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अमेरिका में बॉन्ड यील्ड के दो दशकों के उच्चतम स्तर पर पहुंचने से दुनिया भर के वित्तीय बाजारों में खलबली मच गई है। इसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार, विदेशी निवेश और रुपये की चाल पर पड़ रहा है। निवेशकों के बीच इस बात की चिंता बढ़ गई है कि ऊंची ब्याज दरों का यह दौर कब तक चलेगा।