कर्नाटक के कारवार बेस पर नौसेना को मिली नई ताकत
भारतीय समुद्री सीमा की सुरक्षा को और अधिक अडिग बनाने की दिशा में देश ने एक और ऐतिहासिक छलांग लगाई है। कर्नाटक के सामरिक रूप से बेहद अहम कारवार नौसैनिक अड्डे पर स्वदेशी तकनीक से तैयार बहुउद्देशीय युद्धपोत 'आईएनएस समर्थक' को आधिकारिक तौर पर नौसेना के बेड़े में शामिल कर लिया गया। इस भव्य कमीशनिंग समारोह में देश की सैन्य आत्मनिर्भरता का एक नया और स्वर्णिम अध्याय लिखा गया। इस स्वदेशी पोत के आने से न केवल नौसेना की मारक क्षमता में इजाफा हुआ है, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत का दबदबा भी और अधिक मजबूत हो गया है।
समारोह के दौरान नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन और उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन की विशेष मौजूदगी रही। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य में जब समुद्री सुरक्षा की चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं, ऐसे समय में 'आईएनएस समर्थक' का बेड़े में शामिल होना नौसेना के लिए एक गेम-चेंजर साबित होगा। यह पोत भविष्य के नौसैनिक अभियानों की जरूरतों को ध्यान में रखकर पूरी तरह से तैयार किया गया है।
'मेक इन इंडिया' के तहत निजी क्षेत्र का शानदार योगदान
इस युद्धपोत की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह देश की किसी निजी पोत निर्माण कंपनी द्वारा तैयार किया गया पहला बहुउद्देशीय पोत (MPV) है। इसका निर्माण देश की जानी-मानी रक्षा निर्माता कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) ने तमिलनाडु के कट्टुपल्ली स्थित अपने अत्याधुनिक शिपयार्ड में किया है। इस परियोजना की सफलता इस बात का प्रमाण है कि भारतीय निजी उद्योग अब रक्षा उत्पादन में किस उच्च स्तर पर आत्मनिर्भर हो चुका है।
पोत के निर्माण में इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है कि इसमें विदेशी उपकरणों पर निर्भरता कम से कम हो। यही वजह है कि 'आईएनएस समर्थक' में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी उपकरणों और सामग्रियों का इस्तेमाल किया गया है। इसका पूरा डिजाइन, इंजीनियरिंग और निर्माण कार्य एलएंडटी के इन-हाउस युद्धपोत डिजाइन केंद्र द्वारा ही पूरा किया गया है। यह उपलब्धि देश के डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए एक मील का पत्थर साबित हो रही है।
समुद्री निगरानी से लेकर हथियारों के परीक्षण तक का अनूठा मंच
'आईएनएस समर्थक' केवल एक पारंपरिक युद्धपोत नहीं है, बल्कि यह अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस एक बहुउद्देशीय परीक्षण प्लेटफॉर्म है। 'समर्थक' नाम के अनुरूप ही यह पोत नौसेना के हर बड़े अभियान में मददगार साबित होगा। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह पोत नौसेना के नए स्वदेशी सेंसर, हथियारों और मानवरहित प्रणालियों (ड्रोन) के परीक्षण और मूल्यांकन के लिए एक समर्पित मंच के रूप में कार्य करेगा।
समुद्र में गश्त करने के दौरान यह पोत न केवल निगरानी रखेगा, बल्कि जरूरत पड़ने पर आपदा राहत, मानवीय सहायता और पर्यावरण संरक्षण जैसे अभियानों में भी अहम भूमिका निभाएगा। इसके प्रतीक चिह्न पर उकेरा गया समुद्र की लहरों से बाहर आता हुआ हाथी देश की ताकत, बुद्धिमत्ता और फुर्ती का प्रतीक है। यह पोत समुद्र के भीतर और सतह पर एक साथ कई मोर्चों पर दुश्मन के नापाक इरादों को नेस्तनाबूद करने की पूरी क्षमता रखता है.
भविष्य के युद्ध के तौर-तरीकों को बदलेगी आधुनिक तकनीक
समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने इस बात पर जोर दिया कि आधुनिक युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ऑटोनॉमस सिस्टम्स, मानवरहित प्लेटफॉर्म और उन्नत सेंसर अब नौसैनिक रणनीतियों का अहम हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे समय में 'आईएनएस समर्थक' जैसी प्रणालियां भारत को सामरिक रूप से बहुत आगे रखती हैं।
"समुद्री प्रौद्योगिकी तेजी से बदल रही है। स्वायत्त प्रणालियां, मानवरहित मंच, उन्नत सेंसर, कृत्रिम मेधा और नेटवर्क आधारित अभियान नौसैनिक युद्ध तथा समुद्री सुरक्षा का स्वरूप पूरी तरह से बदल रहे हैं। ऐसे में 'आईएनएस समर्थक' जैसी स्वदेशी तकनीक हमारी नौसेना को भविष्य की हर चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार करती है।" — सी. पी. राधाकृष्णन, उपराष्ट्रपति
यह युद्धपोत एक 'मदरशिप' के रूप में भी काम करने की क्षमता रखता है, यानी यह जरूरत पड़ने पर एक ही कमांड के तहत कई छोटे ऑपरेशनों को नियंत्रित और संचालित कर सकता है। इस पोत पर अत्याधुनिक डायनेमिक पोजिशनिंग प्रणाली भी लगाई गई है, जो इसे समुद्र में अत्यधिक स्थिर रहकर जटिल कार्य करने में सक्षम बनाती है।
सीमा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ता मजबूत कदम
'आईएनएस समर्थक' इस श्रेणी का पहला पोत है, जबकि इसी शृंखला का दूसरा पोत 'उत्कर्ष' वर्तमान में समुद्री परीक्षणों के दौर से गुजर रहा है। यह पूरी शृंखला भारतीय नौसेना को वैश्विक स्तर पर एक अत्यंत प्रभावशाली और स्वावलंबी बल के रूप में स्थापित कर रही है। देश के घरेलू शिपयार्ड्स में इस तरह के युद्धपोतों का निर्माण होना यह साबित करता है कि भारत अब रक्षा उपकरणों के मामले में आयातक से निर्यातक बनने की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।
दुष्परिणामों से निपटने और हिंद महासागर में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए यह पोत नौसेना के बेड़े की रीढ़ साबित होगा। नौसेना के कमांडरों और इंजीनियरों का मानना है कि आने वाले समय में यह पोत स्वदेशी रक्षा तकनीक के विकास का सबसे बड़ा केंद्र बनेगा, जिससे देश की समुद्री सीमाएं और अधिक सुरक्षित होंगी।









