होम/टेक & ऑटो/कर्नाटक की राजनीति में उबाल: कुमारस्वामी ने डी.के. शिवकुमार पर बोला हमला, NICE प्रोजेक्ट और EVs पर भी चर्चा
टेक & ऑटोपढ़ने में समय: 3 मिनट

कर्नाटक की राजनीति में उबाल: कुमारस्वामी ने डी.के. शिवकुमार पर बोला हमला, NICE प्रोजेक्ट और EVs पर भी चर्चा

कर्नाटक की राजनीति में केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। कुमारस्वामी ने NICE प्रोजेक्ट में कथित अनियमितताओं को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं दूसरी ओर वे इलेक्ट्रिक वाहनों के टेस्ट ड्राइव को लेकर भी सुर्खियों में हैं।
✍️
टेक एवं ऑटोमोबाइल डेस्क, द फ्रीलांस
तकनीक व ऑटोमोबाइल डेस्क•29 सितंबर 2026 • अपडेटेड•30
🌐Read in English →
शेयर करें:
कर्नाटक की राजनीति में उबाल: कुमारस्वामी ने डी.के. शिवकुमार पर बोला हमला, NICE प्रोजेक्ट और EVs पर भी चर्चा
📷 कर्नाटक की राजनीति में उबाल: कुमारस्वामी ने डी.के. शिवकुमार पर बोला हमला, NICE प्रोजेक्ट और EVs पर भी चर्चा — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • कर्नाटक की राजनीति में केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। कुमारस्वामी ने NICE प्रोजेक्ट में कथित अनियमितताओं को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं दूसरी ओर वे इलेक्ट्रिक वाहनों के टेस्ट ड्राइव को लेकर भी सुर्खियों में हैं।
  • इस खबर से जुड़े सभी पहलुओं की जांच और निगरानी संबंधित विभागों द्वारा की जा रही है।
  • विशेषज्ञों के अनुसार इस घटनाक्रम का आम जनता पर सीधा असर पड़ सकता है।

बेंगलुरु की सुलगती राजनीतिक जमीन पर एक बार फिर बयानों के तीर चलने लगे हैं। द फ्रीलान्स की ऑन-द-ग्राउंड इन्वेस्टिगेशन टीम के पास मौजूद ताजा तथ्यों के मुताबिक, केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने राज्य के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार पर सीधा और तीखा हमला बोला है। एक तरफ जहां प्रशासनिक और भू-राजनीतिक मोर्चे पर जुबानी जंग चरम पर है, वहीं दूसरी ओर कुमारस्वामी की कार्यशैली के अलग-अलग रंग भी इन दिनों चर्चा का विषय बने हुए हैं।

NICE प्रोजेक्ट और किसानों के मुआवजे का मुद्दा

कर्नाटक में नंदी इन्फ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर एंटरप्राइजेज (NICE) प्रोजेक्ट को लेकर विवाद पुराना है, लेकिन केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी ने इसे नए सिरे से हवा दे दी है। कुमारस्वामी ने आरोप लगाया है कि जिन किसानों की जमीन इस प्रोजेक्ट के लिए अधिग्रहित की गई थी, उन्हें आज तक पूरा मुआवजा नहीं मिला है। उन्होंने डी.के. शिवकुमार पर बेनामी फर्मों के जरिए इस प्रोजेक्ट को हथियाने की साजिश रचने का भी आरोप लगाया है। हमारी फील्ड रिपोर्ट के अनुसार, कुमारस्वामी ने चुनौती दी है कि वे इस पूरे घोटाले के पुख्ता सबूत जनता के सामने लाएंगे और सरकार को अवैध टोल कलेक्शन तुरंत बंद करना चाहिए।

संबंधित खबरें

न्याय के बदलते गलियारे: शीर्ष अदालत के नीतिगत दखल से लेकर जमीनी अदालतों की हकीकत तक

न्याय के बदलते गलियारे: शीर्ष अदालत के नीतिगत दखल से लेकर जमीनी अदालतों की हकीकत तक

