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सनातन संस्कृति में पितृ पक्ष का विशेष महत्व माना गया है। आश्विन मास की शुरुआत के साथ ही शुरू हुए इस काल में पूर्वजों का स्मरण कर तर्पण और पिंडदान किया जाता है, जिससे जीवन में पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।