मध्य-पूर्व के दो ताकतवर देश सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात अब आमने-सामने आ गए हैं। कभी ये दोनों मुस्लिम देश हर मोर्चे पर साथ खड़े होते थे। लेकिन अब इनके बीच कई मुद्दों पर गंभीर मतभेद पैदा हो गए हैं।
इस ताज़ा कड़वाहट की सबसे बड़ी वजह यमन का विवाद है। यमन में दोनों देशों के हित टकरा रहे हैं। सऊदी अरब और यूएई ने वहां अलग-अलग गुटों का समर्थन किया है। इससे क्षेत्रीय वर्चस्व की लड़ाई और गहरी हो गई है।
अमेरिका और इजरायल का नया समीकरण
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वापसी के बाद पश्चिम एशिया में समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। खबर है कि अमेरिका, सऊदी अरब और इजरायल मिलकर एक नया मोर्चा बना रहे हैं। इसे ईरान के खिलाफ एक बड़ी रणनीति माना जा रहा है। इस मोर्चे में यूएई की भूमिका को लेकर भी कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
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सैन्य अभ्यासों और कूटनीति पर असर
- भारतीय वायु सेना ने हाल ही में यूएई में बहुराष्ट्रीय युद्धाभ्यास 'डेजर्ट फ्लैग-10' में हिस्सा लिया है।
- दूसरी तरफ, खाड़ी देशों के भीतर आपसी कूटनीतिक प्रतिस्पर्धा बढ़ती जा रही है।
- अर्थव्यवस्था और तेल बाजार में भी दोनों देश अब एक-दूसरे को कड़ी टक्कर दे रहे हैं।
आने वाले दिनों में खाड़ी के इन दो बड़े देशों की यह तनातनी पूरी दुनिया के लिए अहम होगी। तेल बाजार से लेकर क्षेत्रीय सुरक्षा तक, इसका असर दूर तक दिखाई देगा। भारत जैसे देशों के लिए भी यह कूटनीतिक संतुलन साधने का समय है।







