नई दिल्ली/बेंगलुरु — गूगल ट्रेंड्स के आंकड़ों के अनुसार आज भारत में अचानक 'नॉकरी' शब्द को लेकर खोज में तेजी आई है। यह कन्नड़ भाषा का शब्द है जिसका सीधा अर्थ रोजगार या नौकरी होता है। देश के दक्षिणी हिस्से खासकर कर्नाटक में लोग इंटरनेट पर इस शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस अचानक आए उछाल ने विशेषज्ञों का ध्यान खींचा है। लोग यह जानना चाहते हैं कि बाजार में नए रोजगार के अवसर कहां उपलब्ध हैं।
इस ट्रेंड के पीछे मुख्य वजह हाल ही में आई कुछ सरकारी और प्राइवेट नौकरियों की घोषणाएं हैं। कर्नाटक राज्य सरकार ने कई विभागों में नई भर्तियों के लिए आवेदन मांगे हैं। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर युवाओं में कौशल विकास और रोजगार मेलों को लेकर भी उत्सुकता बढ़ी है। इंटरनेट पर क्षेत्रीय भाषा में जानकारी खोजने का चलन तेजी से फैल रहा है। अब लोग अंग्रेजी के बजाय अपनी स्थानीय भाषा में सर्च करना ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
कन्नड़ भाषा में रोजगार की तलाश क्यों तेज हुई?
भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों में इंटरनेट का इस्तेमाल बहुत तेजी से बढ़ा है। ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों के युवा अब हर जानकारी अपने मोबाइल फोन पर चाहते हैं। सरकारी योजनाओं और नौकरियों के फॉर्म भरने के लिए वे स्थानीय भाषा के पोर्टल्स का रुख कर रहे हैं। 'नॉकरी' जैसे शब्दों की खोज यह बताती है कि डिजिटल साक्षरता अब क्षेत्रीय भाषाओं तक पहुंच चुकी है। यह बदलाव उन युवाओं के लिए बहुत मददगार साबित हो रहा है जो अंग्रेजी में कमजोर हैं।
स्थानीय नौकरी पोर्टल और रोजगार एक्सचेंज भी अब कन्नड़ भाषा में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। कंपनियों ने भी समझ लिया है कि स्थानीय युवाओं तक पहुंचने का सबसे अच्छा जरिया उनकी अपनी भाषा है। बैंक, बीमा कंपनियां और तकनीकी क्षेत्र के संस्थान अब क्षेत्रीय भाषा जानने वाले युवाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं। यही वजह है कि रोजगार से जुड़ी हर खबर को स्थानीय भाषा में पढ़ा और खोजा जा रहा है।
युवाओं के लिए सरकारी और प्राइवेट सेक्टर में क्या मौके हैं?
कर्नाटक में इन दिनों पुलिस, शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग में बंपर भर्तियां निकल रही हैं। इन पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन कर दी गई है। ऑनलाइन आवेदन करने के नियम और शर्तें समझने के लिए युवा इंटरनेट का सहारा ले रहे हैं। सोशल मीडिया और यूट्यूब पर भी कन्नड़ में नौकरी की जानकारी देने वाले वीडियो बहुत देखे जा रहे हैं। इससे लोगों को फॉर्म भरने में आसानी हो रही है और वे किसी भी ठगी से बच रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में क्षेत्रीय भाषाओं में इंटरनेट ट्रैफिक और ज्यादा बढ़ेगा। गूगल और अन्य तकनीकी कंपनियां भी भारतीय भाषाओं के सर्च परिणामों को बेहतर बनाने पर काम कर रही हैं। नौकरीपेशा और बेरोजगार युवाओं के बीच यह डिजिटल क्रांति सकारात्मक बदलाव ला रही है। आने वाले महीनों में रोजगार के नए पोर्टल आने की भी पूरी संभावना है जो सिर्फ क्षेत्रीय भाषाओं में काम करेंगे।
नौकरी तलाशने वाले युवाओं को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि ऑनलाइन नौकरी तलाशते वक्त सावधानी बहुत जरूरी है। कई फर्जी वेबसाइट्स युवाओं को नौकरी दिलाने के नाम पर ठगने की कोशिश करती हैं। इसलिए किसी भी आधिकारिक पोर्टल पर जाने से पहले उसकी पूरी जांच जरूर कर लें। सरकारी नौकरियों के लिए हमेशा आधिकारिक वेबसाइट्स का ही इस्तेमाल करें। किसी भी अनजान व्यक्ति को पैसे न दें जो नौकरी दिलाने का वादा करता हो। सतर्क रहकर ही युवा डिजिटल माध्यमों का सही फायदा उठा सकते हैं।



