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उत्तर प्रदेश के एक व्यक्ति ने लगभग तीन दशकों तक असफलता मिलने के बावजूद हार नहीं मानी और 59 वर्ष की आयु में संस्कृत शिक्षक बनने का अपना सपना आखिरकार सच कर दिखाया। इस लंबी यात्रा में उन्होंने कई बार लिखित परीक्षाएं पास कीं, लेकिन इंटरव्यू की बाधा पार नहीं कर पाए थे।