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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बदलते ग्लोबल जॉब मार्केट के बीच उच्च शिक्षा के स्वरूप पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि चार साल की लंबी डिग्री के बजाय अब योग्यता और सूक्ष्म-प्रमाणपत्रों का दौर आ रहा है, जिससे विश्वविद्यालयों को अपनी कार्यप्रणाली बदलने की जरूरत है।