नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — आज के डिजिटल दौर में स्मार्टफोन हमारे जीवन का एक जरूरी हिस्सा बन चुके हैं। बच्चे भी पढ़ाई और खेलकूद के नाम पर घंटों फोन से चिपके रहते हैं। इस बीच दक्षिण कोरिया से एक बड़ी खबर सामने आई है। वहां की सरकार और संबंधित एजेंसियां इस बात पर विचार कर रही हैं कि क्या नाबालिग बच्चों को केवल सादे और सीमित फीचर्स वाले स्मार्टफोन दिए जाएं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य बच्चों को सोशल मीडिया की लत और ऑनलाइन खतरों से बचाना है।
दक्षिण कोरियाई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बच्चों में स्क्रीन टाइम बहुत तेजी से बढ़ रहा है। इसके कारण उनकी पढ़ाई और मानसिक सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है। इस समस्या से निपटने के लिए अब बिना फालतू एप्स और सोशल मीडिया एक्सेस वाले फोन लाने की योजना बनाई जा रही है। इन फोनों में केवल कॉल, मैसेज और जरूरी पढ़ाई से जुड़ी चीजें ही चल सकेंगी। यह नियम आने वाले समय में बच्चों के डिजिटल इस्तेमाल की तस्वीर पूरी तरह बदल सकता है।
भारत के बाजार में नए बजट फोन की एंट्री
एक तरफ जहां विदेशों में फोन के इस्तेमाल को सीमित करने की बात चल रही है, वहीं दूसरी तरफ भारतीय बाजार में सस्ते और दमदार फोन लॉन्च हो रहे हैं। आने वाली दो सितंबर को रेडमी अपना नया स्मार्टफोन बाजार में उतारने जा रहा है। इस फोन में पांच हजार एमएएच की बड़ी बैटरी दी जा रही है। कम कीमत और लंबी बैटरी लाइफ वाले इन फोनों की भारत में बहुत मांग है। आम लोग और खासकर छात्र ऐसे फोन आसानी से खरीद पाते हैं।
लेकिन फोन सस्ता होने के साथ-साथ इसका सही इस्तेमाल भी एक बड़ा सवाल बनता जा रहा है। भारत के शहरी और ग्रामीण इलाकों में छोटे बच्चों के हाथ में भी अब महंगे स्मार्टफोन आसानी से दिख जाते हैं। दक्षिण कोरिया की तरह क्या भारत में भी बच्चों के लिए ऐसे किसी कदम की जरूरत है? यह सवाल अब अभिभावकों और शिक्षाविदों के बीच चर्चा का विषय बनता जा रहा है। बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम को लेकर माता-पिता अब चिंता जताने लगे हैं।
चुनाव और दूसरी बड़ी खबरों की हलचल
स्मार्टफोन और तकनीक की इन खबरों के बीच देश के दूसरे हिस्सों में राजनीतिक सरगर्मी भी चरम पर है। केरल, असम और पुडुचेरी जैसे राज्यों में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। राजनीतिक दल अपनी रैलियों और डिजिटल प्रचार के जरिए मतदाताओं तक पहुंच रहे हैं। इन अभियानों में भी स्मार्टफोन और सोशल मीडिया का सबसे बड़ा इस्तेमाल हो रहा है। नेता जनता से जुड़ने के लिए इन्हीं स्मार्टफोन्स का सहारा ले रहे हैं।
दूसरी ओर, मनोरंजन जगत से भी लगातार अपडेट आ रहे हैं। अभिनेत्री रकुलप्रीत सिंह की नई तस्वीरें और फैशन स्टाइल सोशल मीडिया पर चर्चा में बने हुए हैं। लोग इन तस्वीरों को स्मार्टफोन पर ही लाइक और शेयर कर रहे हैं। यानी हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हर कोना अब तकनीक और स्मार्टफोन से जुड़ चुका है। चाहे चुनाव हो, मनोरंजन हो या बच्चों की पढ़ाई, सब कुछ फोन की एक स्क्रीन पर सिमट गया है।
बच्चों की डिजिटल सुरक्षा पर अभिभावकों की राय
द फ्रीलान्स की टीम ने जब इस मामले पर कुछ अभिभावकों से बात की, तो मिलीजुली प्रतिक्रिया सामने आई। कई माता-पिता का कहना है कि आज के समय में ऑनलाइन पढ़ाई के लिए स्मार्टफोन बहुत जरूरी है। लेकिन इसके साथ ही उस पर नजर रखना भी उतना ही जरूरी है। यदि बच्चों को सादे फोन दिए जाएं, तो शायद वे पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान दे पाएंगे। हालांकि कुछ लोगों का यह भी मानना है कि तकनीक से पूरी तरह दूरी बनाना अब संभव नहीं है।
कुल मिलाकर, स्मार्टफोन आज हमारी जरूरत भी है और एक बड़ी चुनौती भी। दक्षिण कोरिया का यह नया कदम आने वाले दिनों में पूरी दुनिया का ध्यान खींच सकता है। भारत जैसे बड़े बाजार में जहां एक तरफ सस्ते फोन लॉन्च हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ डिजिटल अनुशासन पर भी बहस छिड़ गई है। द फ्रीलान्स इस पूरी स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखेगा और आपको जमीनी हकीकत से रूबरू कराता रहेगा।









