नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश के सबसे बड़े ऑनलाइन स्टॉक ब्रोकर जीरोधा के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी नितिन कामथ इन दिनों लगातार चर्चा में हैं। उन्होंने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक ऐसा आंकड़ा साझा किया है जिसे जानकर हर कोई हैरान रह गया है। उनके मुताबिक, भारत के शेयर बाजार में अब निवेश करने वालों की उम्र लगातार कम हो रही है। इस कड़ी में जीरोधा के प्लेटफॉर्म पर एक ऐसा नया रिकॉर्ड बना है जहां महज 28 दिन के एक छोटे बच्चे के नाम पर शेयर बाजार में निवेश की शुरुआत कर दी गई है। यह बच्चा अब देश का सबसे कम उम्र का निवेशक बन गया है जिसके डीमैट खाते में म्यूचुअल फंड, स्टॉक और सरकारी बॉन्ड शामिल हैं।
नितिन कामथ ने अपने इस पोस्ट के जरिए यह भी समझाया है कि आज के समय में देश के भीतर वित्तीय साक्षरता कितनी तेजी से बढ़ रही है। मां-बाप अब अपने बच्चों के भविष्य को लेकर बहुत ज्यादा जागरूक हो चुके हैं। वे बच्चों के पैदा होते ही उनके नाम पर लंबी अवधि के निवेश शुरू कर रहे हैं ताकि आगे चलकर पढ़ाई या करियर के समय पैसों की कोई कमी न पड़े। हालांकि, इतने कम उम्र में बच्चे के नाम पर खाता खोलना और निवेश करना कोई बहुत जटिल काम नहीं है। तकनीकी रूप से इसे बेहद आसान बना दिया गया है जहां कुछ ही चरणों में अभिभावक अपने नवजात शिशु का खाता खुलवा सकते हैं और म्यूचुअल फंड या स्टॉक खरीद सकते हैं।
सिर्फ पांच आसान चरणों में खुल जाता है बच्चों का डिमैट खाता
बाजार के जानकारों का कहना है कि अब नियमों और प्रक्रियाओं को बहुत सरल कर दिया गया है। आम नागरिक भी अपने घर के छोटे बच्चों के नाम पर आसानी से निवेश कर सकते हैं। इसके लिए कुछ बेहद आसान चरणों का पालन करना होता है। सबसे पहले अभिभावक को किसी भी पंजीकृत ब्रोकर के पास बच्चे के नाम पर माइनर डीमैट अकाउंट के लिए आवेदन करना होता है। इसके बाद बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र, पैन कार्ड और माता-पिता में से किसी एक के केवाईसी दस्तावेजों की जरूरत पड़ती है। बैंक खाते को इस डीमैट खाते से जोड़ा जाता है ताकि निवेश की जाने वाली रकम आसानी से ट्रांसफर की जा सके। यह पूरी प्रक्रिया अब डिजिटल हो चुकी है जिससे घर बैठे ही कुछ ही मिनटों में खाता सक्रिय हो जाता है।
बच्चों के नाम पर निवेश करने का मुख्य फायदा यह होता है कि समय के साथ चक्रवृधि ब्याज का पूरा लाभ मिलता है। जब बच्चा बड़ा होता है तब तक उसका निवेश कई गुना बढ़ चुका होता है। नितिन कामथ ने अपने संदेश में इसी बात पर जोर दिया है कि वित्तीय अनुशासन की शुरुआत जितनी जल्दी हो, उतना ही बेहतर परिणाम मिलता है। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने बाजार और वित्तीय तंत्र के सामने आ रही कुछ बड़ी दिक्कतों पर भी खुलकर बात की है। उनका मानना है कि वित्तीय क्षेत्र में आ रहे नए बदलावों और नियमों से कंपनियों और निवेशकों दोनों पर असर पड़ सकता है जिस पर समय रहते ध्यान देना बहुत जरूरी है।
यूपीआई और बीमा क्षेत्र के नए नियमों पर जताई चिंता
अपने हालिया बयानों और पोस्ट के कारण नितिन कामथ केवल निवेश के रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने नीतिगत मामलों पर भी अपनी बेबाक राय रखी है। उन्होंने हाल ही में यूपीआई एमडीआर यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट को लेकर एक बड़ी खामी की ओर इशारा किया है। उनका कहना है कि डिजिटल भुगतान के इन मामलों में सही व्यवस्था न होने से ब्रोकरेज हाउस और फिनटेक कंपनियों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। जब तक सरकार और नियामक संस्थाएं इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठातीं, तब तक कंपनियों का मुनाफा और कामकाज प्रभावित होता रहेगा।
इसके अलावा, बीमा नियामक संस्था इरडाई यानी आईआरडीएआई के हालिया प्रस्तावों पर भी उन्होंने गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका मानना है कि बीमा क्षेत्र से जुड़े नियमों में अगर थोड़ा भी बदलाव किया गया तो पूरा गणित बदल सकता है। ब्रोकरेज और वित्तीय सलाहकार कंपनियों के लिए यह स्थिति थोड़ी डरावनी हो सकती है क्योंकि इससे उनके पुराने कारोबार करने के तरीके पर सीधा असर पड़ेगा। कामथ ने चेतावनी दी है कि नीतिगत बदलावों को लागू करने से पहले सभी पक्षों की बात सुनना और समझना बेहद जरूरी है ताकि बाजार में किसी भी तरह की अफरा-तफरी का माहौल न बने।
दीर्घकालिक निवेश और निवेशकों के लिए जरूरी सीख
नितिन कामथ की इन तमाम बातों से यह साफ हो जाता है कि भारतीय शेयर बाजार और वित्तीय तंत्र एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। एक तरफ जहां तकनीक के सहारे 28 दिन के बच्चे तक के लिए निवेश के रास्ते खुल गए हैं, वहीं दूसरी तरफ नियम और कानून बनाने वाली संस्थाओं के साथ कंपनियों की खींचतान भी जारी है। आम निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि बाजार में निवेश करते समय हमेशा लंबी अवधि का नजरिया रखें और किसी भी नए नियम की पूरी जानकारी जरूर हासिल करें। द फ्रीलान्स की इस ग्राउंड पड़ताल से यह स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में वित्तीय बाजार में तकनीक और नीतियों के बीच का यह तालमेल और ज्यादा दिलचस्प होने वाला है।




