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एच.डी. कुमारस्वामी और डी.के. शिवकुमार के बीच NICE प्रोजेक्ट और केपीएससी विवाद पर तीखा राजनीतिक घमासान

केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार पर NICE प्रोजेक्ट को बेनामी फर्मों के जरिए हथियाने का गंभीर आरोप लगाया है। साथ ही केपीएससी टिप्पणी पर उन्हें आड़े हाथों लिया, जबकि दूसरी ओर उन्होंने ईवी वाहनों का टेस्ट ड्राइव भी लिया।
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टेक एवं ऑटोमोबाइल डेस्क, द फ्रीलांस
तकनीक व ऑटोमोबाइल डेस्क•29 सितंबर 2026 • अपडेटेड•35
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एच.डी. कुमारस्वामी और डी.के. शिवकुमार के बीच NICE प्रोजेक्ट और केपीएससी विवाद पर तीखा राजनीतिक घमासान
📷 एच.डी. कुमारस्वामी और डी.के. शिवकुमार के बीच NICE प्रोजेक्ट और केपीएससी विवाद पर तीखा राजनीतिक घमासान — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार पर NICE प्रोजेक्ट को बेनामी फर्मों के जरिए हथियाने का गंभीर आरोप लगाया है। साथ ही केपीएससी टिप्पणी पर उन्हें आड़े हाथों लिया, जबकि दूसरी ओर उन्होंने ईवी वाहनों का टेस्ट ड्राइव भी लिया।
  • इस खबर से जुड़े सभी पहलुओं की जांच और निगरानी संबंधित विभागों द्वारा की जा रही है।
  • विशेषज्ञों के अनुसार इस घटनाक्रम का आम जनता पर सीधा असर पड़ सकता है।

बेंगलुरु और दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी की सक्रियता चरम पर है। एक तरफ जहां वे नीतिगत मामलों और ऑटोमोबाइल सेक्टर के भविष्य यानी इलेक्ट्रिक वाहनों की तकनीकी बारीकियों को परख रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कर्नाटक की राजनीति में वे कांग्रेस सरकार, विशेषकर उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार पर लगातार आक्रामक तेवर अपनाए हुए हैं। 'द फ्रीलान्स' की ऑन-द-ग्राउंड पड़ताल में यह साफ उभरकर आया है कि कर्नाटक की सियासत में एक नया भूचाल आने वाला है।

NICE प्रोजेक्ट और किसानों के मुआवजे का मुद्दा

कर्नाटक की राजनीति का सबसे बड़ा सुलगता मुद्दा एक बार फिर 'नंदी इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर एंटरप्राइजेज' (NICE) प्रोजेक्ट बन गया है। केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने डी.के. शिवकुमार पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि उपमुख्यमंत्री इस प्रोजेक्ट को बेनामी फर्मों के माध्यम से 'हाइजैक' करने की फिराक में हैं। कुमारस्वामी ने पूरी आक्रामकता के साथ चुनौती दी है कि वे इसके पुख्ता सबूत जनता के सामने लाएंगे। उनका मुख्य दर्द उन किसानों का है जिनकी जमीनें इस प्रोजेक्ट के लिए अधिग्रहित की गई थीं, लेकिन दशकों बीत जाने के बाद भी उन्हें उचित मुआवजा नहीं मिल पाया है।

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अनधिकृत टोल वसूली और BMICP को टेकओवर करने की मांग

द फ्रीलान्स की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, कुमारस्वामी ने केवल जुबानी हमला ही नहीं बोला, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर ठोस कदम उठाने की मांग भी की है। उन्होंने डी.के. शिवकुमार को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा है कि NICE द्वारा की जा रही अनधिकृत टोल वसूली को तुरंत रोका जाना चाहिए। इसके साथ ही, उन्होंने बेंगलुरु-मैसूर इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर प्रोजेक्ट (BMICP) को अपने हाथ में लेने (Take Over) की मांग उठाई है, ताकि आम जनता और किसानों को इस कथित लूट से राहत मिल सके।

KPSC टिप्पणी पर भड़के, कहा- 'मूर्खता की पराकाष्ठा'

विवाद सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट तक ही सीमित नहीं है। कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) को लेकर डी.के. शिवकुमार द्वारा की गई एक हालिया टिप्पणी पर एच.डी. कुमारस्वामी आगबबूला हो उठे हैं। कुमारस्वामी ने इस बयान को 'मूर्खता और गैर-जिम्मेदारी की पराकाष्ठा' (Height of foolishness, irresponsibility) करार दिया है। उनका कहना है कि जिम्मेदार पदों पर बैठे नेताओं को प्रशासनिक संस्थाओं की गरिमा का ख्याल रखना चाहिए, न कि राजनीतिक स्वार्थ के लिए उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाने चाहिए।

राजनीतिक तनाव के बीच ईवी वाहनों का टेस्ट ड्राइव

एक तरफ जहां राज्य की राजनीति में भूचाल आया हुआ है, वहीं दूसरी तरफ केंद्रीय मंत्री के रूप में कुमारस्वामी अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारियों को भी निभा रहे हैं। हाल ही में उन्होंने ऑटोमोबाइल सेक्टर में भविष्य की तकनीक का जायजा लेते हुए Tata Harrier.ev और Kia Carens Clavis EV का खुद टेस्ट ड्राइव लिया। इस दौरान उनके साथ तकनीक और वाहन उद्योग से जुड़े कई विशेषज्ञ भी मौजूद रहे, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर भी काफी ट्रेंड कर रहा है।

भविष्य का असर और निष्कर्ष

एच.डी. कुमारस्वामी के इन ताजा तेवरों ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार की नींद उड़ा दी है। NICE प्रोजेक्ट पर सबूतों के साथ खुलासे की उनकी चेतावनी आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति में बड़े भूचाल का संकेत दे रही है। 'द फ्रीलान्स' की इस ग्राउंड इन्वेस्टिगेशन से यह स्पष्ट है कि सत्ता और विपक्ष के बीच का यह संघर्ष राज्य के नीतिगत और प्रशासनिक भविष्य पर गहरा प्रभाव डालने वाला है।

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