द फ्रीलान्स (नई दिल्ली): पिछले कुछ दिनों से भारतीय सर्राफा बाजार में जो उथल-पुथल मची है, उसने निवेशकों और आम खरीदारों दोनों को चौंका दिया है। हमारे ऑन-द-ग्राउंड डेटा और विभिन्न बाजार रिपोर्टों के विश्लेषण से यह साफ है कि सोना और चांदी अपनी रिकॉर्ड ऊंचाई से धड़ाम हो चुके हैं। सिर्फ 30 से 48 घंटों के भीतर सोने और चांदी की कीमतों में जो गिरावट दर्ज की गई है, उसने पिछले कई हफ्तों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। आखिर इस अचानक आई बड़ी मंदी के पीछे क्या कारण हैं और बाजार का ऊंट किस करवट बैठ रहा है, इसकी हमने गहराई से पड़ताल की है।
30 घंटे में 14 हजार तक का गोता: क्या कहते हैं आंकड़े
बाजार के शुरुआती आंकड़ों और सर्राफा व्यापारियों से बातचीत में यह सामने आया कि कीमतों में गिरावट का यह दौर बेहद तीव्र था। कुछ ही घंटों के भीतर सोने के भाव में चार से साढ़े चार हजार रुपये तक की भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह दो महीने के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। सोना अब डेढ़ लाख रुपये के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल चुका है। वहीं, चांदी की स्थिति और भी ज्यादा हैरान करने वाली रही। एक हफ्ते के भीतर चांदी के दाम 10,000 रुपये से अधिक लुढ़क चुके हैं, जबकि कुछ ही घंटों के भीतर इसमें 9,000 से 11,000 रुपये तक की भारी टूट देखने को मिली।
संबंधित खबरें
सात हफ्ते के निचले स्तर पर पीली धातु
लगातार तेजी के बाद पिछले कुछ सत्रों से सोने पर दबाव साफ नजर आ रहा था। गिरते-गिरते सोना अब सात हफ्ते के सबसे निचले स्तर पर जा पहुंचा है। जानकारों का मानना है कि पिछले एक महीने में ही सोने की कीमतों में लगभग 8,000 रुपये और चांदी की कीमतों में 14,000 रुपये तक का उतार-चढ़ाव देखा जा चुका है। अचानक आई इस सुनामीनुमाि गिरावट ने उन निवेशकों को सकते में डाल दिया है जिन्होंने ऊपरी स्तरों पर भारी निवेश किया था।
क्यों आ रहा है बाजार में भूचाल?
- वैश्विक आर्थिक संकेत: अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कमोडिटी एक्सचेंज पर बढ़ती बिकवाली और वैश्विक मंदी की आहट ने भारत के सर्राफा बाजार को सीधे तौर पर प्रभावित किया है।
- मुनाफावसूली (Profit Booking): रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद बड़े निवेशकों और फंड हाउसों द्वारा भारी पैमाने पर मुनाफावसूली की गई, जिसके चलते कीमतों में अचानक बड़ा करेक्शन देखने को मिला।
- डॉलर इंडेक्स की मजबूती: विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से भी बुलियन मार्केट में बिकवाली का दबाव बढ़ा है।
आम खरीदार और निवेशकों पर असर
एक तरफ जहां इस भारी गिरावट को शादियों के सीजन के मद्देनजर आम ग्राहकों के लिए राहत के रूप में देखा जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ निवेशकों की चिंताएं बढ़ गई हैं। बाजार विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि इस प्रकार की अत्यधिक अस्थिरता (Volatility) के दौर में जल्दबाजी में बड़ा निवेश करने से बचना चाहिए। बाजार की चाल पर बारीकी से नजर रखना ही इस समय सबसे समझदारी भरा कदम है।








