रूस के साइबेरियाई इलाके में प्लेग का एक संदिग्ध मामला सामने आने के बाद पूरी दुनिया में हलचल मच गई है। एक महिला की मौत और करीब दो सौ लोगों को एहतियात के तौर पर अलग रखने की खबर ने लोगों की पुरानी डरावनी यादों को ताजा कर दिया है। सोशल मीडिया पर इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि क्या यह संक्रमण एक बार फिर से दुनिया भर में फैल सकता है। लेकिन ज़मीनी हकीकत और डॉक्टरों की रिपोर्ट कुछ और ही कहती है जो राहत देने वाली है।
इस मामले के सामने आते ही अंतरराष्ट्रीय मीडिया में कई तरह की खबरें चलने लगीं। कुछ रिपोर्टों में इसे जैविक हथियारों से जोड़कर देखने की कोशिश की गई तो कुछ ने रूस की गोपनीयता पर सवाल उठाए। क्रेमलिन ने इन सभी मीडिया रिपोर्टों को खारिज करते हुए इन्हें अफवाह बताया है। स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और घबराने की कोई बात नहीं है।
साइबेरिया की घटना और क्वारंटीन का सच
साइबेरिया में जिस महिला की मौत हुई और जिन लोगों को निगरानी में रखा गया, वे सभी एक ही इलाके से जुड़े हुए हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों ने तुरंत कदम उठाते हुए संपर्क में आए सभी लोगों की जांच शुरू कर दी। प्लेग का नाम सुनते ही लोगों के मन में इतिहास की वे भयानक महामारियां आ जाती हैं जिन्होंने लाखों लोगों की जान ली थी। लेकिन आज का दौर और विज्ञान का स्तर उस समय से कोसों आगे निकल चुका है।
विशेषज्ञों के मुताबिक प्लेग फैलने के रास्ते अब बहुत सीमित हो गए हैं क्योंकि हमारे पास साफ-सफाई और स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इस बीमारी के फैलने के लिए चूहों और पिस्सुओं का होना जरूरी होता है जो आज के समय में आसानी से रोके जा सकते हैं। रूस में उठाया गया कदम सिर्फ एहतियात का एक हिस्सा है ताकि संक्रमण आगे बिल्कुल न बढ़ सके।
दुनिया भर में नया प्लेग फैलने की आशंका क्यों कम है?
आज के वैज्ञानिक युग में प्लेग जैसी बीमारी का इलाज बहुत आसान हो गया है। पुरानी सदियों में जब लोगों के पास दवाइयां नहीं थीं तब यह लाइलाज हुआ करती थी। अब आधुनिक एंटीबायोटिक दवाइयां आ चुकी हैं जो इस बैक्टीरिया को बहुत जल्दी खत्म कर देती हैं। अगर किसी व्यक्ति को समय पर सही इलाज मिल जाए तो वह पूरी तरह ठीक हो जाता है। यही सबसे बड़ा कारण है कि इसके वैश्विक स्तर पर फैलने की कोई गुंजाइश नहीं बचती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन और अन्य देशों की स्वास्थ्य एजेंसियां भी इस तरह के मामलों पर कड़ी नजर रखती हैं। जैसे ही किसी देश में ऐसा कोई मामला सामने आता है, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तुरंत अलर्ट जारी कर दिया जाता है। सीमाओं पर जांच और संक्रमित व्यक्ति को तुरंत अलग करने के नियमों से बीमारी का दायरा बढ़ नहीं पाता है। भारत जैसे देशों के लिए इस समय घबराने की कोई वजह नहीं है क्योंकि हमारे यहां भी मजबूत निगरानी प्रणाली काम कर रही है।
क्या भारत को रूस के इस प्लेग से डरने की जरूरत है?
भारतीय स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने साफ किया है कि इस घटना से भारत को चिंतित होने की कोई आवश्यकता नहीं है। यह घटना रूस के एक बहुत ही दूरदराज और ठंडे इलाके में हुई है जिसका अंतरराष्ट्रीय यात्राओं से सीधा संपर्क बहुत कम है। इसके अलावा हमारे देश के हवाई अड्डों और बंदरगाहों पर बाहरी संक्रमणों को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम हमेशा से मौजूद रहते हैं।
आम जनता को सोशल मीडिया पर चल रही बिना पुष्टि वाली खबरों और अफवाहों से बचना चाहिए। प्लेग कोई नया अज्ञात वायरस नहीं है बल्कि यह एक ऐसा जीवाणु है जिसके बारे में वैज्ञानिक सब कुछ जानते हैं। समय रहते सही दवा और सतर्कता ही इस बीमारी का सबसे बड़ा इलाज है। द फ्रीलान्स की इस ग्राउंड पड़ताल से यह साफ होता है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और डरने की कोई बात नहीं है।











