नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर आने-जाने वाले यात्रियों के लिए जल्द ही एक बहुत बड़ी सुविधा शुरू होने वाली है। हवाई अड्डे के अलग-अलग टर्मिनलों के बीच की दूरी को कम करने और सफर को सुपरफास्ट बनाने के लिए सरकार ने तीन हजार पांच सौ करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट का प्लान तैयार किया है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत एयरपोर्ट के भीतर ही एक अत्याधुनिक ट्रेन चलाई जाएगी जो यात्रियों को एक टर्मिनल से दूसरे टर्मिनल तक बिना किसी जाम और परेशानी के पहुंचाएगी।
वर्तमान में हवाई अड्डे के एक टर्मिनल से दूसरे टर्मिनल जाने के लिए यात्रियों को सड़क मार्ग का इस्तेमाल करना पड़ता है। दिल्ली के भारी ट्रैफिक और लंबी दूरी की वजह से कई बार यात्रियों की फ्लाइट तक छूट जाती है और उन्हें भारी मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है। इस नई ट्रेन सेवा के शुरू होने के बाद टर्मिनल बदलने का पूरा सफर मात्र तेरह मिनट में सिमट जाएगा। इससे न सिर्फ समय की भारी बचत होगी बल्कि हवाई अड्डे के भीतर सड़क वाहनों का दबाव भी काफी हद तक कम हो जाएगा।
साढ़े तीन हजार करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट की खास बातें
इस मेगा इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारने के लिए इंजीनियर्स और तकनीकी विशेषज्ञों की टीमें दिन-रात काम कर रही हैं। योजना के तहत एयरपोर्ट के नीचे लंबी सुरंगों का निर्माण किया जा रहा है ताकि ट्रेन की आवाजाही पूरी तरह सुरक्षित और निर्बाध रह सके। भूमिगत टनल निर्माण का यह काम अपनी तय रफ्तार से आगे बढ़ रहा है और इसमें आधुनिक मशीनों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। निर्माण कार्य के दौरान इस बात का पूरा ध्यान रखा जा रहा है कि हवाई अड्डे के रोजमर्रा के कामकाज और उड़ानों पर किसी भी तरह का असर न पड़े।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के यह आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स आने वाले समय में वैश्विक स्तर पर अपनी एक अलग पहचान बनाएंगे। जिस तरह से देश के अन्य बड़े परिवहन प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है, उससे दुनिया के कई देश भी हैरान हैं। दुबई और अन्य विकसित देशों के आधुनिक एयरपोर्ट्स की तर्ज पर दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट को भी विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। ट्रेन के डिब्बे और पटरियां अत्याधुनिक तकनीक से युक्त होंगी जिनमें यात्रियों के सामान रखने के लिए पर्याप्त जगह और डिजिटल डिस्प्ले की सुविधा मिलेगी।
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यात्रियों को मिलेगा मेट्रो जैसा तेज और सुरक्षित अनुभव
हवाई अड्डे के भीतर चलने वाली इस विशेष ट्रेन का संचालन मेट्रो रेल की तर्ज पर स्वचालित प्रणाली से किया जाएगा। ट्रेन की फ्रीक्वेंसी इतनी शानदार होगी कि यात्रियों को एक ट्रेन छूटने पर दूसरी के लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि हर वर्ग का यात्री बिना किसी डर के इस सेवा का लाभ उठा सके। बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांग यात्रियों के लिए इस ट्रेन में विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं जिससे उन्हें बोर्डिंग गेट तक पहुंचने में कोई शारीरिक दिक्कत न हो।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से दिल्ली एयरपोर्ट की गिनती दुनिया के सबसे सुगम और आधुनिक एयरपोर्ट्स में होने लगेगी। निर्माण कार्यों की गति को देखकर यह उम्मीद जताई जा रही है कि तय समय सीमा के भीतर इस योजना को जमीन पर उतार लिया जाएगा। सरकार और विमानन मंत्रालय इस पूरे प्रोजेक्ट की सीधी निगरानी कर रहे हैं ताकि काम में किसी भी तरह की देरी न हो और देश की राजधानी के इस मुख्य हवाई अड्डे पर यात्रियों को विश्वस्तरीय अनुभव मिल सके।
भविष्य की जरूरत और एयर ट्रैफिक का समाधान
आने वाले वर्षों में हवाई यात्रा करने वाले लोगों की संख्या में भारी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। इसे ध्यान में रखते हुए ही इस 3500 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट की रूपरेखा तैयार की गई है। सड़क मार्ग पर निर्भरता खत्म होने से प्रदूषण का स्तर भी कम होगा और विमान यात्रियों को एक टर्मिनल से दूसरे टर्मिनल जाने का बिल्कुल नया और आरामदायक अनुभव मिलेगा। एयरपोर्ट प्रशासन ने भी इस योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए अपनी कमर कस ली है और सभी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बिठाया जा रहा है।





