस्थितियों से बाहर निकाला। हालांकि वे मुख्य रूप से एक आक्रामक बल्लेबाज के रूप में जाने जाते थे लेकिन जरूरत पड़ने पर उन्होंने अपनी ऑफ स्पिन गेंदबाजी से भी कई बहुमूल्य विकेट चटकाए। सहवाग का यह ऑलराउंड प्रदर्शन टीम संतुलन के लिए बेहद अहम साबित होता था और कप्तान हमेशा उन पर भरोसा करते थे।
क्रिकेट को अलविदा कहने के बाद कमेंट्री और सोशल मीडिया पर जलवा
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहने के बाद भी वीरेंद्र सहवाग लगातार खेल और अपने फैंस के साथ जुड़े हुए हैं। वे मैचों के दौरान अपनी तीखी और मजेदार हिंदी कमेंट्री से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन करते हैं। उनके द्वारा कही गई बातें और अनोखे विश्लेषण सोशल मीडिया पर बहुत तेजी से वायरल होते हैं। इसके अलावा वे ट्विटर और अन्य प्लेटफार्मों पर अपने चुटीले अंदाज के लिए भी जाने जाते हैं जहां वे हर बड़े मुद्दे पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं।
आज भी जब कभी क्रिकेट के रिकॉर्ड्स की बात होती है तो सहवाग का नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है। आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ी उनसे प्रेरणा लेते हैं कि कैसे बिना किसी डर के खुलकर अपनी कला का प्रदर्शन किया जाए। दिल्ली के एक साधारण परिवार से उठकर दुनिया भर में अपनी धाक जमाने वाले वीरेंद्र सहवाग की यह पूरी यात्रा खेल प्रेमियों के लिए एक बड़ी मिसाल है। उनकी यह कहानी साबित करती है कि अगर आपके पास अपनी काबिलियत पर पूरा भरोसा है तो आप इतिहास बदल सकते हैं।






