नई दिल्ली के दलाल स्ट्रीट से हमारी ऑन-द-ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों के लिए आज का दिन बेहद डरावना साबित हुआ। सुबह बाजार खुलते ही बिकवाली का ऐसा दौर शुरू हुआ कि देखते ही देखते प्रमुख सूचकांक धड़ाम हो गए। बंबई शेयर बाजार का सेंसेक्स 1,045 अंकों की भारी गिरावट के साथ 71,593 के स्तर पर बंद हुआ। पिछले नौ हफ्तों से लगातार जारी इस मंदी ने बाजार के छोटे और बड़े सभी निवेशकों की नींद उड़ा दी है। आज के इस अचानक आए भूचाल से सिर्फ तीन घंटे के कारोबार में निवेशकों के करीब आठ लाख करोड़ रुपये पूरी तरह स्वाहा हो गए।
बाजार के जानकारों और दलालों का कहना है कि इस गिरावट का मुख्य कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी है। ईरान और पश्चिम एशिया के हालात बिगड़ने से भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों के लिए चिंताएं बढ़ गई हैं। इसके अलावा विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार पैसा निकाले जाने से घरेलू बाजार का मनोबल टूट चुका है। मेटल, ऑटो, और हेल्थकेयर शेयरों में आज सबसे ज्यादा बिकवाली देखने को मिली। निवेशकों में इस बात का डर है कि अगर यह रुख जारी रहा तो आने वाले दिनों में स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है।
तीन घंटे में आठ लाख करोड़ रुपये का नुकसान
कारोबार की शुरुआत से ही बाजार पर मंदी के बादल छाए हुए थे और कुछ ही घंटों में निवेशकों की पूंजी तेजी से घटने लगी। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण भारी गिरावट के साथ नीचे आ गया। छोटे निवेशकों ने बड़ी संख्या में अपने शेयर बेचने शुरू कर दिए, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। पिछले कई हफ्तों से लगातार गिर रहे बाजार ने अब सारे पिछले रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की अचानक बिकवाली से बाजार का सेंटिमेंट पूरी तरह खराब हो गया है और नया निवेश आने में समय लगेगा।
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा वैश्विक तनाव और महंगाई के आंकड़ों ने निवेशकों के हाथ-पाउं फुला दिए हैं। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी भी विदेशी संस्थागत निवेशकों को भारतीय बाजार से दूर खींच रही है। कारखानों में कच्चे माल की बढ़ती लागत और कंपनियों के मुनाफे पर पड़ने वाले असर ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। यही वजह है कि लोग मुनाफा कमाने के बजाय अपने पैसे बचाने की जुगत में लगे हैं, जिससे बाजार में हर तरफ लाल निशान ही दिखाई दे रहा है।
कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक तनाव का असर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल के दाम आसमान छू रहे हैं जिसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार पर पड़ रहा है। तेल महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ेगा और राजकोषीय घाटा भी प्रभावित होगा। सरकार और रिजर्व बैंक के सामने महंगाई को काबू में रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। निवेशकों को डर है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को भी झटका लगेगा।
जमीनी स्तर पर ब्रोकरेज फर्मों और वित्तीय सलाहकारों के दफ्तरों में निवेशकों की भीड़ जुटी हुई है। लोग अपने पोर्टफोलियो को बचाने के लिए जानकारों से सलाह ले रहे हैं। विशेषज्ञों की आम राय यही है कि इस समय घबराने की जरूरत नहीं है बल्कि लंबी अवधि के दृष्टिकोण से निवेश बनाए रखना चाहिए। हालांकि, छोटे ट्रेडर्स और इंट्रा-डे निवेशकों को इस भारी उतार-चढ़ाव में सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है।
मेटल और ऑटो शेयरों में सबसे बड़ी बिकवाली
आज के कारोबार में सबसे ज्यादा मार मेटल और ऑटोमोबाइल सेक्टर पर पड़ी है। टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयर भारी गिरावट के साथ बंद हुए। वाहन कंपनियों के लिए कच्चे माल की लागत बढ़ने और मांग में सुस्ती की खबरों ने निवेशकों को निराश किया। इसके अलावा बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में भी बिकवाली का दबाव साफ देखा गया, जिससे पूरे बाजार का ढांचा चरमरा गया।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि बाजार के इस भयंकर क्रैश से आम खुदरा निवेशकों का भरोसा डगमगा गया है। कई लोगों ने म्यूचुअल फंड और एसआईपी के जरिए किए गए अपने निवेश के रिटर्न में भारी गिरावट दर्ज की है। जब तक वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल के दाम नीचे नहीं आते, तब तक भारतीय शेयर बाजार में इस तरह की अस्थिरता बने रहने की पूरी आशंका है। निवेशकों को इस कठिन समय में बहुत सोच-समझकर कदम उठाने की सलाह दी जा रही है।






