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तमिलनाडु की एक प्रमुख जाति ने आरक्षण का लाभ और कड़े कानूनों का मोह त्यागकर खुद को अनुसूचित जाति की श्रेणी से बाहर करने की अनूठी मांग उठाई है। इस समुदाय का मानना है कि इस पहचान से सामाजिक कलंक जुड़ता है और आत्मसम्मान तथा व्यापारिक प्रगति में बाधा उत्पन्न होती है।