उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों से निकलकर अब सियासत के मैदान में कदम रखने वाली पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने सूबे की राजनीति में गर्माहट पैदा कर दी है। 'द फ्रीलान्स' की ग्राउंड इन्वेस्टिगेशन टीम द्वारा जुटाई गई जानकारी और उनके हालिया बयानों से साफ है कि उनका यह फैसला किसी सोची-समझी बड़ी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है। प्रशासनिक सेवा को अलविदा कहने के बाद दिव्या मित्तल ने अपने तेवर साफ कर दिए हैं और वह लगातार सत्ता पक्ष के साथ-साथ अन्य राजनीतिक दलों के निशाने पर भी आ गई हैं।
नौकरी को अलविदा: क्यों उठाया यह बड़ा कदम?
एक आईएएस अधिकारी के रूप में लंबा कार्यकाल पूरा करने के बाद अचानक राजनीति का रुख करना हर किसी को हैरान कर रहा है। दिव्या मित्तल ने खुद इस बात से पर्दा उठाया है कि उन्होंने इस प्रतिष्ठित नौकरी को क्यों छोड़ा। उनके करीबी सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह प्रशासनिक सीमाओं के भीतर रहकर उन बदलावों को जमीन पर नहीं देख पा रही थीं, जो वह वास्तव में जनता के लिए करना चाहती थीं। इस्तीफा देने के बाद उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अब खामोश नहीं बैठेंगी और उत्तर प्रदेश की जमीनी हकीकत को बदलने के लिए सीधे जनता के बीच जाएंगी।
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'किसी पार्टी के साथ नहीं, अकेले चलूंगी': राजनीतिक भविष्य की रणनीति
राजनीति में उतरने की घोषणा के साथ ही दिव्या मित्तल ने यह भी साफ कर दिया है कि शुरुआती दौर में वह किसी भी स्थापित राजनीतिक दल का दामन थामने नहीं जा रही हैं। उन्होंने ऐलान किया है कि वह पूरी तरह से स्वतंत्र रूप से, अकेले ही इस सफर को तय करेंगी। उनका यह बयान कि 'मैं यूपी में ही रहूंगी और किसी से डरूंगी नहीं', सीधे तौर पर राजनीतिक विरोधियों को एक खुली चुनौती माना जा रहा है। हालांकि, राजनीति के जानकारों का मानना है कि बिना किसी बड़े राजनीतिक दल के सहारे यूपी जैसी जटिल सियासत में टिके रहना एक लोहे के चने चबाने जैसा होगा।
सत्ता पक्ष और दलों की तीखी प्रतिक्रियाएं
पूर्व आईएएस के इस राजनीतिक कदम पर सियासी दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर समेत कई अन्य नेताओं ने उन पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। राजनैतिक विश्लेषकों का कहना है कि जैसे-जैसे दिव्या मित्तल अपने अगले कदमों का खुलासा करेंगी, राज्य में बयानबाजी और तेज होगी। भाजपा नेताओं और अन्य दलों की तरफ से उन पर लगातार हमले किए जा रहे हैं, लेकिन मित्तल के तेवर यह बता रहे हैं कि वह इन हमलों से डिगने वाली नहीं हैं।
पेंशन और प्रशासनिक नियमों का पेंच
इस बीच, कानूनी और प्रशासनिक गलियारों में एक और चर्चा जोरों पर है—क्या नौकरी से इस्तीफा देने के बाद दिव्या मित्तल को आईएएस की पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ मिलेंगे? सिविल सेवा के नियमों के अनुसार, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) और सीधे इस्तीफे (Resignation) के प्रावधान अलग-अलग होते हैं। चूंकि उन्होंने इस्तीफा दिया है, इसलिए पेंशन के हक को लेकर नियम क्या कहते हैं, इस पर कानूनी विशेषज्ञों की नजर टिकी हुई है। हालांकि, दिव्या मित्तल के लिए फिलहाल यह कानूनी पेचीदगियां दूसरे पायदान पर हैं, क्योंकि उनका पूरा फोकस इस समय अपनी नई राजनीतिक पारी के आगाज पर है।








