उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में सनसनीखेज वारदात
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने हर किसी को स्तब्ध कर दिया है। यहां एक बुजुर्ग पुजारी की केवल इसलिए गोली मारकर हत्या कर दी गई क्योंकि उनके द्वारा की गई एक भविष्यलवाणी सच साबित नहीं हुई। इस जघन्य अपराध को अंजाम देने वाले कोई और नहीं बल्कि गांव के ही एक पिता और पुत्र थे जिन्होंने योजनाबद्ध तरीके से इस हत्याकांड को अंजाम दिया और फिर कानून की आंखों में धूल झोंकने की नाकाम कोशिश भी की।
घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीमों को तुरंत मैदान में उतारा गया था। शुरुआती जांच में मामला जितना उलझा हुआ नजर आ रहा था, पुलिस की मुस्तैदी और तकनीकी सर्विलांस ने उतनी ही तेजी से उसकी परतों को खोल दिया। जांच के दौरान जो खुलासे सामने आए, उन्होंने पुलिस अधिकारियों को भी हैरान कर दिया कि मामूली सी बात के लिए कोई इतनी बड़ी बेरहमी कैसे दिखा सकता है।
क्या थी पुजारी की वह भविष्यवाणी और विवाद की वजह
पुलिस पूछताछ और आधिकारिक बयानों के मुताबिक, यह पूरा विवाद करीब डेढ़ महीने पहले शुरू हुआ था। भौराकलां थाना क्षेत्र के एक शिव मंदिर में 81 वर्षीय स्वामी देवानंद भारती पुजारी के रूप में सेवा देते थे। इसी दौरान आरोपी जीशान के परिवार में बच्चे का जन्म होने वाला था। परिजनों की पूछताछ पर पुजारी ने भविष्यवाणी की थी कि घर में बेटे का जन्म होगा।
लेकिन जब समय आया तो जीशान की पत्नी ने एक बेटी को जन्म दिया। पुजारी की यह भविष्यवाणी गलत साबित हो गई जिसके बाद आरोपी पिता हाशिम और उसका बेटा जीशान पुजारी से बुरी तरह खुन्नस खाने लगे। उनका मानना था कि पुजारी की वजह से उनकी प्रतिष्ठा धूमिल हुई है या उनकी उम्मीदों पर पानी फिरा है। इसी बात को लेकर मंदिर परिसर में कई बार कहासुनी और विवाद भी हुआ था जो अंततः एक खूनी संघर्ष में बदल गया।
पड़ोसी को फंसाने के लिए रची गई थी शातिर साजिश
इस हत्याकांड को अंजाम देने वाले पिता-पुत्र ने केवल पुजारी को रास्ते से हटाने का काम नहीं किया, बल्कि पुलिस जांच को पूरी तरह भटकाने का भी षड्यंत्र रचा था। पुलिस के अनुसार, इन दोनों आरोपियों की गांव के ही एक अन्य व्यक्ति हरेंद्र के साथ पुरानी रंजिश चल रही थी। हरेंद्र अक्सर शराब के नशे में इन लोगों से उलझता था।
आरोपियों ने सोचा कि यह एक तीर से दो निशाने साधने का बेहतरीन मौका है। उन्होंने किसी तरह एक अन्य पड़ोसी के मोबाइल से हरेंद्र की तस्वीरें हासिल कीं और उन्हें अपने पास रख लिया। 13 अक्टूबर की रात जब उन्होंने मंदिर में पुजारी की हत्या की, तो साक्ष्य के रूप में हरेंद्र की तस्वीर वहीं घटनास्थल पर छोड़ आए ताकि पुलिस का शक सीधे उसी पर जाए और वे खुद कानून की गिरफ्त से सुरक्षित बाहर रह सकें।
"पुजारी द्वारा बेटा होने की भविष्यवाणी गलत निकलने पर आरोपियों ने रंजिश पाल ली थी। उन्होंने सुनियोजित तरीके से वारदात को अंजाम दिया और एक ग्रामीण को झूठे मामले में फंसाने के लिए उसकी तस्वीरें मौके पर फेंकी थीं, लेकिन हमने तकनीकी साक्ष्यों से पर्दाफाश कर दिया।" — स्थानीय पुलिस अधिकारी, मुजफ्फरनगर
तकनीकी सर्विलांस और यक्ष ऐप से हुआ पर्दाफाश
हत्या की इस घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई थी। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर कई विशेष टीमों का गठन किया गया था। घटनास्थल पर मिले दस्तावेजों और तस्वीरों के आधार पर जब पुलिस ने अपनी तफ्तीश शुरू की, तो कड़ियां आपस में जुड़ती चली गईं। स्थानीय फोटोग्राफरों की दुकानों से लेकर डिजिटल सर्विलांस तक की मदद ली गई।
पुलिस ने 'यक्ष ऐप' और आधुनिक तकनीकी उपकरणों के जरिए जब साक्ष्यों का संकलन किया, तो पूरी कहानी शीशे की तरह साफ हो गई। यह स्पष्ट हो गया कि घटनास्थल पर मिली हरेंद्र की तस्वीरें किसी और ने नहीं बल्कि खुद जीशान और उसके पिता हाशिम ने वहां पहुंचाई थीं। साक्ष्य पुख्ता होने के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को धर दबोचा।
पुलिस की गिरफ्त में आरोपी, बरामद हुए हथियार
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी हाशिम और उसके बेटे जीशान को गिरफ्तार कर लिया है। उनकी निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल किए गए दो अवैध तमंचे, कारतूस और वारदात के समय उपयोग की गई मोटरसाइकिल भी बरामद कर ली गई है। पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है।
इस पूरी घटना ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि अंधी मान्यताओं और अंधविश्वास के चक्कर में लोग किस हद तक गिर सकते हैं। समाज में इस तरह की घटनाएं न्याय व्यवस्था और मानवीय संवेदनाओं दोनों के लिए एक गंभीर चुनौती पेश करती हैं, जहां एक छोटी सी गलतफहमी ने एक बुजुर्ग साधु की जान ले ली।









