नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश भर में भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच मौसम विभाग ने मानसून को लेकर बड़ा अपडेट जारी किया है। पिछले चौबीस घंटों में इंटरनेट पर 'रुतुपव' यानी मानसून ट्रेंड में सबसे आगे रहा है क्योंकि लोग बारिश का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक इस साल मानसून का रुख काफी सकारात्मक नजर आ रहा है और यह समय से पहले केरल के तटों को छू सकता है। देश के दक्षिणी हिस्सों में बादलों की आवाजाही शुरू हो गई है और हवा में नमी बढ़ने लगी है। आम आदमी और किसान दोनों ही आसमान की तरफ टकटकी लगाए बैठे हैं ताकि इस साल अच्छी फसल और गर्मी से राहत मिल सके।
खेती किसानी से जुड़े मामलों में मानसून की चाल सबसे अहम मानी जाती है क्योंकि हमारी आधी से ज्यादा खेती बारिश के पानी पर ही टिकी होती है। पिछले साल कम बारिश या असमान बारिश की वजह से कई राज्यों में सूखा जैसी स्थिति बन गई थी जिससे फसलों को भारी नुकसान हुआ था। इस बार कृषि मंत्रालय और मौसम विभाग मिलकर राज्यों को समय पर सही जानकारी दे रहे हैं ताकि किसान अपनी बुवाई की योजना समय पर तैयार कर सकें। खेतों में जुताई और खाद-बीज का इंतजाम करने का यह सही समय है और किसान मानसून की पहली फुहार का इंतजार कर रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में चौपालों से लेकर बाजारों तक हर जगह बस मानसून की ही चर्चा हो रही है।
केरल तट पर कब तक पहुंचेगी पहली फुहार?
मौसम विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार मानसून इस साल मई के आखिरी हफ्ते या जून के पहले सप्ताह तक केरल के तट पर अपनी दस्तक दे सकता है। समुद्री हवाओं का रुख और बंगाल की खाड़ी में बन रहे कम दबाव के क्षेत्र इस बात का साफ संकेत दे रहे हैं कि इस बार बारिश अच्छी होगी। केरल के बाद यह धीरे-धीरे कर्नाटक, महाराष्ट्र और फिर उत्तर भारत के मैदानी इलाकों की तरफ बढ़ेगा। हर साल की तरह इस बार भी मौसम वैज्ञानिक सैटेलाइट के जरिए बादलों की हर एक गतिविधि पर कड़ी नजर रखे हुए हैं ताकि समय रहते सटीक जानकारी दी जा सके। मछुआरों को भी समुद्र में न जाने की सलाह दी जा रही है क्योंकि मानसून से पहले तटीय इलाकों में तेज हवाएं चल सकती हैं।
प्रशासन और स्थानीय निकाय भी मानसून के स्वागत के लिए अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं। बड़े शहरों में नालों की सफाई का काम तेज कर दिया गया है ताकि पिछले सालों की तरह सड़कों पर पानी भरने की समस्या से बचा जा सके। नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि जलभराव रोकने के लिए इस बार पुख्ता इंतजाम किए गए हैं और पंप सेट तैयार रखे गए हैं। बिजली विभागों को भी निर्देश दिए गए हैं कि आंधी-तूफान के समय बिजली सप्लाई को तुरंत ठीक करने के लिए विशेष टीमें तैनात रहें। आम जनता को भी सलाह दी गई है कि वे अपने घरों की छतों और पानी की निकासी के रास्तों को साफ रखें।
गर्मी से कब मिलेगी राहत और तापमान में कितनी आएगी गिरावट?
उत्तर भारत के राज्यों जैसे दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान में इन दिनों तापमान पचास डिग्री के करीब पहुंच रहा है जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। लोग दोपहर के समय घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं और अस्पतालों में डिहाइड्रेशन के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। मौसम विभाग का अनुमान है कि जैसे ही मानसून दक्षिण भारत में प्रवेश करेगा, उत्तर भारत में भी पश्चिमी विक्षोभ और पुरवा हवाओं के चलने से गर्मी के तेवर ढीले पड़ने लगेंगे। जून के दूसरे हफ्ते तक इन इलाकों में भी बादल छा सकते हैं और हल्की बारिश से तापमान में बड़ी गिरावट दर्ज की जा सकती है।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड टीम ने देश के कई हिस्सों का दौरा करके पाया कि लोग इस बार गर्मी से बेहाल हैं और हर कोई बस पहली बारिश का इंतजार कर रहा है। किसानों का कहना है कि अगर समय पर बारिश हो गई तो धान और अन्य खरीफ फसलों की पैदावार बंपर होगी जिससे महंगाई पर भी लगाम लगेगी। सरकार की तरफ से भी यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसानों को समय पर खाद और अच्छे बीज कम दामों पर मिल सकें। कुल मिलाकर देश का मिजाज इस समय पूरी तरह से मानसून के आने वाले पलों में रमा हुआ है और हर कोई प्रकृति की इस मेहरबानी का बेसब्री से इंतजार कर रहा है।
बाजार और अर्थव्यवस्था पर मानसून का क्या असर पड़ेगा?
भारतीय अर्थव्यवस्था को मानसून का बैरोमीटर कहा जाता है क्योंकि अच्छी बारिश का सीधा मतलब ग्रामीण इलाकों में पैसों का आना होता है। जब किसान की फसल अच्छी होती है तो बाजार में मांग बढ़ती है और मोटरसाइकिल, ट्रैक्टर से लेकर एफएमसीजी उत्पादों की बिक्री में तेजी आती है। शेयर बाजार के विश्लेषक भी मानसून के आंकड़ों पर पैनी नजर रखते हैं ताकि कृषि आधारित कंपनियों के शेयरों का आकलन किया जा सके। पिछले कुछ महीनों से महंगाई और सूखे की आशंका के चलते बाजार में जो सुस्ती छाई थी, मानसून की इस अच्छी खबर से उसके दूर होने की पूरी उम्मीद है।






