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राज्यपढ़ने में समय: 6 मिनट

गोमती का तांडव: लखनऊ के 40 हजार घरों में घुसा बाढ़ का पानी, बिहार में 8 लाख लोग प्रभावित

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में गोमती नदी के उफान से हालात बेकाबू हो गए हैं। फैजुल्लागंज समेत कई इलाकों के 40 हजार घरों में पानी घुसने से लगभग 10 हजार लोग पलायन कर चुके हैं। उधर, बिहार के 6 जिलों में भी बाढ़ का भयंकर प्रकोप जारी है जिससे लाखों लोग प्रभावित हैं।
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राज्य एवं प्रादेशिक ब्यूरो, द फ्रीलांस
प्रादेशिक एवं राज्य ब्यूरो•5 अक्टूबर 2026 • अपडेटेड•48
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गोमती का तांडव: लखनऊ के 40 हजार घरों में घुसा बाढ़ का पानी, बिहार में 8 लाख लोग प्रभावित
📷 गोमती का तांडव: लखनऊ के 40 हजार घरों में घुसा बाढ़ का पानी, बिहार में 8 लाख लोग प्रभावित — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • लखनऊ के फैजुल्लागंज और आसपास के इलाकों में गोमती नदी का पानी भरने से करीब 40 हजार घर जलमग्न हो चुके हैं।
  • बिहार के 6 जिलों के 466 गांवों में बाढ़ से लगभग 8 लाख लोग प्रभावित हैं और अब तक 27 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।
  • मौसम विभाग ने मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में आगामी दिनों में बारिश का नया दौर चलने की चेतावनी दी है।

गोमती नदी के उफान से राजधानी लखनऊ में हाहाकार

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रकृति का एक ऐसा रूप देखने को मिल रहा है, जिसने आम जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। हालांकि पिछले कुछ दिनों से आसमान साफ था और बारिश नहीं हो रही थी, लेकिन बड़े बांधों से अचानक छोड़े गए भारी मात्रा में पानी के कारण नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया। इसका सबसे बुरा असर गोमती नदी के किनारे बसे इलाकों पर पड़ा है, जहां पानी रिहायशी कॉलोनियों के भीतर तक पहुंच गया है।

स्थिति इतनी विकराल हो चुकी है कि महानगर के कई बड़े इलाकों और कॉलोनियों की गलियों में अब नाव चलानी पड़ रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पानी का स्तर लगातार बढ़ने से उनके घरों का कीमती सामान और गृहस्थी का अन्य सामान डूब चुका है। प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक, केवल फैजुल्लागंज और उससे जुड़ी बस्तियों के लगभग 40 हजार घरों में चार से पांच फीट तक पानी भर चुका है। सुरक्षा और एहतियात के तौर पर प्रशासन ने गोमती रिवर फ्रंट और मरीन ड्राइव के आसपास के क्षेत्रों को पूरी तरह सील कर दिया है।

जानमाल की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए अब तक करीब 10 हजार से अधिक लोग अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित ठिकानों या रिश्तेदारों के यहां शरण लेने के लिए मजबूर हो चुके हैं। कई इलाकों में हालात ऐसे हैं कि लोगों को अपने घरों की छतों पर रात बितानी पड़ रही है। पानी के तेज बहाव और लगातार जलभराव के कारण मकानों की नींवें भी कमजोर पड़ने लगी हैं, जिससे ढहने का खतरा मंडरा रहा है.

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प्रशासनिक अमला मैदान में, रेस्क्यू ऑपरेशन और राहत सामग्री की चुनौती

हालात की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी लगातार मैदानी स्तर पर मुस्तैद नजर आ रहे हैं। जिलाधिकारी और संयुक्त पुलिस आयुक्त ने खुद घुटनों तक भरे पानी में उतरकर प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और स्थिति का जायजा लिया। विशेष तौर पर बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए अतिरिक्त मोटरबोट और नावें तैनात की गई हैं।