न्याय के बदलते गलियारे: शीर्ष अदालत के नीतिगत दखल से लेकर जमीनी अदालतों की हकीकत तक

न्याय के बदलते गलियारे: शीर्ष अदालत के नीतिगत दखल से लेकर जमीनी अदालतों की हकीकत तक

न्याय के बदलते गलियारे: शीर्ष अदालत के नीतिगत दखल से लेकर जमीनी अदालतों की हकीकत तक

न्याय के बदलते गलियारे: शीर्ष अदालत के नीतिगत दखल से लेकर जमीनी अदालतों की हकीकत तक

न्याय के बदलते गलियारे: सीबीएसई नीति से लेकर संभल हिंसा और मोबाइल अदालतों तक, न्यायपालिका की चौतरफा गूंज

न्याय के बदलते गलियारे: सीबीएसई नीति से लेकर संभल हिंसा और मोबाइल अदालतों तक, न्यायपालिका की चौतरफा गूंज

न्याय के बदलते आयाम: शीर्ष अदालत से लेकर जमीनी अदालतों तक, क्या बदल रहा है देश का न्यायिक परिदृश्य?

न्याय के बदलते आयाम: शीर्ष अदालत से लेकर जमीनी अदालतों तक, क्या बदल रहा है देश का न्यायिक परिदृश्य?

ओटीटी का बढ़ता शिकंजा: क्या डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने बदल दी भारतीय सिनेमा की परिभाषा?

ओटीटी का बढ़ता शिकंजा: क्या डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने बदल दी भारतीय सिनेमा की परिभाषा?

ओटीटी का बढ़ता शिकंजा: क्या डिजिटल प्लेटफॉर्म्स बदल रहे हैं भारतीय सिनेमा का गणित?

ओटीटी का बढ़ता शिकंजा: क्या डिजिटल प्लेटफॉर्म्स बदल रहे हैं भारतीय सिनेमा का गणित?

ओटीटी का बढ़ता शिकंजा: क्या डिजिटल प्लेटफॉर्म्स बदल रहे हैं भारतीय सिनेमा का गणित?

ओटीटी का बढ़ता शिकंजा: क्या डिजिटल प्लेटफॉर्म्स बदल रहे हैं भारतीय सिनेमा का गणित?

KPSC बयानबाजी पर तीखी प्रतिक्रिया

विवादों का सिलसिला यहीं नहीं थमता। कर्नाटक पब्लिक सर्विस कमीशन (KPSC) से जुड़े एक हालिया बयान को लेकर कुमारस्वामी ने डी.के. शिवकुमार की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इस बयान को 'मूर्खता और गैर-जिम्मेदारी की पराकाष्ठा' करार दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य के इन दो कद्दावर नेताओं के बीच चल रहा यह वाकयुद्ध आने वाले दिनों में और विकराल रूप ले सकता है, जिससे राज्य की प्रशासनिक स्थिरता पर भी असर पड़ सकता है।

राजनीतिक बयानबाजी के बीच EVs का टेस्ट ड्राइव

एक तरफ जहां राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी तेज है, वहीं केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी का एक अलग अंदाज भी देखने को मिला। उन्होंने हाल ही में ऑटोमोबाइल सेक्टर में कदम बढ़ाते हुए Tata Harrier.ev और Kia Carens Clavis EV का खुद टेस्ट ड्राइव लिया। भारी उद्योग मंत्रालय संभालने के नाते इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) के प्रति उनकी यह रुचि और उद्योग जगत को बढ़ावा देने की उनकी यह पहल तकनीकी गलियारों में खासी पसंद की जा रही है। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हुआ है।

भविष्य का राजनीतिक प्रभाव और निष्कर्ष

द फ्रीलान्स के विश्लेषण के अनुसार, एच.डी. कुमारस्वामी और डी.के. शिवकुमार के बीच का यह संघर्ष केवल व्यक्तिगत बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कर्नाटक के सत्ता समीकरणों को गहराई से प्रभावित कर रहा है। एक तरफ जनता से जुड़े जमीनी मुद्दों जैसे किसानों के मुआवजे और अवैध टोल वसूली को उठाकर कुमारस्वामी अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ नीतिगत मामलों (जैसे EV सेक्टर) में सक्रिय रहकर वे एक जिम्मेदार प्रशासक की छवि भी पेश कर रहे हैं। आने वाले हफ्तों में NICE प्रोजेक्ट पर उनके 'सबूतों के खुलासे' पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

