नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड और खेल बाजार से एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। टीम इंडिया को अब नया जर्सी स्पॉन्सर मिल गया है। मशहूर टायर निर्माता कंपनी अपोलो टायर्स ने इस रेस में बाजी मार ली है। अपोलो टायर्स ने पिछली बार की स्पॉन्सर कंपनी ड्रीम11 को पीछे छोड़ दिया है। यह नया करार साल 2027 तक लागू रहेगा। भारतीय क्रिकेट टीम के आधिकारिक मुकाबलों में अब खिलाड़ियों की जर्सी पर अपोलो टायर्स का नाम चमकता हुआ नजर आएगा। इस सौदे से भारतीय क्रिकेट बोर्ड की तिजोरी में भारी भरकम राशि आएगी।
खेल बाजार के जानकारों का मानना है कि यह डील भारतीय क्रिकेट के कमर्शियल पक्ष को और मजबूत करेगी। पिछले कुछ समय से ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों के विज्ञापनों पर सरकारी नियमों की तलवार लटक रही थी। ऐसे में पारंपरिक मैन्युफैक्चरिंग और ऑटोमोबाइल सेक्टर की कंपनियों का आगे आना क्रिकेट बोर्ड के लिए काफी राहत भरा है। अपोलो टायर्स ने इस स्पॉन्सरशिप को हासिल करने के लिए भारी-भरकम बोली लगाई है। ड्रीम11 की तुलना में यह रकम काफी ज्यादा बताई जा रही है। टीम इंडिया के साथ इस साझेदारी से कंपनी को ग्लोबल स्तर पर अपनी ब्रांड वैल्यू बढ़ाने में बड़ी मदद मिलेगी।
अपोलो टायर्स और बीसीसीआई के बीच हुआ नया करार
खेल मंत्रालय और बाजार के सूत्रों के अनुसार, यह डील अगले तीन सालों के लिए तय की गई है। साल 2027 तक भारतीय टीम जितने भी अंतरराष्ट्रीय मैच खेलेगी, उसकी जर्सी पर इसी नए स्पॉन्सर का लोगो नजर आएगा। जर्सी के मुख्य हिस्से पर ब्रांड का नाम होने से कंपनी को करोड़ों दर्शकों तक सीधी पहुंच मिलेगी। क्रिकेट प्रेमियों के बीच भी इस बदलाव को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। जर्सी का यह नया रूप आगामी सीरीज से मैदान पर दिखाई देगा। बोर्ड के अधिकारियों ने इस डील को भारतीय क्रिकेट के आर्थिक स्वास्थ्य के लिए बहुत सकारात्मक बताया है।
दूसरी ओर, राजनीतिक गलियारों और खेल के मैदान से बाहर भी कई अन्य हलचलें देखने को मिल रही हैं। उत्तर प्रदेश की राजनीति में हाल ही में समाजवादी पार्टी के कुछ विधायकों के पाला बदलने की खबरें सुर्खियों में हैं। हालांकि, खेलप्रेमियों का पूरा ध्यान इस समय क्रिकेट के मैदान पर होने वाले बदलावों और आगामी मुकाबलों पर ही टिका हुआ है। साल 2026 के लिए भारतीय टीम का शेड्यूल भी पूरी तरह तैयार हो चुका है। टीम को इस साल कई बड़े टेस्ट, वनडे और टी-20 मैच खेलने हैं। ऐसे व्यस्त घरेलू और अंतरराष्ट्रीय सत्र के बीच नए स्पॉन्सर का आना टीम के व्यावसायिक प्रबंधन को नई ऊर्जा देगा।
साल 2027 तक भारतीय जर्सी पर दिखेगा नया लोगो
क्रिकेट के जानकारों का यह भी कहना है कि भारतीय क्रिकेट में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। हाल ही में पूर्व और वर्तमान खिलाड़ियों के बीच सर्वकालिक महान क्रिकेटर को लेकर भी दिलचस्प बहसें सामने आई हैं। आर अश्विन जैसे दिग्गज खिलाड़ियों ने सचिन तेंदुलकर और कपिल देव जैसे महान खिलाड़ियों के योगदान पर खुलकर बात की है। इन सबके बीच खेल का आर्थिक ढांचा भी उतनी ही तेजी से बदल रहा है। जर्सी स्पॉन्सरशिप के जरिए मिलने वाला यह पैसा घरेलू क्रिकेट के विकास और खिलाड़ियों की सुविधाओं पर खर्च किया जाता है। अपोलो टायर्स के साथ यह लंबी साझेदारी भारतीय क्रिकेट को वित्तीय रूप से और अधिक स्थिर बनाएगी।

भारत और वेस्टइंडीज क्रिकेट मैचों का पूरा स्कोरकार्ड और इतिहास
पूरी रिपोर्ट पढ़ें→मैदान के बाहर भले ही सोशल मीडिया पर कई तरह की चर्चाएं चल रही हों कि क्रिकेट का क्रेज कम हो रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। विज्ञापनों और स्पॉन्सरशिप के लिए कंपनियों की दीवानगी यह साफ बताती है कि भारतीय क्रिकेट बाजार की ताकत आज भी सबसे ऊपर है। द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है। आने वाले दिनों में बीसीसीआई और अपोलो टायर्स की तरफ से इस साझेदारी को लेकर आधिकारिक और विस्तृत आंकड़े भी सार्वजनिक किए जाएंगे। तब तक क्रिकेट फैंस अपनी पसंदीदा टीम को नई जर्सी में मैदान पर उतरते देखने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
आगामी क्रिकेट मुकाबलों और खेल बाजार पर इसका असर
साल 2026 के आगामी क्रिकेट शेड्यूल को देखें तो भारतीय टीम का व्यस्त कार्यक्रम तय है। विदेशी दौरों से लेकर घरेलू सीरीज तक, हर जगह इस नई जर्सी का प्रचार बड़े पैमाने पर किया जाएगा। कंपनियों के लिए क्रिकेट सबसे बड़ा मंच है जहाँ वे सीधे करोड़ों उपभोक्ताओं तक अपने उत्पाद पहुँचा सकती हैं। अपोलो टायर्स की यह रणनीति निश्चित रूप से उनके कारोबार को बढ़ाने में मददगार साबित होगी। खेल अर्थशास्त्र के जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में अन्य पारंपरिक कंपनियां भी क्रिकेट स्पॉन्सरशिप की दौड़ में बड़ा निवेश कर सकती हैं।





