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बचपन की स्कूली शिक्षा में पहाड़े रटना एक अनिवार्य हिस्सा रहा है, लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस दौर में अब तकनीकी दिग्गजों की सोच बदल रही है। एनवीडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने एक बयान में कहा है कि उन्हें खुद अपना फोन नंबर या घर का पता तक जुबानी याद नहीं है, जिससे यह बहस छिड़ गई है कि क्या भविष्य में रटने की कला का कोई महत्व बचेगा।