नई दिल्ली और कोलकाता — सूरज ढलते ही भारत के एक बड़े हिस्से की उंगलियां मोबाइल स्क्रीन पर दौड़ने लगती हैं। हर रात सोने जाने से ठीक पहले लाखों लोग गूगल पर एक ही सवाल टाइप करते हैं कि कल का मौसम कैसा रहेगा। गूगल ट्रेंड्स के ताजा आंकड़ों के मुताबिक यह रात का समय एक ऐसा दौर है जब मौसम से जुड़े सर्च अचानक बहुत बढ़ जाते हैं। लोग चैन की नींद सोने से पहले यह पक्का करना चाहते हैं कि अगली सुबह आसमान साफ रहेगा या फिर किसी आंधी-तूफान का सामना करना पड़ेगा। यह केवल एक आम जिज्ञासा नहीं है बल्कि यह रोजमर्रा की भागदौड़ भरी जिंदगी में खुद को सुरक्षित रखने की एक अनकही आदत बन चुकी है।
इस बीच पश्चिम बंगाल के मौसम विभाग ने राज्य के कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी कर दी है। मौसम कार्यालय ने साफ कर दिया है कि अगले कुछ घंटों में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल सकता है। कई संवेदनशील इलाकों में रेड अलर्ट भी घोषित किया गया है जिससे स्थानीय प्रशासन और आम लोगों की धड़कनें तेज हो गई हैं। कोलकाता और आसपास के जिलों में आसमान में काले बादल मंडराने लगे हैं और ठंडी हवाएं चलने लगी हैं। यही वजह है कि लोग रात के वक्त ही यह जानना चाहते हैं कि कल सुबह घर से निकलते वक्त उन्हें छाता लेकर निकलना होगा या पानी से भरे रास्तों का सामना करना पड़ेगा।
सोने से पहले मौसम देखने की यह अनोखी आदत क्यों
भारत में आधी रात के समय मौसम का पूर्वानुमान देखने की यह परिपाटी अब एक बड़े सामाजिक व्यवहार में बदल चुकी है। हर कोई अपने अगले दिन के सफर, ऑफिस जाने के समय और बच्चों के स्कूल जाने को लेकर सतर्क रहना चाहता है। पिछले कुछ सालों में अचानक होने वाली बारिश और गर्मी ने लोगों को मौसम पर पूरी तरह निर्भर कर दिया है। एक आम आदमी के लिए मौसम की यह जानकारी केवल तापमान का आंकड़ा नहीं है बल्कि यह उसके पूरे दिन के बजट और यात्रा की योजना तय करती है। चाहे दिल्ली का प्रदूषण हो या कोलकाता की अचानक आने वाली मानसूनी बौछारें, लोग अब किसी भी तरह की हैरानी से बचना चाहते हैं। यही कारण है कि रात के सन्नाटे में वे मौसम के ऐप्स और वेबसाइट्स पर सबसे ज्यादा भरोसा करते हैं।
डिजिटल प्लेटफॉर्म और मौसम की सटीक जानकारी देने वाली वेबसाइट्स पर भी इस दौरान ट्रैफिक कई गुना बढ़ जाता है। लोग सिर्फ तापमान नहीं देखते बल्कि वे यह भी जांचते हैं कि बारिश कितनी देर तक टिकेगी और हवा की रफ्तार क्या होगी। खासकर उन लोगों के लिए यह बहुत जरूरी हो जाता है जो खुले आसमान के नीचे काम करते हैं या जिन्हें रोजाना लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। तकनीक ने अब हमारे हाथ में यह ताकत दे दी है कि हम अगले चौबीस घंटे का हाल पहले से जान सकें। लेकिन इसके साथ ही यह चिंता भी बढ़ गई है कि मौसम का यह बदलता मिजाज हमारी तैयारियों पर कितना भारी पड़ सकता है।
पश्चिम बंगाल में रेड अलर्ट और प्रशासन की बड़ी तैयारियां
पश्चिम बंगाल में जारी ताजा रेड अलर्ट ने सरकार और आपदा प्रबंधन टीमों को पूरी तरह मुस्तैद कर दिया है। जिन जिलों में अति भारी बारिश की चेतावनी दी गई है वहां निचले इलाकों से पानी निकालने के पंप तैयार रखे जा रहे हैं। स्थानीय प्रशासन लगातार लोगों से अपील कर रहा है कि वे बिना वजह घरों से बाहर न निकलें और सुरक्षित स्थानों पर रहें। मौसम विभाग का कहना है कि यह मानसूनी गतिविधि अचानक तेज हुई है इसलिए अगले दो दिनों तक स्थिति पर कड़ी नजर रखनी होगी। मछुआरों को भी समंदर में न जाने की सख्त सलाह दी गई है क्योंकि हवा का रुख काफी खतरनाक हो सकता है।
मैदान से लेकर शहरों तक जलभराव की आशंका से निपटने के लिए नगर निगम की टीमें तैनात कर दी गई हैं। पिछली घटनाओं से सबक लेते हुए प्रशासन इस बार किसी भी तरह की लापरवाही बरतना नहीं चाहता है। ट्रैफिक पुलिस को भी ऐसे रास्तों की पहचान करने को कहा गया है जहां पानी भरने से जाम लग सकता है। आम जनता भी अपनी तरफ से पूरी सावधानी बरत रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति से बचा जा सके। लोग अपने दफ्तर के काम और बच्चों की पढ़ाई को ऑनलाइन या वैकल्पिक तरीकों से मैनेज करने की तैयारी कर रहे हैं।
कल के मौसम पर टिकी है पूरे देश की नजर
मौसम के इस मौजूदा दौर ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि प्रकृति के आगे इंसानी योजनाएं कितनी छोटी पड़ जाती हैं। जब कोलकाता से लेकर देश के दूसरे हिस्सों तक लोग रात में मौसम खोजते हैं तो यह उनकी अनिश्चितता के डर को दिखाता है। जलवायु में आ रहे तेजी से बदलावों के कारण अब कल का मौसम अनुमान लगाना पहले जितना आसान नहीं रहा है। हर नया दिन एक नई चुनौती लेकर आता है और लोग डिजिटल माध्यमों से उसका मुकाबला करने की कोशिश करते हैं। द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल यही बताती है कि सतर्कता ही वह एकमात्र ढाल है जो हमें सुरक्षित रख सकती है।




