मॉस्को और जिनेवा से आ रही ताजा अंतरराष्ट्रीय खबरों ने एक बार फिर पूरी दुनिया की सांसे थाम दी हैं। रूस की एक अति संवेदनशील प्रयोगशाला से खतरनाक बैक्टीरिया के लीक होने की आशंका जताई जा रही है। इस खबर के सामने आते ही विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ के कान खड़े हो गए हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह लीक सच है, तो इसका असर केवल रूस तक सीमित नहीं रहेगा। पूरी दुनिया पर एक नए और अज्ञात जैविक संकट का खतरा मंडराने लगा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मामले की सच्चाई जानने के लिए उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज हो गई है।
इस बीच अमेरिकी राजनीति के गलियारों से भी बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और आगामी चुनाव के प्रमुख चेहरे डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि वे इस मामले की गंभीरता को देखते हुए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से सीधे फोन पर बात करेंगे। अमेरिका और रूस के बीच पहले से ही कूटनीतिक तनाव चल रहा है। ऐसे समय में इस जैविक लीक की घटना ने दोनों देशों के बीच तनाव को और अधिक बढ़ा दिया है। व्हाइट हाउस और पेंटागन के अधिकारी भी इस पूरी स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।
रूस में किस प्रयोगशाला से हुआ बैक्टीरिया लीक?
शुरुआती मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह संदिग्ध लीक रूस के एक गुप्त रिसर्च सेंटर से जुड़ा हुआ है। इस लैब में कई तरह के खतरनाक रोगाणुओं और जीवाणुओं पर शोध किया जाता रहा है। स्थानीय सुरक्षा अधिकारियों ने अभी तक किसी भी बड़े नुकसान से इनकार किया है। लेकिन अचानक से सुरक्षा स्तर बढ़ाए जाने से संदेह गहराता जा रहा है। रूस के प्रशासनिक हलकों में इस खबर के बाहर आने के बाद से खामोशी छाई हुई है। किसी भी आधिकारिक प्रवक्ता ने अभी तक इस पर खुलकर बयान नहीं दिया है। इससे अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की चिंताएं और अधिक बढ़ गई हैं।
डब्लूएचओ के वरिष्ठ अधिकारियों ने एक आपातकालीन बैठक बुलाई है। इस बैठक में रूस से इस लीक के संबंध में आधिकारिक डेटा मांगा गया है। जिनेवा स्थित मुख्यालय से एक विज्ञप्ति जारी कर कहा गया है कि वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। यदि रूस इस मामले में पारदर्शी रवैया नहीं अपनाता है, तो उस पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध भी लग सकते हैं। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि इस तरह के बैक्टीरिया यदि खुले माहौल में फैल गए, तो महामारी का रूप ले सकते हैं। दुनिया अभी तक कोरोना के साए से पूरी तरह बाहर नहीं आई है और यह नया संकट डराने वाला है।
ट्रंप और पुतिन की बातचीत के क्या होंगे मायने?
डोनाल्ड ट्रंप का यह कदम अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक नया मोड़ ला सकता है। ट्रंप हमेशा से रूस के साथ सीधे संवाद के पक्षधर रहे हैं। इस संकट की घड़ी में उनकी पुतिन से बातचीत का असर अमेरिकी विदेश नीति पर भी पड़ सकता है। क्या ट्रंप इस बातचीत के जरिए रूस पर दबाव बना पाएंगे? या फिर यह केवल कूटनीतिक औपचारिकता बनकर रह जाएगी? दुनिया भर के राजनीतिक विश्लेषक इस संभावित फोन कॉल पर अपनी नजर टिकाए हुए हैं। अमेरिकी खुफिया एजेंसियां भी ट्रंप को इस बातचीत से पहले पूरी ब्रीफिंग देने की तैयारी कर रही हैं।
दूसरी तरफ, अन्य राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी दुनिया भर में हलचल तेज है। एक तरफ जहां रूस में जैविक संकट मंडरा रहा है, वहीं तकनीक की दुनिया में भारत ने भी बड़ी छलांग लगाई है। दिल्ली में आज से इंडिया मोबाइल कांग्रेस की शुरुआत हो रही है, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6जी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई पर बड़ा विजन देश के सामने रखेंगे। इसके अलावा मनोरंजन जगत में कृति सेनन के राखी एड विवाद और खेल के मैदान में भारत-वेस्टइंडीज टी-20 मैच के दौरान ईशान किशन के कैच को लेकर उठे बखेड़े की भी चर्चाएं जोरों पर हैं। लेकिन इन सब के बीच रूस का बैक्टीरिया लीक सबसे बड़ा और गंभीर मुद्दा बना हुआ है।
द फ्रीलान्स की अंतिम ग्राउंड पड़ताल और आगे की राह
द फ्रीलान्स की टीम लगातार जिनेवा और मास्को के सूत्रों से संपर्क साधे हुए है। हमारी शुरुआती पड़ताल बताती है कि आने वाले 24 घंटों में इस मामले पर कोई बड़ा अंतरराष्ट्रीय फैसला आ सकता है। यदि यह बैक्टीरिया वास्तव में लीक हुआ है, तो इसके प्रसार को रोकने के लिए तुरंत अंतरराष्ट्रीय टीमों को रूस भेजना होगा। शीत युद्ध के बाद यह पहला मौका है जब जैविक सुरक्षा को लेकर अमेरिका और रूस आमने-सामने आ सकते हैं। आम जनता को यह समझना होगा कि इस तरह की खबरें केवल राजनीतिक खेल नहीं हैं, बल्कि यह सीधे तौर पर हमारी और आपकी सेहत से जुड़ी हुई हैं। हम इस खबर के हर एक पहलू पर अपनी नजर बनाए रखेंगे और सबसे पहले आप तक सटीक सच पहुंचाएंगे।