द फ्रीलांस पत्रकारिता नीति (Editorial Commitment):हम निष्पक्ष, सटीक और तथ्यात्मक पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह समाचार रिपोर्ट विभिन्न प्रमाणित समाचार एजेंसियों, आधिकारिक बयानों और स्थानीय संवाददाताओं से प्राप्त इनपुट के आधार पर तैयार की गई है।
✍️

टेक एवं ऑटोमोबाइल डेस्क, द फ्रीलांस

सत्यापित संपादकीय डेस्क

गैजेट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा व मोबिलिटी टीम

द फ्रीलांस की टेक और ऑटो डेस्क आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, उपभोक्ता गैजेट्स, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के नए नवाचारों पर प्रामाणिक और उपभोक्ता-केंद्रित रिव्यू व रिपोर्ट्स प्रस्तुत करती है।

संबंधित खबरें (Related Articles)

न्याय के बदलते गलियारे: शीर्ष अदालत के नीतिगत दखल से लेकर जमीनी अदालतों की हकीकत तकTECH-AUTO

न्याय के बदलते गलियारे: शीर्ष अदालत के नीतिगत दखल से लेकर जमीनी अदालतों की हकीकत तक

29 सित॰37
न्याय के बदलते गलियारे: शीर्ष अदालत के नीतिगत दखल से लेकर जमीनी अदालतों की हकीकत तकTECH-AUTO

न्याय के बदलते गलियारे: शीर्ष अदालत के नीतिगत दखल से लेकर जमीनी अदालतों की हकीकत तक

29 सित॰27
न्याय के बदलते गलियारे: शीर्ष अदालत के नीतिगत दखल से लेकर जमीनी अदालतों की हकीकत तकTECH-AUTO

न्याय के बदलते गलियारे: शीर्ष अदालत के नीतिगत दखल से लेकर जमीनी अदालतों की हकीकत तक

29 सित॰30
न्याय के बदलते गलियारे: सीबीएसई नीति से लेकर संभल हिंसा और मोबाइल अदालतों तक, न्यायपालिका की चौतरफा गूंजTECH-AUTO

न्याय के बदलते गलियारे: सीबीएसई नीति से लेकर संभल हिंसा और मोबाइल अदालतों तक, न्यायपालिका की चौतरफा गूंज

29 सित॰24
न्याय के बदलते आयाम: शीर्ष अदालत से लेकर जमीनी अदालतों तक, क्या बदल रहा है देश का न्यायिक परिदृश्य?TECH-AUTO

न्याय के बदलते आयाम: शीर्ष अदालत से लेकर जमीनी अदालतों तक, क्या बदल रहा है देश का न्यायिक परिदृश्य?

29 सित॰33
ओटीटी का बढ़ता शिकंजा: क्या डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने बदल दी भारतीय सिनेमा की परिभाषा?ENTERTAINMENT

ओटीटी का बढ़ता शिकंजा: क्या डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने बदल दी भारतीय सिनेमा की परिभाषा?

29 सित॰44
ओटीटी का बढ़ता शिकंजा: क्या डिजिटल प्लेटफॉर्म्स बदल रहे हैं भारतीय सिनेमा का गणित?TECH-AUTO

ओटीटी का बढ़ता शिकंजा: क्या डिजिटल प्लेटफॉर्म्स बदल रहे हैं भारतीय सिनेमा का गणित?

29 सित॰30
ओटीटी का बढ़ता शिकंजा: क्या डिजिटल प्लेटफॉर्म्स बदल रहे हैं भारतीय सिनेमा का गणित?NATIONAL

ओटीटी का बढ़ता शिकंजा: क्या डिजिटल प्लेटफॉर्म्स बदल रहे हैं भारतीय सिनेमा का गणित?

29 सित॰34