नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — अमेरिकी शेयर बाजार में भारतीय आईटी कंपनियों के एडीआर (अमेरिकन डिपॉजिटरी रिसीट्स) इन दिनों बड़ी हलचल का केंद्र बने हुए हैं। पिछले चौबीस घंटों के दौरान बाजार के आंकड़ों में इन्फोसिस और विप्रो के एडीआर कभी ऊपर तो कभी नीचे लुढ़कते नजर आए हैं। अमेरिकी बाजार के इन उतार-चढ़ावों का सीधा असर भारत के शेयर बाजार पर भी पड़ रहा है। निवेशकों के मन में यह बड़ा सवाल बना हुआ है कि वैश्विक स्तर पर आईटी सेक्टर की चाल आने वाले दिनों में कैसी रहने वाली है। बाजार विश्लेषक इस पूरी स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं ताकि छोटे और बड़े निवेशकों को सही दिशा मिल सके।
बाजार के जानकारों का कहना है कि दुनिया भर की बड़ी तकनीकी कंपनियों के शेयरों में इन दिनों मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है। हाल ही में एक्सेंचर जैसी दिग्गज विदेशी आईटी कंपनी के शेयरों में एक दिन की बहुत बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी जिसका असर भारतीय आईटी कंपनियों पर भी पड़ा। इसके अलावा देश की दूसरी सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर निर्यातक कंपनी इन्फोसिस के तिमाही नतीजे हाल ही में सामने आए हैं। कंपनी का मुनाफा बारह प्रतिशत तक उछला है और नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी की घोषणा भी की गई है। इसके बावजूद वैश्विक बाजार में अनिश्चितता के कारण निवेशकों में थोड़ा असमंजस का माहौल बना हुआ है।
विप्रो और इन्फोसिस के एडीआर क्यों टूटे
अमेरिकी स्टॉक एक्सचेंज में कारोबार के दौरान विप्रो और इन्फोसिस के एडीआर में अचानक से बड़ी गिरावट दर्ज की गई। जानकारों के अनुसार वैश्विक बाजार में मांग घटने की आशंका और विदेशी निवेशकों की बिकवाली इसके मुख्य कारण माने जा रहे हैं। जब अमेरिका की बड़ी कंपनियां अपने खर्च में कटौती करती हैं, तो उसका सीधा असर भारत की इन दिग्गज आईटी कंपनियों के विदेशी ठेकों पर पड़ता है। हालांकि, कुछ ब्रोकरेज फर्म्स का यह भी मानना है कि यह गिरावट सिर्फ अल्पकालिक है और मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों को इससे घबराने की जरूरत नहीं है। अनिल सिंघवी जैसे बाजार के दिग्गज विशेषज्ञों ने भी निवेशकों को सलाह दी है कि वे घबराकर अपने शेयर न बेचें बल्कि बाजार के अगले बड़े ब्रेकआउट का इंतजार करें।
एक तरफ जहां एडीआर में गिरावट की खबरें निवेशकों को डरा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ एचडीएफसी बैंक समेत देश के बड़े बैंकों में नए नेतृत्व की नियुक्ति ने बाजार को कुछ हद तक सहारा भी दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय बाजार की घरेलू ताकत मजबूत है, जिससे विदेशी बाजारों के झटकों को झेलने में मदद मिल रही है। हालांकि, तकनीकी शेयरों में निवेश करने वाले लोगों को अभी कुछ और दिन बाजार के रुख का इंतजार करना चाहिए। हर छोटी खबर पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय लंबी अवधि के नजरिए से निवेश करना ही इस समय सबसे समझदारी भरा कदम माना जा रहा है।
तिमाही नतीजे और नया नेतृत्व संभालेंगे कमान
इन्फोसिस के हालिया वित्तीय परिणामों ने बाजार को एक नई दिशा देने का काम किया है। कंपनी ने अपने तिमाही मुनाफे में अच्छी खासी बढ़त दर्ज की है, जो इस बात का सबूत है कि कठिन वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारतीय कंपनियां मुनाफा कमाने में कामयाब हो रही हैं। इसके साथ ही कंपनी के शीर्ष प्रबंधन में बदलाव की प्रक्रिया भी चल रही है। नए सीईओ के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वे अमेरिकी और यूरोपीय बाजारों से नए प्रोजेक्ट्स लेकर आएं और कंपनी की रफ्तार को कम न होने दें। बाजार के जानकार इन बदलावों को बहुत सकारात्मक मान रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि आने वाले महीनों में आईटी शेयरों में फिर से तेजी लौट सकती है।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि छोटे निवेशकों को इस उतार-चढ़ाव भरे दौर में किसी भी अफवाह पर ध्यान नहीं देना चाहिए। बाजार में जब भी विदेशी शेयरों या एडीआर में बड़ी हलचल होती है, तो ब्रोकरेज हाउस और टीवी चैनलों पर तरह-तरह की भविष्यवाणियां शुरू हो जाती हैं। ऐसे समय में अपने वित्तीय सलाहकार की बात सुनना और कंपनी के बुनियादी आंकड़ों को देखकर ही फैसला लेना सबसे बेहतर होता है। आने वाले हफ्तों में यह साफ हो जाएगा कि अमेरिकी बाजार का यह दबाव अस्थायी था या फिर भारतीय आईटी सेक्टर को किसी लंबी मंदी का सामना करना पड़ेगा।
बाजार विशेषज्ञों की निवेशकों को सलाह
शेयर बाजार के जानकारों ने साफ कहा है कि निवेशकों को हर गिरावट पर बेचने के बजाय गुणवत्ता वाले शेयरों को अपने पोर्टफोलियो में बनाए रखना चाहिए। विप्रो और इन्फोसिस जैसी कंपनियां दशकों पुरानी हैं और इनके पास बड़े ग्राहकों का मजबूत आधार है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में भले ही कुछ समय के लिए सुस्ती छाई हो, लेकिन डिजिटल तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में काम लगातार बढ़ रहा है। इसलिए आने वाले समय में इन कंपनियों के कारोबार में फिर से जोरदार तेजी आने की पूरी संभावना बनी हुई है।