प्रभावित बस्तियों में राहत कार्यों को गति देने के लिए युद्धस्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन स्थानीय निवासियों का गुस्सा भी फूट रहा है। कई जगहों पर लोगों ने आरोप लगाया है कि उन्हें समय पर राहत सामग्री और पीने का साफ पानी नहीं मिल रहा है। इसके अलावा, रात के अंधेरे में घरों में चोरी होने का डर भी लोगों को सता रहा है, जिसके चलते वे रतजगा करने को विवश हैं।

"बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में हमारे दल लगातार गश्त कर रहे हैं। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ-साथ भोजन और चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराना हमारी पहली प्राथमिकता है। किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।" — जिला प्रशासन, लखनऊ

बिहार में बाढ़ का भीषण प्रकोप, 8 लाख से ज्यादा आबादी प्रभावित

सिर्फ उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्य बिहार में भी बाढ़ ने भारी तबाही मचा रखी है। राज्य के करीब 6 जिलों के लगभग 466 गांव पूरी तरह जलमग्न हैं। आपदा प्रबंधन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, इस आपदा की चपेट में आने से लगभग 8 लाख लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। राज्य सरकार और एनडीआरएफ की टीमों ने अब तक करीब 92 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों में पहुंचाया है।

सारण जिले में बाढ़ का सबसे भयंकर रूप देखने को मिला है, जहां अकेले साढ़े तीन लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। प्रशासनिक रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ और उससे जुड़ी विभिन्न दुर्घटनाओं में अब तक कुल 27 लोगों की जान जा चुकी है। राज्य के कई हिस्सों में राहत शिविरों का संचालन किया जा रहा है, जहां प्रभावित परिवारों को सूखा राशन और चिकित्सकीय सहायता मुहैया कराई जा रही है.

मौसम का मिजाज बदला: यूपी में आंधी-तूफान और ओलावृष्टि का अलर्ट

एक तरफ जहां कई जिले बाढ़ के पानी से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश और आंधी का नया दौर शुरू होने की संभावना जताई है। सोमवार को बाराबंकी, प्रतापगढ़ और सुल्तानपुर समेत कई जिलों में अचानक मौसम का मिजाज बदला और तेज हवाओं के साथ ओले गिरे। किसानों के मुताबिक इस बेमौसम बरसात और ओलावृष्टि से धान और गन्ने की खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है।

अयोध्या और वाराणसी जैसे जिलों में लगभग 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली आंधी के कारण कई जगहों पर पेड़ उखड़ गए और बिजली के खंभे गिर गए, जिससे बिजली आपूर्ति भी बाधित हुई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून की विदाई और पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण मौसम में यह अप्रत्याशित बदलाव आया है.

अन्य राज्यों में भी मौसम का असर और पानी की कटौती

मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद से दिन में तीखी धूप और रात में हल्की ठंड का अहसास होने लगा है। हालांकि मौसम विभाग ने राज्य के कुछ शहरों में हल्की बारिश का अनुमान भी जताया है। वहीं दूसरी ओर, राजस्थान के पश्चिमी जिलों जैसे पिलानी, जैसलमेर और चूरू में पारा एक बार फिर चढ़ गया है और तापमान सामान्य से ऊपर दर्ज किया जा रहा है।

महाराष्ट्र सरकार ने भी कम बारिश के चलते बड़ा फैसला लेते हुए राज्य के सभी शहरी और ग्रामीण निकायों में आगामी 16 अक्टूबर से कम से कम 10 प्रतिशत पानी की कटौती लागू करने का ऐलान किया है। कुल मिलाकर देश के विभिन्न राज्यों में इस समय मौसम और जल संकट दोहरी चुनौती बनकर सामने आए हैं।

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राज्य एवं प्रादेशिक ब्यूरो, द फ्रीलांस

सत्यापित संपादकीय डेस्क

उत्तर प्रदेश व प्रादेशिक विकास रिपोर्टिंग टीम

द फ्रीलांस का प्रादेशिक ब्यूरो उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों के जमीनी मुद्दों, विकास योजनाओं, प्रशासनिक कार्रवाइयों और ग्रामीण-शहरी समस्याओं की निष्पक्ष और वास्तविक रिपोर्टिंग करता है।

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